Nazar Dosh : जानिये नज़र दोष के लक्षण और उससे मुक्ति पाने के उपाय

नज़र दोष क्या होता है? ( Nazar Dosh kya hota hai? )


Nazar Dosh :
कई बार व्यक्ति लाख कोशिश करे तब भी वह अपने लक्ष्य को पा सकने में असफल होता है। वह सोचता है कि इतनी मेहनत के बावजूद कुछ हासिल नहीं हो रहा इससे बेहतर है वह हार मान जाए। परन्तु जीवन में आने वाले ये संकट हमारे भाग्य में नहीं लिखे होते बल्कि कुछ लोगों की ईर्ष्या के चलते हमारे सफर का हिस्सा बन जाते हैं।

ये प्रतिकूल परिस्थितियां हमारे ग्रह दोषों और नज़र लगने के कारण उत्पन्न होती हैं। बुरी नज़र के कारण व्यक्ति के आस-पास की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और सभी शुभ कार्यों में अड़चनें आनी शुरू हो जाती हैं। आज हम आपको उन्हीं नज़र दोषों से जुड़ी जानकारी देने वाले हैं कि नज़र दोष के लक्षण क्या होते हैं?, नज़र लगी हो तो क्या करना चाहिए? साथ ही ऐसे कौन से टोटके हैं जिनसे व्यक्ति शीघ्र ही नजर दोष से मुक्ति पा सकता है।

कैसे पता करे की नजर लगी है? ( Kaise pata kare ki nazar lagi hai? ) 


आइये जानते हैं नजर दोष के लक्षण ( nazar dosh ke lakshan ) :

1. घर को बुरी नजर लग जाए तो हर दिन घर में किसी न किसी प्रकार का कलेश होता है, माहौल अशांति भरा बना रहता है।

2. दुकान में नजर लग जाए तो ग्राहकों पर असर पड़ता है, नकारात्मक ऊर्जाएं दुकान में बिक्री नहीं देती हैं।

3. व्यापार या धंधे में नजर दोष लगा हो तो लाभ नहीं मिलता, आक्समिक हानि का सामना करना पड़ता है। यदि प्रभाव ज्यादा हो तो धंधा चौपट होने की नौबत तक आ सकती है।

4. व्यक्ति पर बुरी नज़र का असर उसके मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। कोई भी कार्य सफल नहीं होने देता।

5. किसी शिशु नजर लगने की स्थिति में वह अचानक से बीमार पड़ जाता है। उसका व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाता है।

नजर दोष से बचने के उपाय ( nazar dosh se bachne ke upay )


आइये जानते हैं buri nazar ke upay in hindi :

1. बुरी नजर यदि व्यक्ति को लगी है तो इसके लिए Panchmukhi Hanuman Kavach धारण करना चाहिए। हनुमान जी हर बुरी नजर से व्यक्ति की रक्षा करेंगे और जल्द ही सकरात्मक ऊर्जा का प्रवाह नजर दोष से पीड़ित व्यक्ति के आभामंडल में बढ़ने लगेगा।

2. व्यापार में भारी नुकसान और धंधा चौपट होने की स्थिति से गुजर रहे जातकों के लिए नजर दोष निवारण यंत्र Money Vastu fengshui Stone बहुत लाभकारी है इसे व्यापार या दुकान वाले मुख्य स्थान पर लगाने से जातक को शीघ्र ही अपनी समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।

3. यदि आपको ऐसा लगता है कि आपके घर या दुकान को किसी की बुरी नज़र लगी है तो अपने घर/ dukan ki nazar utarna के लिए मुख्य द्वार पर नींबू-मिर्ची के साथ नजर दोष निवारण यंत्र Ghode Ki Naal Evil Eye को लगाएं। कुछ समय बाद आपको अपने घर का माहौल शान्तिमय दिखने लगेगा।

4. घर की सुख-समृद्धि और धन-अन्न की कमी को दूर करने के लिए नजर दोष निवारण यंत्र Nazar Suraksha Kavach (नज़र सुरक्षा कवच) को घर के मुख्य द्वार पर लगाएं।

5. नजर उतारने के प्राचीन उपाय में एक उपाय है दो सूखी लाल मिर्च, थोड़ा नमक, सरसों के कुछ दाने बच्चे के सिर के ऊपर से नीचे की ओर 3 बार घुमाएं और फिर उसे जला दें। जलने की इस प्रक्रिया से उसके राख बनने तक शिशु की नजर तुरंत उतर जाएगी।

6. Dukan ko buri nazar se bachne ke upay के लिए दुकान में सुबह-शाम कपूर और लोबान जलाएं। अभिमंत्रित रक्षासूत्र को बांधकर रोजाना कपूर जलाने के बाद गंगाजल भी छिड़कें।

नजर बट्टू कब लगाना चाहिए? ( Nazar Battu kab lagana chahiye? )


जब आपको ऐसा लगे कि आपके घर को किसी बुरी शक्तियों ने घेर लिया है। नकारात्मक ऊर्जा हर कार्य में अड़चन डाल रही है तो घर में लाल धागे में बांधकर नज़र बट्टू लगाएं। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहेगा।

जानिये चार मुखी रुद्राक्ष की पहचान का तरीका और अद्भुत फायदे

4 मुखी रुद्राक्ष का महत्व ( Significance of Four Mukhi Rudraksha ) 

चार मुखी रुद्राक्ष संसार के जड़-चेतन के स्वामी ब्रह्मा जी का प्रतिनिधित्व करता है। इस रुद्राक्ष के अधिपति देवता ब्रह्मा जी और अधिपति देवी सरस्वती मानी जाती है जबकि इस रुद्राक्ष के अधिपति ग्रह बुध देव हैं। इसका अर्थ है कि यह char mukhi rudraksha ब्रह्मा के समान रचनात्मक, सरस्वती के समान ज्ञानी और कलात्मक गुणों से भरपूर है। बुध देव इसके अधिपति ग्रह होने के कारण यह रुद्राक्ष कुंडली में कमजोर बुध की स्थिति और उसके दोषों को दूर करने का कार्य भी करता है। इसका महत्व छात्रों के लिए बहुत अधिक है।
दूसरे शब्दों में कहें तो चार मुखी रुद्राक्ष पढ़ने-लिखने वाले छात्र वर्ग, शिक्षक, कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए सबसे उत्तम है। यह तो सभी को मालूम है कि rudraksh का उद्भव भगवान शिव के अश्रुओं से हुआ है इसलिए यह भोलेनाथ को अत्यधिक प्रिय है। परन्तु रुद्राक्ष के हर मुख में किसी न किसी देवी-देवता और ग्रह का वास है। जिस कारण हर रुद्राक्ष की विशेषताएं बदल जाती हैं। आज हम आपको चार मुखी रुद्राक्ष के बारे में बताने जा रहे हैं।

4 मुखी रुद्राक्ष के फायदे ( 4 mukhi rudraksha benefits in hindi ) 

आइये जानते हैं चार मुखी रुद्राक्ष के लाभ :

1. इसे धारण करने से संचार कौशल के विकास और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होती है।

2. 4 mukhi rudraksha ke fayde में एक फायदा यह भी है कि इससे व्यक्ति में तार्किक और बौद्धिक क्षमता बढ़ने लगती है।

3. यह rudraksh पढ़ाई में स्कूली छात्रों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

4. char mukhi rudraksha पत्रकारों, शिक्षकों, लेखकों और शोधकर्ताओं के कौशल में वृद्धि करता है।   

5. बुध ग्रह से संबंधित दोषों वाले जातकों को यह रुद्राक्ष अवश्य ग्रहण करना चाहिए।

चार मुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें? ( How to wear four mukhi rudraksha? )

1. Rudraksh ki mala को धारण करने के लिए सबसे शुभ दिन सोमवार माना जाता है।

2. इस दिन भगवान शिव की पूजा कर, शिवलिंग पर जल अर्पित करें।

3. इसके बाद भोलेनाथ का नाम लेकर आसन पर बैठ जाए और चार मुखी रुद्राक्ष के धारणीय मंत्र का 108 बार जाप करें।

                              4 मुखी रुद्राक्ष का मंत्र : धारण मंत्र-‘ॐ ह्रीं नम:’
 
4. अब चार मुखी रुद्राक्ष को मन्त्रों का उच्चारण करते हुए रुद्राक्ष माला धारण करें।  

