Shaligram Stone Benefits in Hindi

Shaligram stone का हमारे ज्योतिष में सबसे अधिक महत्व है। इस पवित्र ईश्वर रूपी पत्थर को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के रूप में पूजा जाता है जिसे हम सालग्राम शिला या शालिग्राम भगवान के नाम से पहचानते हैं।

What is Shaligram?

Shaligram मुख्यतः पत्थर न होकर एक प्रकार के जीवाश्म होते हैं जो कि नेपाल की गंडकी नदी में पाये जाते हैं। इन पत्थरों की मुख्य विशेषता है कि इनके बीच में सुदर्शन चक्र की आकृति बनी होती हैं। आदि गुरु शंकराचार्य ने उस पत्थर के महत्व को तैत्रीय उपनिषद के ब्रह्मसूत्र में बताया है । हमारे 18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण में वैशाख महास्कंद के नवें श्लोक में कहा गया है कि-

शालिग्राम शिला यस्य गृहे तिष्ठति मानदा |
अथवा भागतं गृहे रातवै भागते कलि: ।।

अथवा जिसके घर में शालिग्राम भगवान विराजित होते हैं उनके घर में कभी भी कलियुग का वास नहीं सकता, और नारद पुराण के प्रथम भाग के प्रथम पद में कहा गया कि जिसके घर में शालिग्राम पत्थर विधमान होते हैं वहाँ भूत पिशाच, ग्रह दोष से मुक्त तथा कोई भी बाधा नहीं आती है। शालिग्राम के साथ एक महत्वपूर्ण पत्थर गोमती चक्र होता है जो कि लक्ष्मी का रूप होती हैं, इन दोनों को साथ में रखने से घर में धन – संपदा बनी रहती है।

शालिग्राम की पूजा करने के फायदे

  • इस प्रभावशाली शिला की पूजा करने मात्र से घर एवं कार्यालय में विष्णु जी के साथ महालक्ष्मी का निवास होता है।
  • शालिग्राम की पूजा हमेशा तुलसी के साथ ही करें। ऐसा करने से भगवान के आशीर्वाद से जल्द ही लाभ प्राप्त होता है।
  • इनका विवाह भगवती स्वरूप माँ तुलसी के साथ करने से सभी प्रकार के द्वेष, पारिवारिक कलेश, पाप, संकट, दुख, रोग आदि नष्ट हो जाते हैं।
  • भक्ति-भाव से माँ तुलसी एवं शालिग्राम का विवाह कराने से उतना ही पुण्य प्राप्त होता है जितना कन्यादान करने से मिलता है।
  • इनकी पूजा करने से तन, मन और धन से सम्बन्धित सभी प्रकार की परेशानियां दूर होती है।
  • जिस घर में भगवान शालिग्राम की शिला विराजमान होती है उस घर को तीर्थ के समान माना जाता है।
  • पूजा के समय भोग मे चढ़ाया हुआ चरणामृत का सेवन करने से भक्त को चारधामों का पुण्य फल मिलता है।
  • इनकी प्रतिदिन घर में पूजा करने से वहां के सभी वास्तु दोष और नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती है

How to Keep Shaligram at Home

  • शालीग्राम भगवान को चातुर्मास में कुछ स्थानों पर भगवान शंकर के रूप में भी पूजा जाता है। यह पवित्र पत्थर गण्डकी नदी मे भगवान विष्णु के आशीर्वाद से प्राप्त होता है अत: इनकी किसी प्रकार की भी प्राण- प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
  • इस दिव्य पत्थर के ऊपर से कभी भी तुलसी दल नहीं हटानी चाहिए। इन्हें नियमित गंगाजल से स्नान कराकर चंदन इत्यादि लगाएं। ध्यान रखें की इन्हे एकदम शुद्ध तुलसी दल व पुष्प ही चढ़ाये । इन्हें आप पीले वस्त्र भी धारण करा सकते हैं।
  • प्रतिदिन इनके सामने धूप, दीप, नैवेद्य या प्रसाद चढ़ाये।
  • Shaligram Stone को  स्वच्छ तांबे के पात्र में ही स्नान कराये तथा पूजन के समय भोग मे चढ़े चरणामृत को ग्रहण अवश्य करें। ऐसा करने मात्र से शरीर के रोग व्याधा दूर होती है
  • आप हर पूर्णिमा के दिन शालिग्राम भगवान की सत्यनारायण कथा किसी पुरोहित या स्वयं शुद्ध उच्चारण करने में सक्षम हो तो करवाये। इतना करने मात्र से ही आप विभिन्न प्रकार की ग्रह-बाधा, संकट, बाधाओं, भूत-प्रेत इत्यादि से बचे रहेंगे एवं आप तथा आपके परिवार को सुख संपदा इत्यादि भगवान श्री हरि की कृपा से प्राप्त होगी |

Shaligram pooja vidhi

  1. पूजा-विधि संपन्न करते समय आप उस स्थान पर बैठ जाएं जहाँ से आपका मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर हो।
  2. पूजा करते वक़्त सबसे पहले शंख मे गंगाजल को भर ले और उसके बाद इस से शालिग्राम को स्नान करवाएं।
  3. शालिग्राम पर छिड़कने के लिए पानी से भरे स्टील के कलश में कुछ दूब घास रखें।
  4. अब शालिग्राम को कुछ पीपल के पत्तों पर विराजमान कर दें एवं इसके दाहिनी दिशा में कपूर, अगरबत्ती और घी का दीपक जलाएं।
  5. ध्यान रहे की शालिग्राम पर हमेशा चंदन का लेप लगाएं और शिला के सामने तुलसी के कुछ ताजे हरे पत्ते रखें।
  6. मन ही मन भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए इस Shaligram mantra का नौ बार जाप करें:
    “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे”
  7. इसके बाद शालिग्राम पर दूध, फल या मिठाई का भोग लगाएं। कुछ पैसे भेंट करें और फिर उन पैसों को किसी गरीब व्यक्ति को दान में दे। ऐसा करने से भगवान हरी अत्यधिक प्रसन्न होकर आपको अपना आशीर्वाद प्रदान करते है।

Original Shaligram stone price

Shaligram Stone आप किसी भी ऑनलाइन स्टोर से प्राप्त कर सकते है परन्तु ज्यादा मुनाफा कमाने की वजह से इस पवित्र शिला को नकली रूप में भी बेचा जा रहा है। 100% original shaligram online आप हमारी वेबसाइट से खरीद सकते है। यहाँ आपको अभिमंत्रित किया हुआ शुद्ध शालीग्राम एकदम उचित मूल्यों में मिलता है।

Chandan Mala Benefits in Hindi

Chandan mala हमारे हिंदू धर्म में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इस माला का प्रयोग इष्ट पूजा में किया जाता है। प्राचीन लिखित ताम्रपत्रों के अनुसार चन्दन की माला के द्वारा जाप किये गए मंत्र शीघ्र ही लाभ पंहुचाते है तभी यह माला का भारतीय पूजन विधि में बहुत ही महत्व रखती है। [1]

Chandan mala क्यों धारण करें

Chandan mala में बहुत प्रकार के औषधीय गुण होते है जिसके द्वारा व्यक्ति का शरीर स्वास्थ्यवर्धक और जीवन दीर्घायु बना रहता है।[2] चन्दन माला के भी दो प्रकार होते है जिन्हे रंगों के चयन के मुताबिक नाम दिया गया है जैसे laal chandan mala और सफ़ेद चन्दन की माला।

