भव्य कोर्णाक मंदिर का इतिहास और सूर्य देव की उत्पत्ति की कहानी

कोर्णाक मंदिर का निर्माण किसने और कब करवाया? ( Who built Konark Surya Temple? )


सूर्य मंदिर का इतिहास बहुत दिलचस्प है। कोर्णाक के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर का निर्माण वर्ष 1236-1264 ईसा पूर्व में गंगवंश के राजा नरसिंहदेव ने करवाया था। यह लाल रंग के बलुआ पत्थरों और काले रंग के ग्रेनाइट से बनाया गया है। इस मंदिर की निर्माण शैली कलिंग है साथ ही यह भी बताते चलें कि यहाँ सूर्य देवता को रथ पर विराजमान दिखाया गया है। फिलहाल इसमें एक घोड़ा है लेकिन पूरे मन्दिर स्थल को कुल 12 जोड़ी चक्रों के साथ 7 घोड़ों से खींचते हुए निर्मितं किया गया है।

कोणार्क के सूर्य मंदिर को ब्लैक पैगोडा क्यों कहा जाता है? ( Why is the Sun Temple called the Black Pagoda? )


समंदर में सफर करने वाले लोग इस मंदिर को ब्लैक पैगोडा के नाम से बुलाया करते थे क्योंकि यह मंदिर जहाजों को किनारे की ओर आकर्षित कर उनका भारी नाश कर दिया करता था। इस मंदिर के शिखर पर लगी चुम्बक कोर्णाक से गुजरने वाले सभी जहाजों को अपनी ओर खींचती थी।

यह आकर्षण इतना अधिक होता था कि सभी जहाज खुद ब खुद मंदिर की तरफ खींचे चले आते थे। सभी जहाज को सभी भारी क्षति होती थी लेकिन मंदिर का बाल भी बांका न हुआ। इस पत्थर के कारण सभी जहाजों का दिशा यंत्र सही ढंग से काम नहीं करता था। इस समस्या का समाधान यह निकला कि नाविक मंदिर में लगे इस पत्थर को ही निकाल कर अपने साथ ले गए।

सूर्य मंदिर में सूर्य भगवान की कितनी मूर्तियां है? ( Surya Mandir me Surya Bhagwan ki kitni murtiyan? )


कोर्णाक में अवस्थित भव्य सूर्य मंदिर में भगवान सूर्य देव की तीन मूर्तियों को स्थापित किया गया है।

सूर्य मंदिर कौन से राज्य में है? ( Surya Mandir kaun se rajya me hai? )


सूर्य का सर्वप्रसिद्ध कोर्णाक मंदिर उड़ीसा राज्य, पुरी में अवस्थित है।

कोणार्क क्यों प्रसिद्ध है? ( What is special about Sun Temple? )


कोर्णाक इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ पर भव्य और ऐतिहासिक सूर्य मंदिर मौजूद है। यह स्थान अपने साथ कई रहस्यों को समेटे हुए है। इस मंदिर की प्रसिद्धता के कारण ही इसे UNESCO ने अपनी विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया है।

कोणार्क सूर्य मंदिर के रथ मे कितने घोड़े है? ( Kornak Surya Mandir ke rath me kitne ghode hai? )


भव्य सूर्य मन्दिर को कुल 12 जोड़ी चक्रों के साथ 7 घोड़ों से खींचते हुये निर्मित किया गया है जिसमें सूर्य देवता विराजमान हैं।

कोणार्क मंदिर में पूजा क्यों नहीं होती? ( Kornak Mandir me puja kyon nahi hoti? )


कोर्णाक शहर में स्थित सूर्य मंदिर में पूजा नहीं होती है। ऐसा कहा जाता है कि मंदिर के प्रमुख वास्तुकार के बेटे ने इस मंदिर के अंदर आत्महत्या कर ली थी। इसी घटना के बाद से ही इस मंदिर में हर प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। यही वजह है आज तक इस मंदिर में पूजा अर्चना नहीं की गई।