5. ध्यान रहे कि रुद्राक्ष धारण करने के बाद भगवान शिव की नियमित रूप से पूजा अवश्य की जानी चाहिए।

4 मुखी रुद्राक्ष की पहचान ( Identification of Four mukhi rudraksha )


1. चार मुखी रुद्राक्ष को पहचानने का सबसे पहला तरीका है उसमें निर्मित धारियों को पर गौर करना। इस रुद्राक्ष की पहचान ही चार धारियां है।  

2. 4 मुखी रुद्राक्ष में विद्युत चुंबकीय तत्वों का समावेश होता है इसलिए जब इसे दो सिक्कों के बीच रखा जाता है तो इसमें एक गति देखने को मिलती है। उस गति के चलते यह खुद-ब-खुद किसी भी दिशा में मुड़ने लगता है। आप इस परिक्षण को घर में उपयोग में लाए जाने वाले सिक्कों से करके देख सकते हैं।

3. रुद्राक्ष को जब जल के अंदर डाला जाए तो वह ऊपर नहीं तैरता बल्कि जल में भीतर जाकर बैठ जाता है। हालाँकि यह परिक्षण इतना कारगर नहीं है क्योंकि आज कल बाजारों में ऐसी बहुत सी लकड़ियां है जो पानी में डूब जाती हैं।

4 मुखी रुद्राक्ष कौन पहन सकता है? ( Who can wear Four Mukhi Rudraksha? )

4 मुखी रुद्राक्ष को छात्र वर्ग, शिक्षक, कला के क्षेत्र से संबंध रखने वाले लोग, पत्रकार, शोधकर्ता आदि पहन सकते हैं।

4 मुखी रुद्राक्ष कब पहनना चाहिए? ( When to wear Four Mukhi Rudraksha? )

4 मुखी रुद्राक्ष को पहनने के सबसे शुभ दिन सोमवार का माना जाता है क्योंकि रुद्राक्ष में भगवान शिव का वास माना जाता है।

किस राशि वालों को चार मुखी रुद्राक्ष पहनना चाहिए?

यदि वृष राशि, मिथुन राशि, कन्या राशि और तुला राशि के लोग चार मुखी रुद्राक्ष को धारण करते हैं तो यह उनको अत्यधिक लाभ पहुंचाएगा। चार मुखी रुद्राक्ष इन चार राशियों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।  

आइये जानें सपने में गड़ा हुआ धन देखने या मिलने का क्या अर्थ है?

सपने में गड़ा हुआ धन देखना ( Sapne me gada hua dhan dekhna )


हमारे हिन्दू शास्त्रों में लगभग हर कृत्य के पीछे एक ठोस कारण छिपा हुआ है, यानी इस संसार में जो भी घटित हो रहा या घटित होने की संभावना है उसके होने का कोई न कोई कारण तो है। भगवान कृष्ण ने भी कहा है कि मनुष्य द्वारा किये जा रहे कर्म उनके पूर्व जन्म में किये गए कर्मों का ही फल हैं।

आज हम कर्म या भविष्य का लेखा जोखा रखने वाले सपनों की बात करेंगे, वो सपनें जो हमारे लिए भले ही इतने महत्वपूर्ण न हो पर उनका कोई न कोई अर्थ तो जरूर है। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि हिन्दू धर्म के स्वप्न शास्त्र स्वयं ही इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। आज के इस लेख में हम सपने में खजाने या गड़े हुए खजाने को देखने के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं की बात करने जा रहे हैं।

सपने में गड़ा हुआ खजाना देखना ( Sapne me gada hua khajana dekhna )


हमारे वैदिक ग्रंथों में रावण सहिंता और वराह संहिता स्वप्न फल को जानने के लिए सबसे उत्तम माने जाते हैं। लोगों को सपने बड़े ही विचित्र से आते हैं कई बार तो उन सपनों का कोई अर्थ ही नहीं निकलता है पर सपनों में हमारा जोर तो चलता नहीं है। कुछ लोग सपनें में कहीं पर गड़ा हुआ खजाना देख लेते हैं फिर उन्हें लगता है कि यह सच हो सकता है। फिर वे जी जान से उस गड़े हुए खजाने को ढूंढने में जुट जाते हैं।

शायद लोगों को यह नहीं मालूम कि सपने में गड़े हुए खजाने को देखने का अर्थ यह नहीं है। जब भी कोई व्यक्ति सपने में गड़ा धन मिलना देखता है तो यह रावण सहिंता और वराह सहिंता के अनुसार यह नहीं कहता कि उस व्यक्ति को कहीं पर गड़ा हुआ खजाना मिल ही जाएगा। दरअसल इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि उस व्यक्ति को अचानक धन मिलने या सम्मान-प्रतिष्ठा हासिल होने की संभावना है। गड़ा धन मिलने के संकेत है कि आपको अज्ञात स्त्रोतों से धन की प्राप्ति हो सकती है और समाज में प्रतिष्ठा मिल सकती है।

अब आपको बताते हैं कि आखिर कब आपको गड़ा हुआ धन प्राप्त होने की संभावना अत्यधिक होती है और गुप्त धन मिलने के संकेत क्या होते हैं? :


रावण सहिंता और वराह सहिंता के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को गड़े हुए खजाने के मिलने की संभावनाएं होती हैं तो उसे सपनें में सफेद नाग दिखाई देता है। वह सफेद नाग जिस स्थान पर दिखाई देता हैं वहीँ पर गड़ा हुआ खजाना मिलने की संभावना होती है।

आपको बता दें कि सपने में दिखने वाला सफेद नाग कोई सामान्य नाग नहीं बल्कि नाग के रूप में पितर होते हैं जो अपने वंशजों को गड़े हुए खजाने ( Gada hua khajana ) पाने के लिए संकेत दिया करते हैं। पितर अपने ही द्वारा छिपाए गए खजाने के रक्षक होते हैं जो अपने परिवार जनों को बार बार सफेद नाग के रूप में सपने में आकर संकेत दिया करते हैं और गुप्त धन के बारे में जानकारी देते हैं।

ऐसे करें असली Chandan की पहचान, जानें इसके फायदे और टोटके

हिंदू धर्म में चंदन का क्या महत्व है? ( Importance of Sandalwood in hindu religion )

हिंदू धर्म में चंदन ( Sandalwood ) का महत्व इस बात से जाना जा सकता है कि इसका प्रयोग वैष्णव और शैव परंपरा दोनों में किया जाता है। तिलक के रूप में चंदन ललाट की शोभा बढ़ाता है तो पूजा में देवी देवताओं को चंदन अर्पित किए जाने से उन्हें प्रसन्न करने का मार्ग खुल जाता है। चंदन का पौधा जैसे जैसे बढ़ता रहता है वैसे वैसे ही Chandan ka ped के तने में तेल का अंश भी बढ़ता रहता है जो सुगंधित होने के साथ ही बह फायदेमंद है। चंदन का तेल हर्बल औषधियों के लिए प्रयोग में लाया जाता है जबकि कई अध्ययन इस बात का दावा करते हैं कि यह हमारे अवसाद और चिंताओं को दूर करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है।

चन्दन की ही तरह Chandan Mala भी सुख-शांति और समृद्धि का प्रतीक मानी गई है। लाल चन्दन की माला माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, Original Chandan Mala से यदि माँ लक्ष्मी के मन्त्रों का जाप किये जाए तो जातक को शीघ्र शुभ फल की प्राप्ति होती है और उनकी मनोकामना भी पूर्ण होती है।

चंदन लगाने से क्या फायदे हैं? ( Sandalwood Benefits )

Uses of Sandalwood in hindi :

1. चंदन की सुंगध हमारे भीतर पनप रहे अवसाद और तनाव वाले हार्मोंस को नियंत्रित करने का कार्य करती है।

2. चंदन हमारी कई तरह की मानसिक बीमारियों से रक्षा करता है और उदासी जैसी अवस्था से भी बचाता है।

3. भगवान को चंदन अर्पित करने का हमारा भाव यह रहता है कि जिस प्रकार चंदन सुगंधित है उसी प्रकार हमारा जीवन भी हमेशा सुगंधित रहे।

4. इसे ललाट पर लगाए रखने से पवित्रता और शांति का एहसास होता रहता है। साथ ही आज्ञा चक्र सक्रिय होकर शुभ फल देने लगता है।

5. Sandalwood uses में चंदन को बालों के कंडीशनर के रूप में भी प्रयोग में लाया जा सकता है, इससे बाल मजबूत होते हैं।

चन्दन के टोटके ( Chandan ke totke )