Lal chandan ki mala को rakta chandan mala भी कहा गया है जिसका रंग एकदम रक्त की तरह लाल होता है। हमारे शास्त्रों में दोनों मलाओ का महत्व अलग-अलग दिया गया है। लाल चन्दन की माला का प्रयोग देवी जाप मे किया जाता है जैसे की दुर्गा मंत्र, त्रिपुरी मंत्र, लक्ष्मी मंत्र आदि एवं सफ़ेद चन्दन की माला भगवान विष्णु, श्री राम, कृष्णा आदि की पूजा मे उपयोग की जाती है। जैसे चन्दन की मनोभावन खुशबू सारे वातावरण में एक अलग ही प्रकार का आनंद देती है वैसे ही इसकी सकारात्मक ऊर्जा से आपके अंदर एक मानसिक शांति का विकास होता है। यह कोई साधारण नहीं अपितु बहुत ही प्रभावशाली माला है जिसके द्वारा घर में पूजा-पाठ करने से सुख-शांति और संपन्नता आती है। यदि इसके द्वारा मंत्रों का जाप किया जाये तो उनका लाभ शीघ्र ही मिलता है

चन्दन की माला पहनने के फायदे (Chandan Mala Benefits)

  • चन्दन को शीतलता का प्रतीक माना गया है। इसको धारण करने से मस्तिष्क को ठंडक मिलती है।
  • पढ़ने लिखने वाले छात्रों के लिए यह माला बहुत लाभकारी मानी जाती है। इसके द्वारा पढ़ाई मे एकाग्रता आती है।
  • यदि किसी व्यक्ति का मन अशांत और खिन्न रहता है, तो उस जातक को यह माला अवश्य ही धारण करनी चाहिए।
  • इस माला में औषधीय गुण होते है जिसके द्वारा इसे धारण करने से तरह-तरह के रोगों में लाभ मिलता है।
  • जीवन में यदि कर्ज की समस्या है या कहीं पैसा अटका हुआ है तो इस माला के द्वारा प्रतिदिन जाप करने से जल्द ही धन प्राप्ति होती है और आर्थिक संकट टल जाता है।

Chandan mala uses – ( चन्दन माला का उपयोग )

  1. रक्त चन्दन माला को माँ दुर्गा मंत्र के जाप में प्रयोग करना चाहिए। इसके द्वारा कुंडली में मंगल दोष से राहत मिलती है।
  2. भगवान विष्णु, कृष्ण, श्री राम आदि की उपासना और जाप मे सिर्फ original white chandan mala ही प्रयोग में लानी चाहिए।
  3. महालक्ष्मी मंत्र, महासरस्वती मंत्र एवं गायत्री मंत्र आदि मे chandan ki mala से जाप करना बहुत ही प्रभावशाली माना गया है।
  4. यदि आप किसी पूजा या मंत्र को सिद्ध करना चाहते है तो इस माला के प्रयोग से आपको जल्द ही फल प्राप्त होता है।

Red Chandan mala benefits – ( लाल चन्दन के लाभ )

  1. लाल चन्दन की माला के द्वारा जाप किये गए भगवती मंत्र से माँ दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती है।
  2. लाल माला के उपयोग से कुंडली में मंगल के दुष्प्रभाव को कम किया जाता है।
  3. धन और समृद्धि पाने के लिए इस माला से माँ लक्ष्मी की उपासना करें।
  4. लाल चन्दन की माला को घर की चौखट पर टांगने से किसी की भी क्रूर दृष्टि या जादू टोने का असर नहीं होता है।

Chandan mala price

चन्दन माला आपको किसी भी पूजा स्टोर या ऑनलाइन साइट पर मिल जाएगी परन्तु Pure Chandan Mala के लिए आप हमारी वेबसाइट से खरीद सकते है।। यहाँ आपको माला की जानकारी तो मिलेगी ही और साथ ही असली माला उचित मूल्यों मे भी प्राप्त होंगी।

धन लक्ष्मी यंत्र (Dhan Lakshmi Yantra) का लाभ और जाने इसका प्रयोग कैसे करें?

Shri Mahalaxmi Dhan Varsha Yantra क्या होता है?

Dhan lakshmi yantra ऐश्वर्य और समृद्धि का एक ऐसा अचूक उपाय है जिसकी कृपा से माँ लक्ष्मी की अनुकम्पा सदैव आपके ऊपर बनी रहती है। मान्यता के अनुसार जहाँ भी इसकी स्थापना होती है, वहां देवी लक्ष्मी आने पर विवश हो जाती है।

पुराणों के अनुसार Dhan Lakshmi Yantra को लक्ष्मी माता के मंत्रों का एक भौतिक स्वरूप बताया गया है। इस यंत्र में विशेष मंत्रों का संकलन है जिन्हें एक आकार प्रदान किया गया है, इसका प्रयोग माँ लक्ष्मी की साधना में किया जाता है। इस यंत्र में कुछ विशेष आकृति, बिंदु और रेखाएं होती है जिनका सम्बन्ध मंत्रो से होता है। धन लक्ष्मी यंत्र सबसे पवित्र और शक्तिशाली यंत्र है जिसके द्वारा आपके जीवन मे धन-वर्षा होती है, आर्थिक संकट हमेशा के लिए टल जाता है और ऐश्वर्य-वैभव की प्राप्ति होती है।

यह Laxmi Yantra सिर्फ धन का प्रतीक ही नहीं अपितु अपूर्व सिद्धि और समृद्धि का भी स्रोत भी है। माना जाता है की जहाँ माँ लक्ष्मी का वास होता है वही भगवान विष्णु विराजमान होते है, यही वजह है की माँ लक्ष्मी का यह चमत्कारी यंत्र धन लाभ के साथ-साथ आपकी सारी मनोकामनाएं भी पूर्ण करता है।

Benefits of Dhan lakshmi yantra – (धन लक्ष्मी यंत्र के लाभ)

आइये जानते हैं Laxmi Yantra benefits in hindi :

1. इस यंत्र की महिमा से माता लक्ष्मी की कृपा आप पर सदैव बनी रहती है।

2. घर में कभी धन की कमी नहीं होती और सुख-शांति बनी रहती है।

3. यह चमत्कारी यंत्र आपको सभी प्रकार के आर्थिक संकटों से बचाने के लिए बहुत प्रभावकारी माना गया है।

4. अगर परिवार का कोई भी व्यक्ति बहुत समय से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है तो इस यंत्र की विधि विधान से पूजा करने से उस रोग में लाभ मिलता है।

5. इस यंत्र की महिमा से आपका कोई भी पुराना रुका हुआ पैसा वापस मिलता है और जल्द ही कर्ज से छुटकारा प्राप्त होता है।

6. प्रतिदिन इस यंत्र की पूजा-अर्चना करने से नये-नये धनप्राप्ति के मार्ग उपलब्ध होते है।

How to use Dhana Lakshmi Yantra- ( धन लक्ष्मी यंत्र का प्रयोग कैसे करें)

1. Dhan Laxmi Yantra की पूजन विधि की शुरुआत प्रातः काल से ही आरम्भ होती है। इसके लिए सुबह-सुबह स्नान करें और पीले रंग के साफ कपड़े धारण कर ले।

2. Laxmi yantra को अच्छी तरह से दूध और गंगाजल के मिश्रण से स्नान कराएं और किसी साफ सूती लाल कपड़े के ऊपर इसे रख के किसी भी पवित्र जगह पर स्थापित कर दीजिये।

*ध्यान रहे कि आप इसे तिजोरी, मंदिर, रसोई घर या कार्यालय में रख सकते है।

3. इस यंत्र को आप पूजा से पहले पंचामृत मे रख दें और उसके ऊपर लाल चन्दन छिड़क दें। इसके बाद कुछ लाल गुलाब के फूल और चावल ले और उसे यंत्र के ऊपर चढ़ा दें और बाद मे इसके ऊपर लाल चुन्नी धक दें।

