बोधेश्वर महादेव मंदिर (Bodheshwar Baba Mandir) : जहाँ हजारों-लाखों की संख्या में शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं सांप

भारत में भगवान् शिव (Lord Shiva) को आकार और निराकार दोनों ही रूपों में पूजा जाता है इसलिए इनके निर्गुण और सर्गुण दोनों ही तरह के भक्त हैं। महादेव की अधिकतर शैव परंपरा से संबंध रखने वाले लोग आराधना करते हैं। भारत में भगवान् शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों (12 Jyotirlingas) से जुड़े ख़ास मंदिर तो मौजूद हैं ही इसी के साथ कई ऐसे कई रहस्मयी मंदिर भी हैं जिनकी महिमा निराली है।

इन्हीं रहस्यमयी मंदिरों में से एक है बोधेश्वर महादेव मंदिर (Bodheshwar Baba Mandir)। बता दें कि यह मंदिर उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में बांगरमऊ के निकट अवस्थित है। इस मंदिर से जुड़े कई ऐसे रहस्य है जिनके बारे में नीचे उल्लेख किया गया है।

बोधेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी कहानी 

इस मंदिर के निर्माण के पीछे की कहानी कुछ इस प्रकार है कि यहाँ नेवल के राजा को स्वप्न में आकर पंचमुखी शिवलिंग (Panchmukhi Shivling), नंदी (Nandi) और नवग्रह बनाने का आदेश दिया था। स्वप्न में दिए गए इस आदेश के बाद राजा ने यहाँ मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को आरंभ कराया।

जब पंचमुखी शिवलिंग (Panchmukhi Shivling), नंदी (Nandi) और नवग्रह के निर्माण की प्रक्रिया के लिए रथ में इन्हें रख नगर में प्रवेश किया जाने लगा। उसी समय रथ का पहिया जमीन में धंस गया और लाख कोशिशों के बावजूद उसे बाहर नहीं निकाला जा सका।

अंत में राजा ने हार मानकर उसी स्थान पर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीँ बात करें कि इस मंदिर को बोधेश्वर मंदिर क्यों कहा जाता है तो भगवान् शिव द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराने का बोध किये जाने के चलते बोधेश्वर महादेव मंदिर कहा गया है।

बोधेश्वर बाबा मंदिर ( Bodheshwar Baba Mandir ) 15 वीं शताब्दी की मंदिर शैली में निर्मित है। इस मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग को जिस पत्थर से बनाया गया है वह काफी दुर्लभ श्रेणी का पत्थर माना जाता है। वह पत्थर 400 साल पुराना माना जाता है जो आज के समय में नहीं पाया जाता है।  

पंचमुखी शिवलिंग के दर्शन करने हजारों की संख्या में आते हैं सांप

इस मंदिर में रात्रि के समय में हजारों की संख्या में साँपों का डेरा होता है जो केवल पंचमुखी शिवलिंग (Panchmukhi Shivling) को स्पर्श करने के उद्देश्य से यहाँ आते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि आज तक इन सर्पों में किसी स्थानीय व्यक्ति को नुक्सान नहीं पहँचाया है।  

मंदिर की खास मान्यता

इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहाँ बड़े से बड़े असाध्य रोगों से मुक्ति मिल जाती है। यहाँ आने वाले हजारों लोग विभिन असाध्य रोग से पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं जिस कारण यहाँ भक्तों का ताँता लगा रहता है।  

(यदि आप भगवान् शिव की चमत्कारी शक्तियों को महसूस करना चाहते हैं तो घर में नंदी और स्वयंभू Narmadeshwar Shivling को लाएं। इससे घर में मौजूद विभिन्न प्रकार के संकट समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति को असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।)    

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