1. चन्दन को पीसकर उसके पाउडर, अश्वगंधा और गोखरूचूर्ण में कपूर का मिश्रण कर लगातार 40 दिन तक हवन करने से घर का वास्तु दोष दूर होता है।

2. यदि आपको ऐसा लगता है कि आप हर समय परेशानियों से घिरे रहते हैं तो गुरुपुष्य नक्षत्र से एक दिन पहले चन्दन के पेड़ की जड़ पर पीले चावल और जल चढ़ाएं फिर धूप दिखाकर उसे आमंत्रित कर दें। उसके अगले दिन उसी पेड़ की लकड़ी लें और एक लाल कपड़े में उसे बांधकर अपने घर के मुख्यद्वार पर टांग दें। इससे आपकी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी और आने वाले सभी संकट टल जाएंगे।  

3. यदि चन्दन के वृक्ष को घर की पश्चिम या दक्षिण दिशा में लगाया जाए तो यह अत्यधिक शुभ फल प्रदान करता है।

4. किसी व्यक्ति या बच्चे को नज़र लगी हो तो उसे चन्दन की छाल का धुआं देना चाहिए इससे नज़र तुरंत उतर जाती है।    

5. Safed Chandan का वृक्ष घर की सीमा में लगाने से वास्तु दोष और समस्त प्रकार के रोगों से परिवार के सदस्यों को छुटकारा मिलता है।  

असली चंदन की पहचान क्या है? ( How to Identify real Chandan? )

असली चन्दन की पहचान करनी हो तो उसे जमीन या ठोस सतह पर घिसे और तब तक घिसे जब तक वह गर्म न हो जाए। जैसे ही चन्दन गर्म होगा उसमें से सुगंध आनी शुरू हो जाएगी। सुगन्धित चन्दन ही असली चन्दन की पहचान मानी जाती है। 

चन्दन की क्या विशेषता है? ( What is the specialty of Sandalwood? )

चन्दन की विशेषता के बारे में सबसे उत्तम जानकारी हमें संस्कृत का यह श्लोक देता है : ”चंदन विष व्यापत नहीं लिपटे रहत भुजंग” अर्थात चन्दन के वृक्ष में शीतलता के कारण विषधारी सांप लिपटे रहते हैं इसके बावजूद चंदन के वृक्ष पर साँपों के विष का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। यह चन्दन की सबसे बड़ी विशेषता है। चन्दन हमारे मन-मस्तिष्क को शान्ति और स्थिरता प्रदान करता है। इसके प्रयोग से आज्ञा चक्र शुभ फल देने लगता है, यह सौभाग्य में वृद्धि का भी सूचक है।

चन्दन कितने प्रकार के होते है? ( Types of Chandan in hindi )

Chandan दो प्रकार का होता है : सफेद चन्दन और लाल चंदन। इन दोनों के ही अपने अद्भुत फायदे हैं।

लाल चंदन लगाने से क्या होता है? ( Laal Chandan lagane se kya hota hai? )

लाल चन्दन में कई तरह के पॉलीफेनोलिक यौगिक, ग्लाइकोसाइड, जरूरी तेल, फ्लेवोनोइड, टैनिन और फेनोलिक एसिड जैसे गुण पाए जाते है जो इसे अलग पहचान देते हैं। लाल चन्दन को चेहरे पर लगाने से त्वचा से संबंधित रोगों एक्ने, चकत्ते और झाइयों से शीघ्र ही मुक्ति मिलती है।  

लाल चंदन को कैसे पहचाने? ( Laal Chandan ko kaise pehchane? )

लाल Chandan ki lakdi पानी में बाकी लकड़ियों के मुकाबले जल्दी डूबती है। इसके पीछे की प्रमुख वजह यह है कि लाल चन्दन की लकड़ी का घनत्व पानी से ज्यादा होता है। इसलिए लाल चन्दन की लकड़ी की पहचान करनी हो तो उसके लिए सामान्य लकड़ी और लाल Chandan ki lakadi लें। दोनों को साथ में पानी में डुबोये यदि लाल चन्दन की लकड़ी जल्दी पानी में डूब जाए तो वह असली लाल चन्दन है। लाल चन्दन श्वेत चन्दन की तरह सुगन्धित नहीं होता है।  

हिन्दू माथे पर चन्दन क्यों लगाते हैं? ( Why do Hindus put chandan on forehead? ) 

हिन्दू धर्म में माथे पर Chandan का तिलक लगाना बहुत शुभ माना गया है। हमारे शास्त्रों में यह बात वर्णित है कि चन्दन का तिलक लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। पापों का नाश होता है तथा व्यक्ति के शरीर को एक नई ऊर्जा प्राप्त होती है।  

Durva Grass : हिन्दू धर्म में दूर्वा का महत्व, इसके अनगिनत फायदे और टोटके 

हिन्दू धर्म में दूर्वा का महत्व ( Significance of Durva Grass in Hindu Religion )

 दूर्वा जिसे दूब की घास भी कहते हैं, हिन्दू धर्म में बहुत पवित्र और पूजनीय मानी जाती है। दूर्वा को दूब, अमृता, अनंता और महौषधि जैसे अनेकों नामों से जाना जाता है। Durva grass का प्रयोग विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा में विशेष रूप से किया जाता है। इसे मांगलिक कार्यों में जैसे गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह आदि में शामिल किये जाने की परंपरा सदियों से प्रचलन में है।   

Durva को जहाँ एक तरफ धार्मिक कार्यों में विशेष रूप से महत्व दिया जाता है वहीँ यह हमारे शरीर को कई तरह से फायदे पहुँचाने के कार्य करती है। दूब त्रिदोष को हरने वाली औषधि कही जाती है। शरीर के लिए फायदेमंद होने के कारण ही इसका प्रयोग चिकित्सा में भी किया जाता है। अपने धार्मिक और औषधीय दोनों को लिए दूर्वा 3 हजार साल प्राचीन बताई जाती है। यह केवल भारत में ही नहीं बल्कि यूनान, अफ्रीका और रोम के कुछ क्षेत्रों में भी पाई जाती है।    

दूर्वा घास के फायदे ( Durva Grass Benefits )

1. दूर्वा भगवान गणेश को सबसे प्रिय है इसका प्रयोग पूजा में करने से गणेश जी की असीम कृपा प्राप्त होती है। 

2. दूर्वा को गाय को खिलाने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।  

3. यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी लाभदायक है। 

4. doob ghas ke fayde में एक फायदा यह है कि यदि कोई दूब का सेवन करता है उसे अनिद्रा जैसी स्थिति से जल्द ही छुटकारा मिलता है।  

5. दूब में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-सेप्टिक तत्व पाए जाते है इसलिए इसके प्रयोग से त्वचा में खुजली, चकत्ते आदि से राहत मिलती है। इसका पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाया जाता है।  

6. अनीमिया जैसी बीमारियों के लिए दूब बहुत उपयोगी मानी जाती है क्योंकि दूब रक्त कोशिकाओं को बढ़ाने के साथ रक्त साफ करने का कार्य करती है।  

7. प्रातःकाल दूब पर नंगे पांव चलने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और durva leaves को गर्म पानी में उबालकर पीने से मुँह के छाले दूर हो जाते हैं।   

दूर्वा घास के टोटके ( Durva grass ke totke )

1. यदि घर में पैसा नहीं टिक रहा और घर पर आर्थिक संकट बना हुआ है तो आप पंचदेवों में प्रथम पूजनीय भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को गणेश चतुर्थी या किसी शुभ मुहूर्त पर पांच दूर्वा में 11 गांठे लगाकर उन्हें चढ़ाएं। साथ ही दूर्वा अर्पित करते समय नीचे दिए गए मन्त्र का जाप करें। ऐसा करने से आपको आर्थिक संकट से शीघ्र ही छुटकारा मिलेगा।

‘श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि’  

2. दूर्वा को गाय के दूध में मिलकर उसका लेप बनाये फिर उसे तिलक के रूप में माथे पर लगाए, इससे आपकी मनोकमना जल्द ही पूर्ण होगी।

3. बुधवार यानी भगवान गणेश को समर्पित दिन में गाय को दूर्वा की हरी घास ( doob ghas ) खिलाने से आपको गृह कलेश से मुक्ति मिलेगी और परिवार में प्रेम तथा सद्भाव की भावना बढ़ेगी।  