4. Dhana lakshmi यंत्र के सामने घी का दिया जलाएं और माँ धनलक्ष्मी यंत्र की आरती उतारे। आप चाहे तो दुर्गासप्तशी का पाठ भी कर सकते है।

5. पूरी श्रद्धा के साथ आप Dhan laxmi यंत्र के सामने हाथ जोड़ के खड़े हो जाएँ और मन ही मन इस मंत्र का पाठ करें
ॐ श्रींह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्मी नम:।।

6. इस प्रकार विधि विधान से पूजा करने से आपका यह प्रभावकारी लक्ष्मी यंत्र जल्द ही आपको फल देगा।

Laxmi yantra price

लक्ष्मी यंत्र वैसे तो आपको किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन भक्ति साइट पर मिल जायेगा परन्तु असली यंत्र सिर्फ भरोसेमंद जगह से ही ले। यदि आप इसके बारे में अधिक जानकारी चाहते है तो एक बार Dhan Lakshmi Yantra पर क्लिक करें। आप चाहे तो यहाँ से भी इस यंत्र को खरीद सकते है। यहाँ आपको एकदम असली सिद्ध किया हुआ यंत्र मिलेगा जिसका असर जल्दी ही देखने को मिल जायेगा।

शुद्ध रुद्राक्ष (Rudraksha mala) की माला कहाँ से खरीदें? और जाने क्या है इसको धारण करने के नियम

रुद्राक्ष की माला ( Rudraksha mala )

अक्सर हम बड़े-बड़े महान साधु-संतो को rudraksha mala पहने हुए देखते है। आखिर ऐसा क्या खास होता है रुद्राक्ष की माला में जो इसे इतना महत्वपूर्ण बनाती है? माना जाता है की रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव यानि के रूद्र के अश्रु से हुई थी। इसी वजह से यह रुद्राक्ष कहलाया जाता है। हिन्दू धर्म में इसे अत्यंत पूजनीय मानते है। रुद्राक्ष को माला के रूप में धारण करना पवित्र होता है इसलिए मंत्र जाप करते समय इसका उपयोग किया जाता है।

मूल रुद्राक्ष की माला कहाँ से खरीदें (where to buy original rudraksha mala)

Rudraksha mala पंचमुखी से लेकर एकमुखी तक मे मौजूद है। यह ऑफलाइन मार्केट के साथ साथ आजकल ऑनलाइन भक्ति वेबसाइट पर खूब उपलब्ध है परन्तु असली रुद्राक्ष की माला मिलना मुश्किल होता है। यदि आप एकदम शुद्ध असली रुद्राक्ष की माला एकदम सही मूल्य में प्राप्त करना चाहते है तो आप हमारी वेबसाइट से Rudraksha ki Mala खरीद सकते है। यहाँ पे रुद्राक्ष की माला से सम्बंधित हर तरह की जानकारी दी गयी है।

Rudraksha mala benefits in hindi

हिन्दू धर्म में रुद्राक्ष की एक अलग पहचान है। मान्यता है की इसमे ग्रहों को नियंत्रित करने की एक उत्तम शक्ति समाहित होती है। रुद्राक्ष एक मुखी से लेकर 27 मुखी तक में प्राप्त किये जाते है जिनका प्रयोग rudraksh ki mala बनाने में प्रयोग किया होता है। शास्त्रों में रुद्राक्ष की महिमा का बखान जोर-शोर से किया गया है। आईये जानते है की ऐसा क्या होता है rudraksha mala को पहनने से की उसे हमारे ज्योतिष में इतना चमत्कारी माना गया है।

रुद्राक्ष की माला पहनने के फायदे (rudraksh ki mala pahnane ke fayde)

1. इस माला को गले मे धारण करने से गंभीर से गंभीर बीमारी में लाभ मिलता है और शरीर चुस्त-दुरुस्त हो जाता है।

2. Rudraksh mala को धारण करने से आप अध्यात्म की तरफ आकर्षित होते है और सकारात्मक ऊर्जा सदैव आपके जीवन मे बनी रहती है।

3. भगवान शिव की दृष्टि को आकर्षित करने के लिए इस माला को प्रभावशाली उपाय माना गया है।

4. गले मे पहनने से यह माला एक कवच का कार्य करती है और आपके चारो तरफ एक रक्षा चक्र बना देती है जिसके कारणवश आप हमेशा हर तरह की अनदेखी मुसीबतों से बचे रहते है।

5. यदि इस रुद्राक्ष की माला को कोढ़, पथरी, स्त्री रोग, पीलिया, मूत्र रोग कफ, बेचैनी, फेफड़े, हृदय रोग नपुंसकता, निराशा, आदि रोगी पहने तो उन्हें जल्दी ही इन रोगों से मुक्ति मिलती है।

Rudraksha mala rules in hindi

हमारे संसार मे कोई भी कार्य बिना नियमो के पालन के संभव नहीं हो सका है। नियम वह प्रक्रिया है जिसकी सहायता से जीवन को जीने की सीख प्राप्त होती है। उसी प्रकार से कुछ rudraksha mala rules है जिनका पालन किये बिना इस प्रभावशाली माला का फल हमें नहीं मिल पता है। जानिए वह कौन-कौन से नियम से जो हमें जानना बहुत जरूरी है।

1. सबसे पहले और ध्यान रखने वाली बात कि जिस रुद्राक्ष की माला से आप जाप कर रहे हैं उसे बिलकुल भी अपने गले धारण न करें।

2. ध्यान रखने योग्य बात है की आप जो भी रुद्राक्ष की माला को पहने उसमें एक बिन्दु ही होना चाहिए, एक से अधिक बिंदु का होना हानिकारक होता है। इसकी वजह से जो लोग संवेदनशील है उन्हें स्वास्थ्य में परेशानी आ सकती है।

3. व्यस्को को हमेशा 84 से अधिक के रुद्राक्ष की माला ही पहननी चाहिए।

4. एक बार अगर रुद्राक्ष की माला को धारण कर लेते है तो ध्यान रखिये की सुबह शाम भगवान शिव की उपासना करें और ॐ नमः शिवाय का जाप करें।

5. जो लोग rudraksh ki mala पहनते है उन्हें मांसाहारी, प्याज, लहसुन, मदिरा एवं अपशिष्ट पदार्थों के सेवन का त्याग करना चाहिए, वरना रुद्राक्ष का कोई भी चमत्कारी असर आपके जीवन में प्रवेश नहीं करेगा।

रुद्राक्ष की माला कौन पहन सकता है (Who can wear rudraksha mala in hindi)

Rudraksha mala को सभी आयु के जातक धारण कर सकते है परन्तु जो लोग अपराध करते है, मदिरा का सेवन करते है वो लोग इस पवित्र माला को पहने के लिए वर्जित है। यदि व्यक्ति मसाहार भोजन करता है या मदिरा पान का सेवन करता है तो उसे यह सब छोड़ना होगा अथवा rudraksha ki mala को इस समय पहनना पाप के समान होता है। स्त्री-पुरुष के बीच सम्भोग के समय भी rudraksh को पहनने की मनाही की गई है।

रुद्राक्ष की माला कैसे धारण करें (How to wear rudraksha mala in Hindi)

