दक्षिणेश्वर काली मंदिर- जानिये 51 शक्तिपीठों में शामिल इस मंदिर का इतिहास

दक्षिणा काली मंदिर कहाँ स्थित है? ( Dakshina Kaali Mandir kaha sthit hai? )

दक्षिणेश्वर काली ( Dakshineswar Kali Temple )मंदिर पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में एक छोर के निकट हुगली नदी के किनारे अवस्थित है। यह माता काली के प्रचलित मंदिरों में से एक है। यहाँ विराजमान दक्षिणा काली मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर (Dakshineswar Kali Temple) का इतिहास

Dakshineswar Kali Temple देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक है। इन शक्तिपीठों की स्थापना के पीछे एक मान्यता प्रचलित है। जिसके मुताबिक जब भगवान् विष्णु ने मां सती के शरीर के अपने चक्र से टुकड़े किये थे तब जहाँ-जहाँ देवी सती के शरीर के टुकड़े, आभूषण गिरे वहां इनका निर्माण हो गया। इस मंदिर में देवी के दाएं पैरों की कुछ उँगलियाँ इसी जगह पर गिरी थी। इसी तरह कुल 51 जगह ऐसी हैं जहाँ देवी के टुकड़े गिरे थे जिन्हें शक्तिपीठों के नाम से जाना जाता है।  

स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि 

इस दक्षिणेश्वर मंदिर को परमहंस रामकृष्ण की कर्मभूमि माना जाता है। रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानंद के गुरु और पश्चिम बंगाल में हिन्दू नवजागरण के प्रमुख सूत्रधारों में से एक हैं। दक्षिणकाली मंदिर के प्रमुख पुरोहित की भूमिका भी निभा चुके है। कहा तो यह भी जाता है कि इसी स्थान पर धर्मगुरु रामकृष्ण को Maa Dakshineshwari Kali ने दर्शन दिए थे।

दक्षिणा काली मंदिर निर्माण के लिए रानी रासमणि से जुड़ी कहानी

Dakshineswar Temple का निर्माण साल 1855 में हुआ था। दरअसल जान बाजार की ज़मींदार रानी रासमणि को एक स्वप्न आया था जिसमें माता काली ने उन्हें यह मंदिर बनवाने का निर्देश दिया था।  

कहानी की बात करें तो रानी रासमणि (Rani Rasmani) एक विधवा रानी थी। वे अत्यधिक आध्यात्मिक थीं जिस कारण थोड़ी उम्रदराज होने पर उनकी तीर्थ पर जाने की इच्छा हुई। इसलिए उन्होंने सर्वप्रथम वाराणसी जाने की योजना बनाई। वाराणसी जाने के लिए पहले के समय में रेल की सुविधा नहीं होती थी इसलिए सब नाव का प्रयोग करते थे।

गंगा के रास्ते से होते हुए वाराणसी पहुंचा जाता था। रानी रासमणि ने इस रास्ते से जाने के लिए योजना बनाई परन्तु एक रात पहले ही रानी को सपना आया। Dakshineswar Kali Maa ने रात में रानी के स्वप्न में आकर कहा कि वाराणसी न जाए यहीं पर मंदिर का निर्माण करवाए। इस तरह सन 1855 में दक्षिणेश्वर नामक मंदिर का निर्माण करवाया गया।  

काली की कहानी (Kali story)

हिन्दू पुराणों देवी काली को एक रूद्र अवतार माना गया है। उनके स्वरुप की बात करें तो तस्वीरों में देवी ने एक विकराल रूप धारण किया हुआ है। गले में मुंडमाला और एक हाथ में रक्त टपकाता हुआ खड्ग और दूसरे हाथ में खप्पर है। देवी काली ने भगवान् शिव पर भी पैर रख दिया था इसलिए उन्हें लेटे हुए भगवान शंकर पर खड़ी जीह्वा निकाले दिखाया गया है।

दक्षिणा काली मंदिर की मान्यता ( Dakshina Kaali Mandir ki manyata )

यह मंदिर इसलिए अथिक महत्व रखता है क्योंकि यह 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यहाँ पूरे भारत समेत दुनियाभर से श्रद्धालु दर्शन करने पहुचंते हैं। साथ ही बता दें कि यह मंदिर दुनिया के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।  

(यदि आप माता काली का आशीर्वाद पाना चाहते हैं तो Dakshina Kali KavachLocket को धारण कर सकते हैं। Dakshina Kali Kavach Locket देवी काली का प्रत्यक्ष आशीर्वाद है जो व्यक्ति को समस्त प्रकार के रोगों से बचाता है और बुरी शक्तियों से रक्षा करता है।)

दक्षिणा काली मंदिर की स्थापना कब हुई? ( Dakshina Kaali Mandir ki sthapna kab hui? )

दक्षिणा काली मंदिर का निर्माण 1847 में शुरू हुआ और 1855 में जाकर पूर्ण हुआ था।

दक्षिणेश्वर काली मंदिर में जाने का समय क्या है? ( Dakshineshwar Kaali Mandinr me jane ka samay kya hai? )

यह मंदिर सुबह के समय 4 से 6 घंटे के लिए खुलता है जबकि संध्या के 4 से 5 घंटे के लिए खुला रहता है।  
Dakshineswar temple opening time : सुबह – 6am संध्या – 3pm
Dakshineswar temple closing time : सुबह – 12:30pm संध्या – 8:30pm

We will be happy to hear your thoughts

Leave a reply

Prabhubhakti
Logo
Enable registration in settings - general
Shopping cart