4. धन प्राप्ति का अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए बुधवार के दिन गणेश जी को 11 या 21 दूर्वा चढ़ाएं। ध्यान रहे कि चढ़ाई गई प्रत्येक दूर्वा जोड़े में हो। साथ ही इस दिन Ganesh Kachua (Turtle) Ring को धारण करने से भगवान गणेश की असीम कृपा प्राप्त होती है।

दूब घास की पहचान ( How to identify Durva Grass? )

दुर्वा घास जिसका वैज्ञानिक नाम ( durva meaning in hindi ) – ‘साइनोडॉन डेक्टिलॉन’ है जो पूरे वर्ष भर पाई जाती है। यह घास ज़मीन पर पसरते हुए बढ़ती रहती है, साल में दो बार सितम्बर से अक्टूबर महीने में और फरवरी से मार्च महीने में durva plant में फूल आते हैं। लगभग सभी लोग इस घास के बारे में जानते हैं, भारत जैसे विविधता वाले क्षेत्रों में इसका हर क्षेत्र विशेष के हिसाब से नाम बदलता रहता है। 

दूर्वा चढ़ाने से क्या लाभ होता है? ( Durva chadhane se kyka labh hota hai? )

1. हिन्दू धर्म में प्रथम पूज्य भगवान गणेश को दूर्वा अत्यधिक प्रिय है। उनकी पूजा में 21 दूर्वा चढाने से भगवान गणेश की असीम कृपा प्राप्त होती है।

2. किसी भी पूजा या मांगलिक कार्य को सफल बनाने के लिए दूर्वा का शामिल होना बहुत जरूरी बताया गया है।  

सनातन धर्म में लौंग का महत्व, उसके कुछ ख़ास टोटके और उपाय

हिन्दू धर्म में लौंग का क्या महत्व है? ( Significance of Clove in hindu religion )

हमारे हिन्दू धर्म में लौंग के प्रयोग का खासा महत्व बताया गया है, लौंग जहाँ एक तरफ हमारी सेहत के लिए बहुत फ़ायदेदमंद है वहीँ दूसरी तरफ पूजा विधि में लौंग का उपयोग करना सदियों से चला आ रहा है। लौंग ज्योतिष शास्त्र में विशेष स्थान रखती है क्योंकि इसके माध्यम से किये गये कुछ उपाय या टोटके ऐसे हैं जो हमारी समस्या को दूर करने में सक्षम है। लौंग का प्रयोग पूजा पाठ में होने के साथ तंत्र-मंत्र के क्रियाओं तक में किया जाता है। अधिकतर हम नवरात्रों में माँ दुर्गा की पूजा के समय इसे प्रयोग में लाते हैं। आज हम लौंग के सेवन से होने वाले फायदों, कुछ चमत्कारी टोटकों और uses of clove के बारे में बात करेंगे।  

लौंग के टोटके ( Laung ke totke )

आइये जानते हैं लौंग के चमत्कारी टोटके जिनसे आपकी कई सारी परेशानियों का निकलेगा हल :

1. अपने घर से बुरी और नकरात्मक शक्तियों को हमेशा के लिए बाहर निकलना चाहते हैं तो शनिवार या रविवार की संध्या को पांच लौंग, तीन कपूर और तीन इलाइची लें। इन तीनों को जला दें और जब यह अच्छी तरह से जलने लगे तो इसे अपने पूरे घर में घुमाएं। लौंग के इस मिश्रण के पूरी तरह से जलने के बाद इसकी राख को अपने घर के मुख्य द्वार पर डाल दें। यदि राख को सूखा नहीं डालना चाहते तो इसे पानी में घोलकर मुख्य द्वार पर इसकी छींटे मारे। यह लौंग का टोटका   आपके घर से सभी बुरी शक्तियों का नाश कर देगा।  

2. ज्योतिष शास्त्र में लिखा है कि जिन जातकों की कुंडली में राहु-केतु अशुभ फल दे रहे हैं और हर कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं तो उन्हें शनिवार के दिन लौंग का दान अवश्य ही करना चाहिए। दान के अलावा आप लौंग को Narmadeshwar Shivling पर भी अर्पित कर सकते हैं। इस क्रिया को लगातार 40 शनिवार तक दोहराएं, इससे जातक की कुंडली से राहु-केतु के दुष्प्रभाव समाप्त हो जाएंगे।  

3. नौकरी हासिल करने में भी लौंग का टोटका तंत्र शास्त्र के अनुसार काफी कारगर माना जाता है। इसके लिए घर से निकलते समय अपने मुहं में दो लौंग रख लें उसके बाद जिस जगह इंटरव्यू के लिए जा रहे हैं वहां द्वार पर उस लौंग के अवशेष फेंक ईश्वर का ध्यान करते हुए प्रवेश करें। इस तरह से आपको वह नौकरी अवश्य ही मिल जाएगी।  

4. किसी का घर में बीमार रहना, हर कार्य में बाधा आना, गृह कलेश रहना ये सभी समस्याएं जीवन को बड़ा मुश्किल बना देती हैं। इनसे निपटने के लिए हर शनिवार को तेल का दीपक जलाकर उसमें 3-4 लौंग डाल दे। उस दीपक को घर की सबसे अँधेरी वाली जगह पर रखें। इस तरह आपके घर से सभी कलेश, संकट और विपत्तियां टल जाएंगी और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ेगा।  

5. अपने शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए आपको उनसे झगड़ा करने की कोई आवश्यकता नहीं बल्कि केवल लौंग के प्रयोग से आप उनसे बड़ी ही आसानी से छुटकारा पा सकते हैं। हर मंगलवार और शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें साथ ही पांच लौंग कपूर के साथ प्रज्वलित करें। जब वह पूरी तरह से जल जाए तो उसकी राख को अपने माथे पर तिलक की तरह लगाएं। यह long ka totka अपनाने से आपको अपने शत्रुओं से जल्दी ही मुक्ति मिल जाएगी।  

लौंग से धन प्राप्ति के उपाय ( long ke upay )

1. धन प्राप्ति के लिए एक long ka upay यह है कि हर रोज़ या हर शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा करते समय उन्हें गुलाब के पुष्प के साथ दो लौंग भी अर्पित करें। साथ ही पांच लौंग की कलियों को पांच कौड़ियों के साथ एक कपड़े में बांधकर तिजोरी में रख दे। ऐसा करने से आपके घर में बरकत बनी रहेगी और कभी दरिद्रता का मुँह नहीं देखना पड़ेगा।

2. अपनी आर्थिक समस्या से छुटकारा पाने और अपने कार्य में सफल होने के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी पूजा करने के लिए सरसों के तेल का दीपक जलाएं। उसके बाद दीपक में दो लौंग डालें और हनुमान चालीसा का पाठ करें। 21 मंगलवार long ke totke को अपनाएँ आपकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होगी।

3. यदि आपका पैसा लंबे समय से कहीं पर अटका हुआ है और वह वापिस नहीं मिल रहा है तो इसके लिए आप किसी भी अमावस्या या पूर्णिमा के दिन कपूर और 21 लौंग से माता लक्ष्मी का हवन करें। हवन करने के पश्चात माता लक्ष्मी से प्रार्थना करें कि आपका दिया हुआ उधार आपको वापिस मिल जाए।  

लौंग खाने के फायदे ( Benefits of Cloves )

1. सर्दी जुकाम से जल्दी राहत पाने के लिए लौंग का प्रयोग किया जाता है।  

2. लौंग पाचन एनजाइम के स्राव को बढ़ाने का कार्य करती है, जिससे कब्ज और अपच की समस्या नहीं होती।  

3. लौंग में विटमिन-B1,B2,B4,B6,B9 और विटमिन-सी, K, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट जैसे तत्व शामिल होते हैं।

4. मधुमेह के रोगियों के लिए भी लौंग बहुत फायदेमंद मानी जाती है। ये सभी laung ke fayde हैं।

लौंग जलाने से क्या होता है? ( Long jalane se kya hota hota hai? )

लौंग जलाने से घर में मौजूद सभी नकारात्मक शक्तियां भी जलकर राख हो जाती हैं। लौंग के टोटके में इसे जलाना मुख्य रूप से शामिल होता है। लौंग हमे कई तरह के दोषों से भी मुक्ति दिलाने का कार्य करती है।  

रोजाना लौंग खाने से क्या होता है? ( Rojana laung khane se kya hota hai? )