Rudraksh mala को धारण करने के लिए सबसे शुभ दिन सोमवार माना गया है जिसे हम भोले नाथ का वार भी कहते है। इस दिन प्रातः काल में स्नान करके पीले वस्त्र धारण कर ले। फिर rudraksh ki mala को एक पीतल के बर्तन में रख ले और किसी पास में ही भगवान शिव के मंदिर चले जाए। फिर भोले नाथ के शिवलिंग के सामने बैठ जाए और 108 बार ॐ नमः शिवाय का जाप करें। इस कार्य को पूर्ण करने के बाद माला को मंदिर के ब्राह्मण को दे और उन्हीं के द्वारा इस माला को अपने गले में पहने। ऐसा करने से आपकी रुद्राक्ष की माला सिद्ध हो जाएगी और उसका असर आपको जल्द ही देखने को मिलेग

What is rudraksha scientific benefits

रुद्राक्ष के बीज मे केमो फार्माकोलॉजिकल नाम का एक तत्त्व पाया जाता है जिसकी सहायता से व्यक्ति का ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल मे रहता है।
कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित होने की वजह से व्यक्ति को दिल से जुडी किसी भी बीमारी होने की गुंजाइश नहीं होती हैं।
रुद्राक्ष को आयरन, कैल्शियम, सोडियम जैसे कई अन्य तत्व का खजाना कहा जाता है , जिसकी वजह से शरीर नर्वस सिस्टम सही रहता है और तरह तरह की बीमारियों से छुटकारा मिलता है

What are the 54 beads rudraksha mala benefits

54 रुद्राक्ष वाली माला को मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे प्रभावशाली माना गया है। इसको पहनने से मानसिक शांति मिलती है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है।

108 rudraksha mala benefits

108 रुद्राक्षओं की माला को सभी तरह की मालाओं में सबसे पवित्र एवं श्रेष्ठ माना गया है। इस माला से जाप करने के साथ साथ ही यदि इसे गले मे धारण किया जाए और सारे नियमों का पालन किया जाये तो जीवन की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

Rudraksha wearing rules for females

हिन्दू धर्म में माना गया है कि मासिक धर्म के समय स्त्रियों का शरीर अशुद्ध होता है और इस समय महिलाओं को रुद्राक्ष धारण करना वर्जित है।

मेरु रिंग (Meru Ring) के फायदे और जाने मेरु की अंगूठी कैसे पहनें?

सोचिये अगर मेहनत के साथ किस्मत भी आपका साथ देने लगे तो कहना ही क्या है। मेहनत तो हमारे हाथ मे है लेकिन किस्मत आपके ग्रहों में समाहित है। किस्मत को पार लगाने के लिए लोग तरह तरह के जतन करते है परन्तु ज्ञान के अभाव में सही तरह से उपाय नहीं कर पाते। इसी कारणवश हम आज अपने लेख में एक ऐसी अंगूठी का जिक्र करेंगे जिससे आपकी किस्मत का ताला चुटकियों में खुल जाएगा। यह अंगूठी है मेरु की। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार meru ring एक अजूबा है। इसका संबंध ग्रहों के सर्वोच्च बिंदु से है। इस अंगूठी को धारण करने से माँ लक्ष्मी सदैव्य के लिए आपके जीवन मे प्रवेश करती है जिससे धन एवं संपत्ति की कभी कमी नहीं होती तथा जातक को जीवन मे कभी भी पैसो के लिए नहीं भटकना पड़ता है।

What is Meru Ring?

Meru Ring: भारतीय ज्योतिष और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पुरानी कथाओं और लोक कहानियो मे Meru ( मेरु ) का मतलब प्रसिद्ध पर्वत या फिर उच्च चोटी से होता था। meru ring को tortoise ring अथवा कछुआ रिंग भी कहा जाता है क्यूंकि इसकी आकृति कछुआ के सामान होती है। यह Turtle Ring एक तरह की अपने आप में एक चमत्कार है जिसकी सहायता से आप अपने जीवन मे एक सकारात्मक बदलाव लाके खुशियों का आगमन करवा सकते है। इसकी ऊर्जा इतनी तीव्र होती है जिससे मनुष्य में अलग ही तरह से आत्मविश्वास आता है और वह जीवन के हर मुकाम मे सफलता हासिल करता है।

पुराणों के आधार पर माना जाता है की भगवान विष्णु ने कछुआ का रूप लिया था और यही वजह है की हमारे शास्त्रों में कछुए को बहुत पवित्र माना जाता है। माँ लक्ष्मी का वास सदा ही भगवान विष्णु के साथ रहता है तभी यह कहा गया है की जिस घर में कछुए की आकृति की कोई भी वस्तु होती है वहां माँ लक्ष्मी सदैव निवास करती है और सुख समृद्धि हमेशा बनी रहती है।

How to wear turtle ring -( कछुआ रिंग कैसे पहने)

Turtle ring को पहनने से पहले यह ध्यान रखे की कछुआ रिंग का सिर वाला भाग उसको धारण करने वाले व्यक्ति की दिशा की ओर होना चाहिए इस से धन आपके जीवन की तरफ आकर्षित होता है। यदि आप इसे गलत तरीके से पहनेगे तो धन आने की बजाय आपके जीवन से चला जाएगा और धन हानि होगी। यह भी धयान रखे की meru ring को बार-बार उतारे नहीं और ना ही इसे घुमाये ऐसा करने से कछुए रिंग के नुक्सान आपको देखने पड़ेंगे।

मेरु अंगूठी किस उंगली में पहनें – Meru ring wear in which finger

Meru ring को आप हमेशा सीधे हाथ की मध्यमा यानी बीच वाली उंगली या अंगूठे की नजदीक वाली तर्जनी उंगली में ही धारण करें। ऐसा करने से आपको लाभ जल्दी मिलेगा।

कछुआ रिंग किस दिन पहने

कछुए को भगवान विष्णु ओर माँ लक्ष्मी से जोड़ा गया है इसीलिए meru ring को शुक्रवार के दिन धारण करना ही शुभ माना जाता है। ध्यान रखे की tortoise ring or meru ring सिल्वर मेटल अथवा चांदी की ही होनी चाहिए। इसलिए हमेशा meru ring silver ही पहने।

कछुआ रिंग किस राशि को पहनना चाहिए

ज्योतिषी के अनुसार meru ring को पहनना काफ़ी लाभदायक माना गया है परन्तु कुछ राशियों को इस से दूर ही रहना चाहिए। मेष, वृश्चिक, कन्या और मीन को छोड़कर सारी राशियों के लिए Tortoise Ring अत्यन्त फलदायक है। कुम्भ राशि वालो के लिए कछुए की अंगूठी बहुत शुभ मानी जाती है। परन्तु वृश्चिक राशि के लिए कछुए की अंगूठी अत्यंत कष्टदायक है। इस से दूर रहना चाहिए वरना कछुए रिंग के नुकसान से नकारात्मक ऊर्जा हावी हो जाती है, व्यापार में तबाही हो जाती है, करियर में मुश्किलें होती है और परिवार में कलेश होने लगता है।

Meru ring for men

ध्यान रखे की meru ring अथवा turtle ring विश्वास वाली जगह से ही खरीदें जिससे आपको इसके उचित परिणाम मिलेंगे। आप हमारी वेबसाइट से भी यह Meru Ring प्राप्त कर सकते है जहाँ पर यह अंगूठी माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु के मंत्रों द्वारा पूजन विधि से अभिमंत्रित करके आपके पास भेजी जाएगी ताकि आपको यह ज्यादा लाभ दे सके।

तुलसी की माला (Tulsi ki mala) के फायदे और जाने कैसे पहनें तुलसी की माला

सोचिये की सिर्फ एक छोटे से पौधे से आपके जीवन के सारे स्वास्थ्य से जुड़े कष्ट दूर हो जाये तो क्या कहने। एक ऐसा पौधा जो प्राचीन काल से मानव जाती को अपने औषधीय गुण से लम्बी आयु प्रदान करता हुआ आया है। इसे हम तुलसी का पौधा कहते है जो हिंदुओं के घर में अवश्य देखें को मिल जाता है। तुलसी सिर्फ एक पौधा नहीं है। यह एक चमत्कारी बूटी है जिसको माला के रूप में धारण करने से अनेक प्रकार से रोग दूर हो जाते है तथा सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। tulsi mala पहनने से व्यक्ति के व्यक्तित्व में एक अलग तरह का जोश देखने को मिलता है।

Tulsi Ki Mala Ke Fayde -Astrology in hindi

Tulsi ki mala का हमारी संस्कृति मे एक अलग पवित्र स्थान है। तुलसी की माला तुलसी पौधे के तने से बनायी जाती है। माना जाता है की इसके अंदर देवी निवास करती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि आप तुलसी की माला को अपने गले मे धारण करते है तो इस से आपकी कुंडली में बुध और गुरु दोनों ग्रहों को बल मिलता है और उनका स्थान मजबूत होता है। इसलिए अगर जातक की कुंडली में बुध और गुरु गृह कमजोर हो तो उन्हें तुलसी की माला धारण करनी चाहिए। तुलसी माला के अनेक लाभ है परन्तु अगर tulsi ki mala का पूजन कर के उसे गले मे पहना जाये तो आपको जीवन मे सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते है। तुलसी माला में असीम ऊर्जा विद्यमान होती है। इसे पहनने से आपके शरीर में एक्वा पंक्चर होता है और गंभीर बीमारियों से मुक्ति मिलती है। tulsi mala से जाप करने से आप की आत्मा की शुद्धि होती है और इसके द्वारा आप प्रभु की शरण मे आते है।

How to wear tulsi mala (कैसे पहनें तुलसी की माला)

हमारे शास्त्रों मे लिखा है की कोई भी पवित्र चीज धारण करने से पहले उसका विधि-विधान से पूजन करना अवश्यक है जिससे उसका असर बढ़ जाता है। tulsi ki mala को पहनने से पहले उसे दूध और गंगाजल से धो कर पवित्र कर ले फिर किसी भी पास के श्रीकृष्ण मंदिर मे जाकर भगवान विष्णु या प्रभु श्रीकृष्ण की पूजा कर ले और इसके बाद हाथ जोड़ कर मन ही मन भगवान विष्णु का धयान करे और tulsi mala को अपने गले मे पवित्र मन से धारण कर ले।

Tulsi mala wearing rules

ध्यान रहे की tulsi mala को पहनने के भी नियम बनाये गए है और इन tulsi mala rules का अपना एक अलग ही स्थान से जिसे पूरा करना जरूरी होता है। तभी जातक को इस चमत्कारी tulsi ki mala का लाभ मिलता है।

1- वह जातक जो तुलसी की माला पहनते है उन्हें प्याज और लहसुन का त्याग करना चाहिए।

2- तुलसी की माला पहनने वाले जातकों को किसी भी रूप में मांसाहारी भोजन नहीं खाना चाहिए।

3- Tulsi ki mala और रुद्राक्ष की माला को भूल कर भी साथ में नहीं पहनना चाहिए, इसका असर विपरीत होता है।

4- मृत्यु के बाद भी तुलसी माला को देह से दूर नहीं करना चाहिए वरना आत्मा विष्णु लोक में नहीं जा पाती।

How to identify original tulsi mala

How to identify original tulsi mala:तुलसी का तना अंदर से सफ़ेद होता है और इसी वजह से असली तुलसी की माला एकदम सफ़ेद रंग की होती है। अगर आप इसकी पहचान करना चाहते है तो तुलसी की माला को पानी में 30 मिनट तक भिगोकर रख दें। अगर वह अपना रंग छोड़ने लगे तो समझ जाइये की माला नकली है।

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मार्किट मे सभी तरह की tulsi mala उपलब्धद्ध है परन्तु असली tulsi mala for neck मिलना मुश्किल है। यदि आप विधि-विधान से शुद्ध की हुई एकदम असली तुलसी की माला खरीदना चाहते है तो अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट से Tulsi Mala खरीद सकते है। यहाँ आपको एकदम 100% असली तुलसी की माला प्राप्त होंगी।

शनि दोष (Shani Dosh) के लक्षण क्या है? और कैसे करें शनि दोष के उपाय

शनि दोष ( Shani Dosh )

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि दोष को सभी प्रकार के दोषों में सबसे ज्यादा कष्टदायक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष का योग है या शनि कुंडली में गलत घर पर विराजमान हो तो जातक को शनि दोष के लक्षण स्वयं ही दिख जाते है। जीवन में नाकारात्मक ऊर्जा का विकास होता है। कार्यों में बाधा आती है और जातक का स्वास्थ्य आपका साथ नहीं देता है। क्योंकि शनि देवता धीमी प्रवर्ती के देव है, इसी वजह से इसका असर कुंडली पर लम्बे समय तक रहता है।

What is Shani Dosh?

शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है इस तरह शनि दोष व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है। शनिदेव व्यक्ति के बुरे कर्मों का दंड उन्हें प्रदान करते है। जब व्यक्ति की राशि में शनि दोष लगता है तो उसे अपने जीवन में कई तरहे के संघर्षों से जूझना पड़ता है। आजीविका चलाने के लिए कई उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। जब व्यक्ति को समय-समय पर रोग घेरे रहें, आर्थिक संकट आ जाये, बुरी चीजों में लिप्त होने का मन करे, ये सभी शनि दोष के लक्षण हैं।

शनि दोष के लक्षण (Shani Dosh Ke Lakshan)

1. समय से पहले आँखें कमजोर होना।
2. कम उम्र में बाल अत्यधिक झड़ना।  
3. सर में अधिक दर्द रहना।  
4. नास्तिक होना या भगवान का हर बात में मजाक बनाना
5. अपने से बड़े-बुजुर्गों का अपमान करना।  
6. चोरी करना, जुआ खेलना और सट्टे लगाना।  
7. मस्तिष्क में सदैव द्वन्द रहना।  
8. जरूरत से ज्यादा आलसी और चालाक होना। 

शनि दोष निवारण उपाय ( Shani Dosh Nivaran Upay )

शनि दोष से भयभीत न हो, करे उपाय :

शनि वह देवता है जिनके नाम से देवता भी भयभीत हो जाते है। शनि ग्रह की छवि हमारे ज्योतिष में एक न्यायप्रिय देवता की है जो नया में विश्वास रखते है। यह अच्छे कर्मों का अच्छा और बुरे कर्मो का बुरा परिणाम देते है परन्तु कभी कभी अनजाने मे की हुई गलतियों से भी शनि देव रुष्ट हो जाते है जिसकी वजह से जीवन में तरह तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार यह आपकी कुंडली में शनि दोष बन के आता है और जीवन कठिनाइयों से भर जाता है इसलिए जरुरी है की शनि दोष का निवारण जल्द से जल्द किया जाये। आज हम आपको इस लेख मे बताएँगे की शनि दोष क्या होता है और शनि दोष के लक्षण क्या है। साथ ही साथ हम शनि दोष के उपाय पर भी चर्चा करेंगे।

How to Check Shani Dosh in Kundali?