यदि कोई रोज लौंग का सेवन करता है तो उसे कब्ज और अपच नहीं होता है। लौंग में 30 प्रतिशत फाइवर पाया जाता है साथ ही इसमें विटमिन-B के कई प्रकार भी पाए जाते हैं जिनमें विटमिन-B1,B2,B4,B6,B9 शामिल है साथ ही इसमें विटमिन-सी तथा बीटा कैरोटीन जैसे तत्व भी पाए जाते हैं।

Har Singar Plant : हरसिंगार पौधे का धार्मिक महत्व, इसके चमत्कारी फायदे और टोटके

हरसिंगार के पौधे का महत्व ( Significance of Harsingar plant ) 

हरसिंगार के पौधे को हम पारिजात ( Parijat ka podha ) के नाम से भी जानते है, इसे हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। इस पौधे को शास्त्रों में कल्पवृक्ष की संज्ञा दी गई है। कहते हैं कि जब समुद्र मंथन से उत्पन्न हुए उन 14 रत्नों में से एक रत्न रूपी पौधा हरसिंगार भी था। मनमोहक और आकर्षक दिखने वाला यह हरसिंगार का पौधा ( har singar plant ) पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने के साथ ही हमारी रोजमर्रा की कई सारी परेशानियों को हल किये देता है, जिसके बारे में हम आज हम बात करेंगे।  

हरसिंगार का पौधा घर में लगाने से क्या होता है? ( Harsingar ka paudha ghar me lagane se kya hota hai? )

हरसिंगार का पौधा घर में लगाना बहुत शुभ माना गया है क्योंकि इसमें ईश्वर का वास माना जाता है इसके अनेकों फायदे हैं आइये जानते इन फायदों के बारे में :

हरसिंगार पौधे के फायदे या पारिजात वृक्ष के फायदे ( Harsingar plant benefits in hindi )

1. हरसिंगार के पौधे को घर के आस-पास उत्तर या पूर्व दिशा में लगाने से घर के सभी वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं। 
 
2. श्री हरि और माता लक्ष्मी की पूजा में यदि harsingar ka ped के फूलों को शामिल किया जाए तो इससे भगवान प्रसन्न होते है और शीघ्र ही आपकी मनोकामना पूर्ण होती है।

3. कहते हैं जहाँ यह पौधा होता है वहां माँ लक्ष्मी का वास भी अवश्य ही होता है। यदि आप आर्थिक संकट, दरिद्रता से लंबे समय से जूझ रहे हैं, घर में धन नहीं रुक रहा या बरकत नहीं हो रही है तो आपको यह पौधा अवश्य ही लगाना चाहिए। 

( जिस प्रकार हरसिंगार का पौधा हमारे वातावरण को शुद्ध कर देवी लक्ष्मी को अपनी ओर आकर्षित करता है उसी तरह अलौकिक शक्तियों से भरपूर Dhan Laxmi Kuber Yantra माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करता है। इसमें समाहित चमत्कारी शक्तियां व्यक्ति को कभी आर्थिक तंगी और दरिद्रता का सामना नहीं करने देती। यदि आप लम्बे समय से आर्थिक तंगी या धन के अभाव से जूझ रहें हैं तो आज ही Dhan Laxmi Kuber Yantra को घर लाएं और विशेष पूजा विधि के द्वारा शुक्रवार को घर में स्थापित करें। ) 

4. हरसिंगार के पुष्पों की इतनी मनमोहक सुंगंध होती है जो हमारे तनाव को चुटकियों में खत्म कर सकती है। चिंता दूर करने और माहौल खुशनुमा बनाये रखने के लिए यह पौधा काफी लाभकारी है।  

5. जिस स्थान पर Parijatham tree लगा होता है वहां के आस-पास के वातावरण से बुरी शक्तियां कोसों दूर रहती हैं।  

6. हरसिंगार का पौधा धार्मिक लाभ के साथ हमारी रोजमर्रा की समस्याओं जैसे जोड़ों में दर्द, सर्दी-खांसी, सूखी खांसी, साइटिका, सूजन और दर्द से छुटकारा दिलाता है।   

7. हरसिंगार के पत्तों ( harsingar leaves ) का पानी उबालकर उसकी चाय पीने से सर्दी-खांसी और साइटिका में राहत मिलती है। इस तरह ये हरसिंगार का पत्ता के फायदे हैं।  

हरसिंगार के टोटके ( Harsingar ke totke )

1. मंगलवार के दिन हरसिंगार के पौधे ( Harsingar tree ) को हनुमान जी के मंदिर के पास, किसी नदी के पास या सामाजिक स्थल पर लगाने से एक तोला स्वर्ण दान करने जितना पुण्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं हनुमान जी भी प्रसन्न होते है और अपनी कृपा बरसाते हैं।

2. हरसिंगार के बांदे को एक लाल वस्त्र में लपेटकर तिजोरी में रखने से धन का कभी अभाव नहीं होता है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।  

3. Harsingar ka paudha को किसी शुभ मुहूर्त पर अपने घर के उत्तर दिशा या पूर्व दिशा में लगाएं, नियमित रूप से उसकी देखभाल करें। ऐसा करने से घर के सभी वास्तु दोषों की सम्पति होती है।   

पारिजात का पौधा घर में लगा सकते हैं क्या? ( Parijat ka paudha ghar me laga sakte hain kya? )

पारिजात का पौधा घर में लगा सकते हैं बल्कि यह पौधा तो घर के वास्तु दोष दूर करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।

पारिजात का पौधा घर पर कैसे लगाएं? ( Parijat ka paudha ghar par kaise lagaye? )

आइये जानते हैं घर पर पारिजात का पौधा कैसे लगाएं :

1. एक मिट्टी का बर्तन लें जो करीब 16 इंच डायमीटर का हो। साथ ही उस बर्तन के तल पर तीन जल निकासी छेद हों ताकि अतिरिक्त पानी उसमें से निकल सके।  

2. वसंत ऋतू इस पौधे को रोपने के लिए सबसे बेहतर है।  

3. सर्दियों के मौसम में Parijat ka paudha लगाने से बचें।  

4. बीजों को अंकुरित होने से बचाएं।  

5. पोटिंग मिक्स में 50% सामान्य गॉर्डन की मिट्टी और 50% आर्गेनिक खाद होनी चाहिए। अच्छी तरह से मिलाकर ट्रे भर दें।

6. हर सेक्‍शन में एक बीज होना अनिवार्य है उनमें 2 सेमी गहराई बनाकर रखें।

7. आधी पानी न डालते हुए पौधे में नमी बनाएं रखें।  

8. छः घंटे तक पौधे को धूप दिखाना ज़रूरी है जबकि पौधा आंशिक धूप और आंशिक छाया में हो।  

9. सर्दियों में इस पौधे को नियमित रूप से पानी देने से बचें।

हरसिंगार के पौधे की पहचान क्या है? ( Harsingar ke paudhe ki pehchan kya hai? )

हरसिंगार का पौधा छोटे या बड़े दोनों रूपों में विकसित हो सकता है। इसके फूल सफ़ेद और सुगन्धित होते हैं। हरसिंगार का छोटा पौधा 10 से 11 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ सकता है। इस पौधे की छाल बहुत कठोर होती है जो परतदार और भूरे रंग की दिखती है।

हरसिंगार में फूल कब आते हैं? ( Har singar me phool kab aate hain? )

हरसिंगार के पौधे में फूल आने का समय अगस्त माह से दिसंबर माह तक होता है। जबकि सर्दियों में इस पौधे को लगाने से बचना चाहिए।    

पारिजात का फूल कौन से भगवान को चढ़ता है? ( Parijat ka phool kaun se bhagwan ko chadhta hai? )

Parijat ka Phool भगवान श्री हरि और माता लक्ष्मी को चढ़ाया जाता है। यह फूल दोनों को ही अत्यंत प्रिय माना जाता है इसलिए माता लक्ष्मी और श्री हरि के शृंगार में har singar ka ped के फूल प्रयोग में लाये जाते हैं।

हरसिंगार का पत्ते का पानी से क्या होता है? ( Harsingar ke patta ka pani peene se kya hota hai? )

हरसिंगार का पौधा ( Parijat tree ) एंटी इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी बैक्टीरियल गुणों से लैस माना जाता है। हरसिंगार के पत्ते का पानी पीने से बुखार, सर्दी, खांसी और साइनस जैसे रोगों में राहत मिलती है। इसके पत्ते को पानी उबालकर इसकी चाय पियें, यह बहुत फायदेमंद मानी जाती है।  

हरसिंगार के पत्ते कितने दिन पीना चाहिए? 

हरसिंगार के पत्ते ( harsingar leaf ) का पानी सूजन-दर्द, घावों, पेट के कीड़ों, सर्दी, सूखी खांसी, साइटिका से राहत दिलाता है। इसके पत्ते का पानी तब तक पियें जब तक आपको अपनी समस्या से राहत नहीं मिल जाती है।   

हरसिंगार के कितने नाम होते हैं? ( Harsingar ke kitne naam hote hain? )

हरसिंगार को पारिजात ( Parijatha ), प्राजक्ता, शेफाली, शिउली, पार्दक, पगडमल्लै, मज्जपु, पविझमल्लि, गुलजाफरी, नाइट जेस्मिन, सिंघार आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।  

पारिजात का पेड़ कौन सी दिशा में लगाना चाहिए? ( Parijat  ka ped kaun si disha me lagana chahiye? )

Parijat ka pedh उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना शुभ होता है। हिन्दू धर्म में इन दिशाओं में ईश्वर का वास माना जाता है इसलिए इन दिशाओं में Parijat ka ped या पौधा लगाने से देव दोषों और वास्तु दोषों से मुक्ति मिलती है।   

हरसिंगार के फूल को चेहरे पर लगाने से क्या होता है? ( Har singar ke phool ko chehre par lagane se kya hota hai? )

हरसिंगार का फूल को पीस कर चेहरे पर लगाने से त्वचा से जुड़ी समस्याएं जैसे रूखापन, दाग-धब्बे खत्म हो जाती है। इसका प्रयोग यदि नियमित रूप से किया जाए तो चेहरे में चमक आनी शुरू हो जाती है।  

Ratha Saptami 2022 : रथ सप्तमी का महत्व, कथा, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

रथ सप्तमी का क्या अर्थ है? ( What is meant by Ratha Saptami? )

रथ सप्तमी ( Rathasapthami ) माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को आती है। जिसे सूर्य जयंती, भानु सप्तमी, माघी सप्तमी, अर्क सप्तमी, अचला सप्तमी जैसे अलग – अलग नामों से जाना जाता है। यह दिन इसलिए ख़ास है क्योंकि रथ सप्तमी के दिन ही सूर्य देव का जन्म हुआ था। कहते हैं कि इस विशेष तिथि को सूर्य देव अपने सात घोड़ों के साथ अवतरित हुए थे।   

रथ सप्तमी का महत्व ( Significance of Ratha Saptami )

रथ सप्तमी के दिन व्रत रखने और सूर्य भगवान की पूजा – अर्चना किए जाने का विधान है। मत्स्य पुराण में इस बात का वर्णन हमें मिलता है कि यह दिन सूर्य देव को समर्पित है। हिंदू धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि इस दिन व्रत का पालन करने से सुख – समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। व्यक्ति अपने जीवन में सात प्रकार के पापों का भागीदार होता है। ये पाप जाने या अनजाने, मन से, वचन से, शारीरिक क्रिया के माध्यम से, वर्तमान जन्म और पिछले जन्मों में किए गए पाप हैं। रथ सप्तमी में नियमों का पालन कर व्यक्ति अपने पापों से छुटकारा पा सकता है।  

रथ सप्तमी की कहानी ( What is the story behind Ratha Saptami? )

रथ सप्तमी ( Ratha Saptami ) से जुड़ी पौराणिक कहानी के अनुसार एक नगर में गणिका इंदुमती नामक महिला रहा करती थी। उसने अपने पूरे जीवनकाल में कभी कोई दान पुण्य नहीं किया था और अब उसका अंत काल बहुत नज़दीक था। महिला चिंतित थी वह अपनी समस्या लेकर मुनि वशिष्ठ के पास पहुंची और उसने सारी बात बताई। महिला ने कहा कि मैंने अपने जीवन में कभी किसी तरह का दान पुण्य नहीं किया है और अब मेरा अंत समय करीब है। कृपया मुझे मुक्ति प्राप्त करने का रास्ता बताएं।

महिला की बात सुनकर मुनि वशिष्ठ ने हल के तौर पर कहा कि माघ मास की सप्तमी तिथि को अचला सप्तमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन किया गया दान पुण्य हजारों गुना दान पुण्य के समान होता है। रथ सप्तमी के नाम से भी जाना जाने वाला यह दिन स्नान के लिए भी खास है। इस दिन पवित्र नदी ने स्नान करने के पश्चात भगवान सूर्य को अर्घ्य दें और फिर दीप दान करें।

व्रत का पालन करते हुए दिन में एक ही बार नमक का भोजन ग्रहण करें। गणिका ने वशिष्ठ गुरु द्वारा बताई गए हर नियम का पालन किया। व्रत रखे जाने के कुछ ही दिनों बाद गणिका ने अपना देह त्याग दिया। रथ सप्तमी के दिन रखे गए व्रत के प्रभाव से उसे स्वर्ग के रहा इंद्र की अप्सराओं का प्रधान बनने का सौभाग्य हासिल हुआ था।  

Ratha Saptami से जुड़ी दूसरी कहानी के अनुसार श्री कृष्ण के पुत्र साम्ब को अपने शारीरिक बल पर बहुत अहंकार हो गया था। अपने अहंकार में डूबते हुए साम्ब ने ऋषि दुर्वासा का अपमान कर डाला। ऋषि दुर्वासा ने अपमान होता देख साम्ब को कुष्ठ रोग का श्राप दे डाला। अपने पुत्र को कुष्ठ रोग से पीड़ित देख श्री कृष्ण ने साम्ब को सूर्य देव की आराधना करने के लिए कहा। साम्ब ने पूरी श्रद्धा से सूर्य देव की आराधना की और अंततः सूर्य देव उनसे प्रसन्न हुए। सूर्य देव ने साम्ब को वरदान स्वरुप कुष्ठ रोग से मुक्ति प्रदान की।

रथ सप्तमी के दिन क्या करें? ( What to do on Ratha Saptami? )  

आइये जानें रथ सप्तमी पूजा विधि ( Ratha Saptami puja vidhi ) :

1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।  

2. सूर्य देव को सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।  

3. सूर्य देव के 12 नामों का जाप करें।  

4. अर्घ्य देने के पश्चात मिट्टी का घी से भरा हुआ दीपक जलाएं।  

5. अब घर के मंदिर में एक दीपक जलाकर आसन पर बैठ जाएँ।  

6. सूर्य सहस्त्रनाम मंत्र का और गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करने से शुभ फल और सौभाग्य की प्राप्ति होगी।  

7. सूर्य जयंती के दिन Surya Yantra Locket धारण करने से कुंडली पर से सूर्य के अशुभ प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।  

8. इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराना और जरूरतमंदों को दान करना बहुत शुभ माना जाता है।  

9. सूर्य देव को भोग में चावल अर्पित किये जाते हैं।  

रथ सप्तमी कैसे मनाते हैं? ( How do we celebrate Ratha Saptami? )

रथ सप्तमी के दिन व्रत का संकल्प लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। फिर पूरे दिन सूर्य मन्त्रों का जाप किया जाता है। इस दिन घर में सूर्यदेव के रथ वाली सुन्दर और आकर्षक रंगोली बनाई जाती है। घर के आंगन में बड़े बर्तन में दूध को रख सूर्य की गर्मी से उसे उबाला जाता है फिर उसमें चावल डालकर सूर्य देव को भोग में चढ़ाया जाता है।    

2022 रथ सप्तमी तिथि और शुभ मुहूर्त ( 2022 Ratha Saptami date and timing ) 


7 फरवरी 2022 , सोमवार

प्रारंभ : 7, फरवरी दोपहर 4:37 से शुरू
समाप्त : 8 फरवरी मंगलवार, सुबह 6:15 तक

स्नान मुहूर्त : 7, फरवरी, सुबह 5:24 से सुबह 7:09 तक
कुल अवधि : 1 घंटा 45 मिनट
अर्घ्य के लिए सूर्योदय का समय : सुबह  7:05 मिनट

Amavasya 2022 : अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये काम, जानें पूजा विधि और टोटके

अमावस्या क्या है? ( What is Amavasya? )