Shani Dosha की पहचान करना कोई कठिन कार्य नहीं है। बस इतना मालूम होना चाहिए की शनि का मेल अगर मेष राशि मे हो तो वो नीच माना जाता है और इसी को हम शनि दोष कहते है। कई बार देखने मे आया है की अगर शनि ग्रह शत्रु राशि का हो तो भी वो दोष की अवस्था मे आपकी कुंडली मे प्रवेश करता है। यदि शनि सूर्य ग्रह के साथ विराजमान हो और सूर्य अस्त ना हो रहा हो तो इसे भी Shani Dosh का एक रूप माना जाता है। धयान रहे की शनि दोष आपकी कुंडली मे तब भी लग सकता है जब वो चंद्र के साथ हो। ऐसा होने पर जातक को घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कुलमिलाकर यह सारी दशा शनि दोष का कारण बनती है।

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How to remove shani effect

Shani dosh nivaran कोई कठिन कार्य नहीं है बल्कि आप अपने रोजमर्रा के जीवन मे अंतर लाके ही शनि की क्रूर दृष्टि से मुक्ति पा सकते है या शनि दोष के असर को कम कर सकते है। बस आपको नीचे दिए गए कुछ शनि दोष से बचने के उपाय को करना होगा।

हर शनिवार को करें यह शनि दोष उपाय

1. स्नान करके मंदिर जाये और पश्चिम दिशा में सरसों के तेल का दिया जलाये।

2. शनि चालीसा का पाठ करे और हाथ जोड़कर उनकी कृपा पाने की लिए प्रार्थना करें।

3. याद रखे की शनिवार के दिन काली वस्तु का दान करें इस से शनिदेव प्रसन्न होते है।

4. ध्यान रखे की शनिवार के दिन लोहे की बनी चीजों का त्याग करें और उन्हें ना खरीदे।

5. अपनी की गयी जानी अंजानी गलतियों के लिए शनि देव से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगे।
कौए को भोजन करवाएं।

6. शनिवार को शनिवार के रत्न नीलम को धारण करें परंतु ध्यान रहे कि इस को धारण करने से पहले किसी ज्योतिषी से सलाह मशविरा अवश्य कर ले।

7. पीपल के वृक्ष की उपासना करे व उसकी परिक्रमा लगाएं इस से शनिदेव शांत होते है।

8. माना जाता है कि शनिवार के दिन लाल कपड़े पहनने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से भी शनि दोष के निवारण होते है।

Shani Dosha Nivaran

1. शनि दोष से बचने के लिए जातक अगर मंत्र का जाप पूरी श्रद्धा से करे तो शनि दोष का प्रकोप कुंडली में से बहुत हद तक कम किया जा सकता है इसके लिए शनि दोष मंत्र: का जाप करें।

2. ध्यान रखिये की पूजा करते समय आपको शनि मंत्र ‘ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जाप करें। यह मंत्र अपनी श्रद्धा के अनुसार 5,7, 11, 21 या 101 बार कर सकते हैं।

3. आप भगवान शंकर को प्रिय पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी कर सकते है।
महामृत्युंजय मंत्र- ‘ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनं उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

4. शनि दोष यदि कुंडली में बहुत नीच स्थान पर है तो इन शनि दोष मंत्र का प्रतिदिन जाप करें।

Shani Dosha Nivaran Mantra

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये शन्योरभिस्त्रवन्तु न:।
ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:
मंत्र- ॐ ऐं ह्लीं श्रीशनैश्चराय नम:।

कोणस्थ पिंगलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोन्तको यम:।
सौरि: शनैश्चरो मंद: पिप्पलादेन संस्तुत:।।

शनि दोष के उपाय (Shani Dosh Ke Upaay)

Shani Dosh को समाप्त करने का सबसे उत्तम उपाय है शनि यंत्र को घर में स्थापित करना या फिर शनि यन्त्र रूपी लॉकेट को धारण करना।  यदि आप किसी शनि दोष से पीड़ित है तो आपको Shani Yantra (शनि यन्त्र) का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। यह शनिदेव को प्रसन्न करने का सबसे सरल और उत्तम माध्यम है।   

शनि दोष के अन्य उपाय :

1. हर शनिवार शनिदेव के मंदिर में तेल का दीपक जलाना चाहिए।  
2. शनि महाराज को काली वस्तुएं जैसे काला वस्त्र, काला तिल अर्पित करें
3. भोग में उड़द की खिचड़ी और मीठी पूरी चढ़ानी चाहिए।  
4. हर मंगलवार हनुमान चालीसा का पाठ करें।  
5. शमी के पेड़ की पूजा करने से शनि दोष की समाप्ति होती है।  
6. यदि संभव हो तो घर में शमी का वृक्ष अवश्य लगाएं। 

पारद शिवलिंग (Parad Shivling) क्या है? और जाने पारद शिवलिंग की पहचान क्या है

Parad Shivling भगवान शिव का एक चमत्कारी शिवलिंग होता है। शास्त्रों के अनुसार इसे घर पर या अपने कार्यलय मे रखने से धन मे बृद्धि होती है, समाज मे पद-प्रतिष्ठा बढ़ती है और साथ ही जीवन खुशियों से भर जाता है।

पारद शिवलिंग क्या है? ( What is Parad Shivling? )

पारद एक तरह की धातु होती है जिसे रासायनिक विज्ञान मे (mercury) कहा जाता है। इस धातु की खासियत यह है की यह ठंडे से ठंडे तापमान में भी तरल अवस्था में ही रहता है। Parad Shivling इसी धातु से बना हुआ शक्तिशाली शिवलिंग है जिसे एक विशेष प्रकार की प्रक्रिया से तैयार कर के एक ठोस रूप दिया जाता है। इसमे पारा धातु के साथ साथ अनेक धातु और विशेष प्रकार की जड़ी बूतियों का मिश्रण मिलाया जाता है।

ब्रह्मपुराण, ब्रह्मवेवर्त पुराण, शिव पुराण, उपनिषद आदि अनेक ग्रंथों मे यह बताया गया है की Parad Shivaling के उपयोग से जातक के जीवन मे सभी तरह के रोग, कठिनाईया ख़तम हो जाती है और जीवन सुख एवं समृद्धि से भर जाता है।

पारद शिवलिंग पूजा कैसे करें? ( How to Worship Parad Shivling at Home? )

जिन लोगों के जीवन में आत्मविश्वास की कमी होती है या उनके जीवन मे धन की हानि लगी रहती है तो उन्हें पारद शिवलिंग की पूजा जरूर करनी चाहिए। ध्यान रहे की पारद शिवलिंग की पूजा पूरे विधि विधान से करनी चाहिए। सबसे पहले Para Shivling को सफ़ेद कपडे के आसान पर विराजमान करना चाहिए और खुद पूर्व-उत्तर दिशा की तरफ मुँह कर के आसान धारण करना चाहिए। पुजा करते वक़्त पारद शिवलिंग के दाहिनी ओर घी का दीपक जलाएंगे और तीन बार नीचे दिए गए Parad shivling pooja mantra का जाप करें। धयान रहे की मंत्र जाप करने के बाद हाथ मे थोड़े से चावल और कुछ फूल ले ले और पांच बार ॐ नमः शिवाए का उच्चारण करें। बाद में यह चावल और फूल को शिवलिंग के ऊपर अर्पण कर दें।

प्रथम बार- ॐ मुत्युभजाय नम:
दूसरी बार- ॐ नीलकण्ठाय: नम:
तीसरी बार- ॐ रुद्राय नमः:
चौथी बार- ॐ शिवाय नम:

How to Identify Original Parad Shivling?