हिन्दू पंचांग के हिसाब से अमावस्या ( Amavasya ) हर माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि होती है। हर माह पड़ने वाली अमावस्या की तिथि को कोई न कोई पर्व अवश्य ही मनाया जाता है। Amavasya ke din हम चन्द्रमा को नहीं देख सकते क्योंकि इस अवधि में चन्द्रमा क्षीणता के उच्चतम स्तर पर होता है। चद्र्मा 28 दिनों में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूर्ण करता है। अपनी इस परिक्रमा के दौरान 15 दिनों के लिए चंद्रमा दूसरी ओर होता है इसलिए उसे देखा जाना संभव नहीं। अमावस्या तिथि का स्वामी पितृ देव को माना गया है इसलिए इसे पूर्वजों या पितरों का दिन भी कहा जाता है।

अमावस्या का अर्थ क्या होता है? ( What is the meaning Amavasya? )

अमावस्या ( Amavasya ) दो शब्दों अमा और वस्या से मिलकर बना है। शिव पुराण में इसका वर्णन करते हुए बताया गया है कि अमा यानी एकत्रित करना और वस्या का अर्थ वास करना है। इस प्रकार अमावस्या का शाब्दिक अर्थ हुआ— ऐसी अवस्था जिसमें सभी का वास हो। वहीँ हमारे धर्म ग्रंथों में चन्द्र की 16 वीं कला को अमा की आज्ञा दी गई है, चंद्र मंडल की अमा नामक महाकला में 16 कलाओं की शक्तियां निहित हैं। इसे ही अन्य नामों जैसे अमावस्या, सूर्य-चंद्र का संगम और अमावस कहा जाता है यानी जिसका क्षय या उदय नहीं होता उसे अमावस कहते हैं।

अमावस्या का रहस्य क्या है? ( Mystery of Amavasya )

अमावस्या का रहस्य यह है कि इस दिन चंद्र अपनी क्षीणता के उच्चतम स्तर पर होता है और दिखाई देना बंद हो जाता है। कृष्ण पक्ष के दिन आने वाली यह तिथि दैत्यों के पक्ष में होती है क्योंकि इस दौरान दैत्य क्रियाएं अत्यधिक सक्रिय होती है। इनके सक्रिय होने के चलते ही व्यक्ति के स्वाभाव पर अमावस्या के समय अधिक प्रभाव पड़ता है खासकर भावुक मन वाले व्यक्तियों पर। दानवी प्रवृत्ति का असर पड़ने के कारण ही अमावस में कई तरह के कार्यों पर प्रतिबन्ध लगाया गया है।

अमावस्या कितने प्रकार की होती है? ( Amavasya kitne prakar ki hoti hai? )

हर माह में  एक बार अमावस्या आती है इस प्रकार साल में 12 अमावस्या पड़ती हैं यानी अमावस्या 12 प्रकार की होती हैं। आइये जानें 12 प्रकार की अमावस्या के नाम :

1. सोमवती अमावस्या
2. भौमवती अमावस्या
3. मौनी अमावस्या
4. शनि अमावस्या
5. हरियाली अमावस्या
6. दिवाली अमावस्या
7. कुश गृहिणी अमावस्या
8. सर्वपितृ अमावस्या

बाकी दान-पुण्य और स्नान के लिए महत्व रखने वाली अमावस्या माह विशेष और वार के नामों से जानी जाती हैं।

अमावस्या को पूजा कैसे करें? ( Amavasya ko Puja Kaise karen? )

1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।  

2. सूर्य देव और पितरों को जल अर्पित करें। इससे घर से कलह और दरिद्रता दूर होगी।    

3. इसके बाद पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करें क्योंकि पीपल के वृक्ष में ईश्वर का वास माना जाता है।  

4. इस दिन तुलसी की 108 परिक्रमा से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है।  

5. भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें पीले पुष्प, पीला वस्त्र, चन्दन, सुपारी, कुमकुम अर्पित करें।  

6. घी का दीपक और धूप जलाकर आराधना करें।  

7. इसके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और गरीबों या जरूरतमंदों को दान दें।   

अमावस्या के दिन क्या करें क्या ना करें? ( Amavasya ke din kya kare kya na kare? )

1. अमावस्या के दिन सात्विक रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। 
 
2. इस दिन किसी दूसरे के घर में भोजन करने से बचना चाहिए।

3. किसी से लड़ाई-झगड़ा या अपशब्द कहने से बचें।  

4. प्रातःकाल उठकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें और भगवान विष्णु का पूजन करें।  

5. शरीर पर तेल नहीं लगाना चाहिए और न ही तेल की मालिश करें।  

6. चद्रं दोष से पीड़ित लोग गाय को दही या चावल खिलाएं।  

7. पीपल के वृक्ष का पूजन कर उसकी परिक्रमा करनी चाहिए।

8. नाख़ून और सर के बाल नहीं काटने चाहिए।  

अमावस्या के दिन क्या खरीदे क्या ना खरीदे? ( Amavasya ke din kya kharide kya na kharide? )

1. इस दिन मांस-मदिरा न खरीदें।  

2. नई झाड़ू न खरीदें, ऐसा करने से लक्ष्मी माँ नाराज़ होती हैं।  

3. आटा या गेहूं की खरीद नहीं करनी चाहिए।  

4. किसी शुभ कार्य मुंडन, गृह प्रवेश आदि न करें। 

अमावस्या के टोटके ( Amavasya ke totke )  

1. अमावस्या के दिन पूजा पाठ करने के बाद आटे की गोलियां बनाये और उन्हें तालाब की मछलियों को खिलाएं इससे आपको पुण्य की प्राप्ति होगी और सभी चिंताएं समाप्त हो जाएंगी।  

2. अमावस्या के टोटके में एक यह है कि इस दिन काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाने से मनोकामना की पूर्ति होती है और आपके द्वारा किये सभी पापों का क्षय होगा।  

3. लम्बे समय से नौकरी नहीं मिल रही है तो अपनी इस इच्छा की पूर्ति के लिए एक नींबू को साफ कर घर के मंदिर में रखें फिर रात में उस नींबू को बेरोज़गार व्यक्ति के सिर से 7 बार उतारें। उसके बाद नींबू को चार भागों में काटकर चौराहे पर चारों अलग दिशाओं में फेंक दें। यह टोटका जल्दी नौकरी लगने में कारगर साबित होगा।  

4. जिन जातकों की कुंडली में काल सर्प दोष हावी है उन्हें अमावस्या के दिन चांदी के नाग-नागिन की पूजा कर नदी में प्रवाहित कर दें। साथ ही Kaal Sarp Dosh Nivaran Yantra भी यन्त्र धारण करें। इस तरह जातक के ऊपर से काल सर्प दोष के प्रभाव कम होने लगेंगे।

5. अमावस्या के टोटके में काल सर्प दोष के निवारण के लिए अमावस्या के दिन घर भगवान शिव का पूरे विधि विधान से पूजन कराएं और Kaal Sarp Yog Yantra को घर में स्थापित करें। इससे सभी संकट टल जाएंगे।  

6. धन प्राप्ति के लिए अमावस्या का टोटका यह भी है कि इस दिन पांच लाल पुष्प और पांच जलते हुए दीपक को नदी में प्रवाहित करें। ऐसा करने से लाभ मिलने की पूरी-पूरी संभावना होती है।  

7. रात्रि को काले कुत्ते को तेल या घी चुपड़ी रोटी खिलाएं। इससे आपको अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी और यदि शत्रु आपके खिलाफ कोई साजिश कर रहे होंगे तो वे असफल हो जाएंगे।  

8. Amavasya ke totke में एक टोटका यह अपनाएं कि अमावस्या की संध्या पर लाल बाती वाला गाय के घी का दीपक जलाएं, इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।    
     

अमावस्या को किसकी पूजा होती है? ( Amavasya ko kiski Puja hoti hai? )

हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि अमावस्या पितरों को मुक्ति दिलाने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए होती है क्योंकि अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव माने जाते हैं। इस दिन पितरों का श्राद्ध और पूजा किये जाने की परंपरा है। अमावस्या के दिन व्रत रख, पवित्र नदी में स्नान कर फिर पिंडदान करना चाहिए। जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष हो उन्हें अनिवार्य रूप से अमावस्या के दिन इन नियमों का पालन करना चाहिए।  

अमावस्या के व्रत में क्या खाना चाहिए? ( Amavasya ke Vrat me kya khana chahiye? )

अमावस्या के व्रत में फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें जिसमें सेंधा नमक प्रयोग में लाएं, वहीँ साबूदाने, लौकी, चना, जीरा, सरसों का साग और खीरा इस दिन खाना वर्जित है।  

2022 अमावस्या कब की है ( 2022 Amavasya kab ki hai? )

आइये जानते हैं 2022 अमावस कब की है :

पौष अमावस्या ( Paush Amavasya )
रविवार 2 जनवरी, 2022

माघ अमावस्या ( Magha Amavasya )
मंगलवार 1 फरवरी, 2022

फाल्गुन अमावस्या ( Phalguna Amavasya )
बुधवार 2 मार्च, 2022

चैत्र अमावस्या ( Chaitra Amavasya )
शुक्रवार 1 अप्रैल, 2022

वैशाख अमावस्या ( Vaishakh Amavasya )
शनिवार 30 अप्रैल, 2022

ज्येष्ठ अमावस्या ( Jyeshtha Amavasya )
सोमवार 30 मई, 2022

आषाढ़ अमावस्या ( Ashadh Amavasya )
बुधवार 29 जून, 2022

श्रावणी अमावस्या ( Sawan Amavasya )
गुरुवार 28 जुलाई, 2022

भाद्रपद अमावस्या ( Bhadrapada Amavasya )
शनिवार 27 अगस्त, 2022

अश्विन अमावस्या ( Ashwin Amavasya )
रविवार 25 सितंबर, 2022

कार्तिक अमावस्या ( Kartika Amavasya )
मंगलवार 25 अक्टूबर, 2022

मार्गशीर्ष अमावस्या ( Margashirsha Amavasya )
बुधवार 23 नवंबर, 2022

पौष अमावस्या ( Paush Amavasya )
शुक्रवार 23 दिसंबर, 2022

Panch Mukhi Rudraksha के फायदे, धारण करने के नियम और पहचान का तरीका

पंचमुखी रुद्राक्ष क्या है? ( What is Panchmukhi Rudraksha? )

पंचमुखी रुद्राक्ष ( Panch mukhi Rudraksha ) में भगवान शिव के वृष पर विराजमान पंचमुखी महादेव स्वरूप का वास होता है और इस रुद्राक्ष का प्रतिनिधित्व रूद्र कालाग्नि करते हैं। इसमें पञ्च देवों का वास होने के कारण इसे शिव के आत्म-स्वरूप की संज्ञा भी दी गई है। यह रुद्राक्ष सर्वगुण संपन्न माना जाता है क्योंकि यह भगवान शिव का सबसे प्रिय रुद्राक्ष है। पंचमुखी रुद्राक्ष का अधिपति गृह बृहस्पति है।

पंचमुखी रुद्राक्ष पहनने से क्या होता है? ( Panchmukhi Rudraksha pahnne se kya hota hai? )

पंचमुखी रुद्राक्ष ( Panch mukhi Rudraksh ) पहनने से व्यक्ति अपनी बहुत सारी परेशानियों से मुक्ति पा सकता है, भगवान शिव के समीप पहुँच सकता है और अपना जीवन सुखी-समृद्ध बना सकता है। अब हम नीचे जानेंगे कि पंचमुखी रुद्राक्ष को पहनने से किस प्रकार व्यक्ति सुखी जीवन की ओर चल सकता है।

5 मुखी रुद्राक्ष पहनने के फायदे ( 5 Mukhi Rudraksha benefits in hindi )

1. पंचमुखी रुद्राक्ष भौतिक संकटों और दैहिक रोग को समाप्त करने में लाभाकरी माना जाता है।

2. यह रुद्राक्ष मधुमेह, स्तनशिथिलता, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, एसिडिटी जैसे रोगों से बचाव करता है।

3. 5 Mukhi Rudraksha ke fayde में एक फायदा है कि यह व्यक्ति के तनाव को कम कर मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।  

4. जीवन से नकारात्मकता को दूर कर अध्यात्म की ओर जाने के लिए प्रेरित करता है।  

5. यदि जातक की कुंडली में बृहस्पति का प्रतिकूल प्रभाव है तो उसे पंचमुखी रुद्राक्ष अवश्य ही धारण करना चाहिए।   

6. यह अनिद्रा की समस्या से निजात दिलाने में सहायक है।

7. यह नरहत्या के दोषों को दूर करने में सक्षम है। ये सभी अद्भुत Panchmukhi Rudraksha ke fayde हैं।

पंचमुखी रुद्राक्ष पहनने के नियम ( Rules of wearing Panchmukhi Rudraksha in hindi )

1. पंचमुखी रुद्राक्ष पहनने के लिए व्यक्ति का सात्विक रहना अनिवार्य है।
  
2. मांस-मदिरा और तामसिक भोजन ग्रहण वर्जित है।  

3. मन में किसी के लिए द्वेष भाव या अहंकार नहीं होना चाहिए।  

4. नियमित रूप से भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए।  

5. इसे शमशान, शवयात्रा, शौचालय में न पहनें।

6. महिलाएं पंचमुखी रुद्राक्ष को पीरियड्स के दौरान धारण न करें।    

पंचमुखी रुद्राक्ष कौन कौन धारण कर सकता है? ( Who can wear Panchmukhi Rudraksha? )

पंचमुखी रुद्राक्ष को बच्चे, महिलाएं और पुरुष तीनों ही धारण कर सकते हैं। साथ ही जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति अशुभ फल दे रहा हो, अनिद्रा की समस्या हो, ह्रदय रोग, मधुमेह, स्तनशिथिलता, एसिडिटी, तनाव से मुक्ति पाने के लिए इसे धारण किया जा सकता है। ज्योतिष के अनुसार मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन राशि वाले जातकों को यह रुद्राक्ष धारण करने की सलाह दी जाती है।

पंचमुखी रुद्राक्ष कैसे धारण करें? ( How to wear Panchmukhi Rudraksha )

आइये जानते हैं how to wear panchmukhi rudraksha in hindi :

1. पंचमुखी रुद्राक्ष को धारण करने के लिए सोमवार या गुरूवार का दिन चुने। 
 
2. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।  

3. एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान शिव की प्रतिमा और शिवलिंग रखें।  

4. शिवलिंग का जलाभिषेक करें या पंचामृत से स्नान कराएं।  

5. उन्हें पुष्प, बेलपत्र, सुपारी, अक्षत, चन्दन अर्पित करें।

6. घी का दीपक और धूप जलाएं।  

7. भगवान को फल और नैवैद्य अर्पित करें।  

8. इसके बाद भगवान शिव के प्राण मंत्र ॐ नमः शिवाय का 11 बार जाप करें।  

10. अब पंचमुखी रुद्राक्ष को पहले भगवान को समर्पित करें और फिर धारण मंत्र का जाप करते हुए इसे धारण करें।  

पंचमुखी रुद्राक्ष धारण मंत्र : ”ॐ ह्रीं क्लीं नम:”

11. धारण करने के पश्चात भगवान शिव की पूजा नियमित रूप से की जानी चाहिए।  

असली पंचमुखी रुद्राक्ष की पहचान कैसे करें? ( How to identify Original Panchmukhi Rudraksha? )

आइये जानें how to identify Panchmukhi Rudraksha : 

1. पंचमुखी रुद्राक्ष को ध्यान से देखें तो इसके पांच मुख होते हैं। इसे पहचानने के लिए रुद्राक्ष को पानी में थोड़े समय के लिए उबाले यदि वह रंग न छोड़े तो वह असली है।

2. दूसरा तरीका है रुद्राक्ष को सरसों के तेल में रख दें और यदि रुद्राक्ष का रंग उसके रंग से थोड़ा अधिक गहरा दिखाई देने लगे तो यह Original Panchmukhi Rudraksha की निशानी है। 

पंचमुखी रुद्राक्ष की कीमत कितनी है? ( What is the Price of Panchmukhi Rudraksha? )

हमारे पास पंचमुखी रुद्राक्ष उचित मूल्य पर उपलब्ध है। हमारे पास धारण करने वाले पंचमुखी रुद्राक्ष में Original Gold Capping Panchmukhi Rudraksha Mala और Panchmukhi Rudraksha Mala with Silver Capping मात्र ₹449 पर जबकि जाप के लिए Panchmukhi Rudraksha Mala भी उचित मूल्य पर मात्र ₹419 में उपलब्ध है। यदि आप खरीदने के इच्छुक हैं तो इसे आज ही घर बैठे Online Order करें।  
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