How to Identify Original Parad Shivling:असली पारद शिवलिंग की पहचान करना बहुत ही सरल है। इसे यदि हथेली पे घिसा जाये तो यह काली कालिख हाथ पे नहीं छोड़ता है। देखा गया है की अगर पारद शिवलिंग असली है तो यह पानी से भीगने के बाद धूप में रख देने से शुद्ध सोने की तरह चमकने लगता।

पारद शिवलिंग साफ कैसे करें? ( How to clean Parad Shivling? )

कई बार जातकों के मन में यह सवाल बहुत बार आया है की पारद शिवलिंग साफ कैसे करें? यूँ तो पारद शिवलिंग पारे का बना हुआ होता है तो ध्यान रखना चाहिए कि इसे सिर्फ गीले साफ सूती कपड़े से ही साफ करना चाहिए इस से शिवलिंग एकदम चमकने लगेग। नहीं तो आप थोड़ी सी मिट्टी मे चन्दन और हल्का सा जल मिला के भी सफाई कर सकते है। कोशिश करें की पारद शिवलिंग के आस पास साफ सफाई रखें।

Parad shivling price

Parad शिवलिंग कई प्रकार की कीमत में मिलता है। यह आपको किसी भी ऑनलाइन या ऑफलाइन शॉप पर आसानी से मिल जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर Parad shivling price चेक कर सकते है जहाँ आपको एकदम शुद्ध एवं असली सिद्ध पारद शिवलिंग मिलेगा।

पारद शिवलिंग पे जल चढ़ाना चाहिए या नहीं?

पारद शिवलिंग पे जल चढ़ाने मे कोई दिक्कत नहीं है बस जल ज्यादा गरम या ठंडा नहीं होना चाहिए। जल एकदम साफ होना चाहिए। आप मिनरल्स वाटर को भी इस्तेमाल कर सकते है।

पारद शिवलिंग घर मे रखना चाहिए या नहीं?

पारद शिवलिंग को घर मे रखा जा सकता है लेकिन इसकी उपस्थिति एकांत में होनी चाहिए जहां घर के परिवार जानो का आना जाना काम लगा हो।

असली पारद शिवलिंग कहा मिलेगा?

पारद शिवलिंग वैसे तो आपको किसी भी भक्ति स्टोर पे मिल जायेगा परन्तु असली पारद शिवलिंग के मिलना थोड़ा जटिल कार्य है। इसके लिए आप हमारी वेबसाइट से Parad Shivling को खरीद सकते है जहाँ असली पारद शिवलिंग की सारी जानकारी उपलब्ध है।

काल सर्प दोष (Kaal Sarp Dosh) क्या है? और जाने काल सर्प दोष का उपाय

Kaal Sarp Dosh:

मनुष्य के जन्म लेते ही उसके गृह भी एक नया जन्म लेते और उन ग्रहों की स्थिति मनुष्य के जीवन मे नये नये परिणाम लाती है। कुछ गृह फालदायक होते है और कुछ ग्रहो के योग से कई बार भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है उसी मे से एक दोष जो एक बार कुंडली मे आ जाये तो व्यक्ति को काफ़ी तकलीफो का सामना करना पड़ सकता है। इस दोष को आधुनिक ज्योतिष में कालसर्प दोष कहा जाता है। kalasarp dosha के नुकसान बहुत ही ज्यादा है जिसका निवारण kaal sarp dosh के मंत्र का जाप करने से और पूजन करने से ही दूर होता है।

काल सर्प दोष क्या है? ( What is Kaal Sarp Dosh ? )

Kaal Sarp Dosh (कालसर्प दोष) का मतलब कुंडली में एक ऐसे योग का होना जो की मनुष्य को उसके पूर्व जन्म में किये गए गलत कामों और दूसरों के दुख की वजह बनने से उसके वर्तमान जीवन मे कष्ट का कारण बनता है। यदि एक बार sarpa dosha कुंडली मे बैठ जाता है तो व्यक्ति को तरह तरह की परेशानियो का सामना करना पड़ता है। आर्थिक हो या शारीरिक, मनुष्य किसी भी परिस्थिति में खुश नहीं रह पाता है। कई बार यह देखने मे आया है की बड़े बड़े घर मे पैदा हुए जातक इस दोष की वजह से रोटी को भी मोहताज हो जाते है। जीवन भर उन्हें एक डर का एहसास रहता है और बनते हुए काम आखिर मे बिगड़ जाते है।

कुंडली में काल सर्प दोष ( Kaal Sarp Dosh in Kundali )

ज्योतिषी शास्त्रों के अनुसार कालसर्प योग पर काफ़ी ध्यान दिया गया है। विद्वानों ने kaal sarp yog पर तरह तरह के तर्क वितर्क दिए है परन्तु इस दोष की सबसे सही परिभाषा आधुनिक ज्योतिष में मिलती है, जिसमें बताया गया है की कुंडली में सूर्य, चन्द्रमा, गुरु के साथ राहु की दशा साथ में होना kala sarpa dosha का कारण माना गया है। राहु केतु का कुंडली में आना ही पतन का कारण बनता है और कालसर्प दोष के नुकसान बहुत है। माना गया है कि राहु के अधिदेवता ‘काल’ है और केतु के अधिदेवता ‘सर्प’ जिसकी वजह से इस दोष को कालसर्प दोष कहा गया है। इस परिस्थिति में राहु केतु हमेशा वक्री रहते है एवं सूर्य की स्थिति चन्द्र मार्गी हो जाती है। ध्यान रहे कि अगर व्यक्ति की कुंडली में 9 से 7 ग्रह राहु केतु के घर मे आते है तो इसे kaal sarp yog कहते है।

काल सर्प दोष प्रभाव ( Kaal sarp dosh effects )

यदि नीचे दिए गए कथनों में से कोई भी एक कथन आपके जीवन में संकट पैदा कर रहा है तो ध्यान रखिये कि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष लक्षण है।

1. यदि किसी की कुंडली में kaal sarp योग हो तो व्यक्ति को अक्सर डरावने स्वप्न आते है।
2. बिना वजह मन में एक डर बना रहता है।
3. रात के वक़्त बिना वजह बार बार नींद खुल का खुलना।
4. अनिद्रा की शिकायत बने रहना।
5. सपनो में सांप का दिखना।
6. बनते हुए कामों का आखिर मे बिगड़ जाना।
7. मानसिक अशांति रहना।
8. घर मे आये दिन कलेश होना।
9. शत्रुओं की संख्या में वृद्धि होना।
10. अचानक से किसी गंभीर बीमारी का आगमन होना।
11. बार बार काम मे धोखे का सामना करना।
12. शादी होने में बाधा आना।

काल सर्प दोष का उपाय ( kaal sarp dosh ke upay in hindi )

काल सर्प दोष से बचने के लिए निम्नलिखित मंत्रों का नियमित जाप करें जिसके फलस्वरूप आपकी कुंडली में बैठे कालसर्प दोष के लक्षण कम होने लगेंगे और जीवन मे बधाएँ काम आएंगी। कालसर्प दोष मंत्र नीचे दिए गए है।

राहू मंत्र : ।। ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: ।।
केतु मंत्र : ।। ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं स: केतवे नम:।।


कालसर्प दोष से बचने के लिए जातक गायत्री मंत्र का पाठ भी कर सकते है।

सर्प मंत्र : ।। ॐ नागदेवताय नम: ।।
नाग गायत्री मंत्र : ।। ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात् ।।

काल सर्प दोष कैसे दूर करें? ( How to remove kaal sarp dosh in Hindi )

1. ज्ञात रहे की हमेशा अच्छे काम करें। किसी का दिल ना दुखाये तो अच्छा आचरण रखे।

2. अपने आसपास साफ सफाई रखें, साफ कपड़े पहने और बिस्तर को एकदम साफ सुथरा रखें।

3. फिटकरी और समुद्री नमक को पानी मे मिलाकर पोछा लगाएं।

4. लोगो को माफ करना सीखे, बड़ो का आदर करें, उनका आशीर्वाद ले। किसी की बेइज्जती ना करें।

5. पाशुपतास्त्र का प्रयोग करें जिसकी वजह से राहु केतु का असर ख़तम होता है। यह उपाय कालसर्प दोष के लिए रामबाण की तरह।

6 .रोज सुबह उठकर एवं स्नान करके श्रीमद भागवत और श्री हरिवंश पुराण का पाठ करें।

7. भगवान शंकर की रोज उपासना करें और सोमवार के दिन शिवलिंग पे दूध चढ़ाएं और काले कपड़े गरीबो को दान मे दे।

8. याद रहे अगर दिक्कत ज्यादा है या kaalsarp dosh का प्रकोप आपको कुंडली में प्रचंड रूप से है तो kaal sarp dosha puja उज्जैन या नासिक में पूरे विधि विधान से करें।

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नर्मदेश्वर शिवलिंग (Narmadeshwar Shivling) क्या है? और क्या है इसके पूजा करने के फायदे

हिन्दू धर्म में शिवलिंग ( Shivling in Hinduism )

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार घरों में शिवलिंग की स्थापना अतिमहत्वपूर्ण मानी जाती है.शिवलिंग होने से घर में सुख एवम् शांति बनी रहती है. वैसे तो आपने कई प्रकार के शिवलिंग के बारे में सुना होगा लेकिन हम आपको यहाँ शिवलिंगों में सबसे विशेष नर्मदेश्वर शिवलिंग के बारे में,इसके फायदे और पहचान करने के तरीके बताएँगे और ये भी बताएँगे कि आखिर क्यों आपको अपने घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग की प्रतिष्ठा रखनी ही चाहिए. इस शिवलिंग का नाम सुनते ही सबसे पहला सवाल आपके मन में आता है कि क्या है नर्मदेश्वर शिवलिंग?

नर्मदेश्वर शिवलिंग क्या है? ( What is Narmadeshwar Shivling? )

Narmadeshwar Shivling शिवलिंगों में सबसे प्रख्यात शिवलिंग है.इस शिवलिंग को बाणलिंग (banalinga) भी कहते हैं. चूँकि यह पवित्र नर्मदा नदी के किनारे पाया जाने वाला एक विशेष गुणों वाला शिवलिंग है इसलिए इसका नाम नर्मदेश्वर शिवलिंग (Narmada Shivling) है और बाणलिंग से ज्यादा नर्मदेश्वर शिवलिंग नाम ज्यादा प्रचलित है.

नर्मदेश्वर शिवलिंग कहाँ पाए जाते हैं? ( Where is Narmadeshwar Shivling found? )

यह शिवलिंग प्राकृतिक रूप से नर्मदा नदी के किनारे पाए जाते हैं. हिन्दू धर्म के विभिन्न शास्त्रों तथा धर्मग्रंथों के अनुसार मां नर्मदा को यह वरदान प्राप्त था कि नर्मदा का हर बड़ा या छोटा पत्थर बिना प्राण प्रतिष्ठा किये ही शिवलिंग के रूप में पूरी दुनिया में पूजा जायेगा.इसलिए नर्मदा के हर पत्थर को नर्मदेश्वर शिवलिंग माना जाता है.

असली नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान कैसे करें? ( How to identify the original Narmadeshwar Shivling? )

नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान करने के लिए आपको देखना चाहिए कि यह संगमरमर की तरह चमकदार, साफ, छेद रहित व ठोस हों.प्राकृतिक रूप से बने यह शिवलिंग आपको भारी प्रतीत होते हैं. यह अक्सर छोटे रूपों में पाए जाते हैं.

नर्मदेश्वर शिवलिंग के लाभ ( Benefits of Narmadeshwar Shivling )

आइये जानते हैं Narmadeshwar Shivling Benefits in hindi :

ज्योतिष के अनुसार हर धार्मिक चीज़ के अनेकानेक फायदे हैं और यह नर्मदेश्वर शिवलिंग उन सब में सबसे ऊपर आते हैं. प्राकृतिक और असली नर्मदेश्वर शिवलिंग को भाग्य सँवारने वाला माना जाता है.

हम सब के जीवन में ऐसा वक़्त आता है जब हम पूरे मन से अपना कर्म करते हैं फिर भी सफलता हमारे हाथ  नहीं लगती. हम सब सोचते हैं की काश भगवान ने थोडा सा साथ दिया होता तो हम सफल होते.नर्मदेश्वर शिवलिंग को घर लाने से आपके कर्मों के हिसाब से किस्मत भी आप पर मेहरबान हो जाती है.

अटके कामों में सफलता की राह दिखती है.पुराणों और कथाओं में भगवान् शिव को विघ्नहर्ता कहा गया है और इसलिए नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा से सुख-समृद्धि के साथ-साथ बड़ी से बड़ी मुसीबत से भी सुरक्षा मिलती है.

कई देवताओं की पूजा से जो फल प्राप्त  होता है उससे सौ गुना अधिक मिट्टी के लिंग के पूजन से होता है और  हजारों मिट्टी के लिंगों के पूजन का जो फल होता है उससे सौ गुना अधिक फल नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा से मिलता है. घर- गृहस्थी वाले लोगों के लिए तो नर्मदेश्वर शिवलिंग अत्यंत फायदेमंद है.

प्रतिदिन इसकी पूजा करने से घर में शांति आती है और परिवारजनों के ऊपर आने वाले रोगों और संकट टल जाते हैं.इनकी पूजा आपको तथा आपके परिवार को ज्ञान, धन, सिद्धि और ऐश्वर्य देगी. वैदिक काल से कहा और माना जहां नर्मदेश्वर का वास होता है, वहां काल और यम असमय प्रवेश नहीं करते हैं.

कैसे करें नर्मदेश्वर शिवलिंग की अपने घर में स्थापना और पूजन?

वैसे तो नर्मदेश्वर शिवलिंग को भगवान शंकर के आशीर्वाद से स्वयंभू माना गया है अर्थात ये पहले से सिद्ध होते हैं और इनकी स्थापना बिना किसी प्राण प्रतिष्ठा के भी की जा सकती है किन्तु ज्योतिष में हर पूजा या स्थापना और पूजा के वैध एवम् कारगर तरीके बताये गए हैं. ऐसे ही नर्मदेश्वर शिवलिंग को भी घर में स्थापित करने के लिए और उसकी पूजन विधि में आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.

1. हमेशा ध्यान रखें कि घर तथा मंदिरों में स्थापित किये जाने वाले नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना विधि अलग अलग होती है.

2. शिवलिंग कहीं भी स्थापित किये जा रहे हों इनकी वेदी का मुख सदैव उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए.

3. मंदिरों में कितना भी बड़ा नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है किन्तु घरों में स्थापित शिवलिंग की ऊंचाई अधिकतम 6 इंच की ही होनी चाहिए.

4. सवेरे स्नान करके शिवलिंग को एक थाल में रखें.

5. बेलपत्र और जल की धारा ऊपर से चढ़ाएं.

6. हाँथ जोड़कर शिव जी के मंत्रों का जाप करें.महामृत्यंजय मंत्र का जाप करें. 

7. नर्मदेश्वर शिवलिंग को घर में स्थापित करने और पूजा अर्चना से आपके घर में शांति रहेगी एवम् कष्टों से निजात मिलेगी.

आज ही मंगवाइये अपने घर, सर्वोत्तम नर्मदेश्वर

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