सूर्य किसका प्रतीक है? ( What does Surya represent? )


सूर्य ऊर्जा का प्रतीक है क्योंकि सूर्य के भीतर इतना तेज मौजूद है जो पूरी सृष्टि का नाश कर सकता है। वहीँ इसका सकारात्मक पहलु यह कि यह हमें बहुत सारी बिमारियों से रक्षा करता है। वैज्ञानिक तकनीकों में इसका प्रयोग किया जाता है। सौर ऊर्जा इसका सबसे बड़ा उदहारण है।

ऋग्वेद में सूर्य देवता किसका पुत्र माना गया है? ( Rigveda me Surya devta kiska putra mana gaya hai? )


ऋग्वेद में सूर्य देव के पिता महर्षि कश्यप है और माता अदिति हैं जिसके कारण इन्हें आदित्य भी कहा गया है।

सूर्य देव की उत्पत्ति कैसे हुई? ( How was Lord Surya Born? )


जब ब्रह्मा के मुख से ॐ शब्द का प्राकट्य हुआ तब सूर्य सूक्ष्म रूप निर्मित हुआ इसके बाद भूः भुव तथा स्व शब्द निकले। इस तरह से सूर्य देव की उत्पत्ति ब्रह्मा के मुख से हुई है।

सूर्य देव का मंत्र क्या है? ( Surya Dev ka mantra kya hai? )


Surya Mantra : ”ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।”

उदय होते हुए सूर्य को देखने का क्या लाभ है? ( Uday hote hue Surya ko dekhne ka kya laabh hai? )


सूर्य अकेले ऐसे देवता हैं जो संसार में प्रत्यक्ष रूप से विद्यमान है। सूर्य देवता को उदित होते हुए देखने से आँखों की रौशनी बढ़ती है। आँखों से संबंधित रोग समाप्त होते हैं, अवसाद से जुड़ी समस्या से मुक्ति मिलती है, हड्डियों से जुड़े रोग नहीं होते।

सूर्यदेव के रथ के सारथी का नाम क्या है? ( Suryadev ke rath ke saarthi ka naam kya hai? )


सूर्य देव के रथ के सारथी का नाम अरुण है। बताते चलें कि अरुण भगवान विष्णु की सवारी गरुड़ के बड़े भाई हैं।

सूर्य भगवान की कितनी पत्नियां थीं? ( Surya Bhagwan ki kitni patniyan thi? )


वैसे तो सूर्य देव की पत्नी का नाम संज्ञा है जो राजा विश्वकर्मा की पुत्री थीं लेकिन संज्ञा सूर्य के तेज से भय खाने के चलते अपनी छाया को छोड़कर चली गईं थी। इस प्रकार सूर्य देव की 2 पत्नियां थीं संज्ञा और छाया।

सूर्य में कितनी पृथ्वी समा सकती है? ( Surya me kitni prithvi sama sakti hai? )


सूर्य पृथ्वी से इतना दूर है कि लोग इसकी शक्ति का अंदाज़ा ही नहीं लगा पाते। एक अध्ययन की मानें तो सूर्य पृथ्वी से इतना बड़ा है कि इसके जैसी 110 पृथ्वी समा जाएं।

सूर्य भगवान को नारायण क्यों कहते हैं? ( Surya Bhagwan ko Narayan kyon kehate hai? )


जगत को प्रकाशमय बनाने के लिए भगवान नारायण ने सूर्य के रूप में अवतार लिया था इसलिए सूर्य भगवान को सूर्य नारायण कहा जाता है। 

सूर्य देव की कृपा कैसे पाएं? ( How to get blessings of Lord Surya? )


सूर्य भगवान की महिमा के बारे में तो सभी भली भांति परिचित हैं। उनके होने से ही इस संसार में प्रकाश विद्यमान है। जैसा कि पहले ही बताया जा चुका है कि सूर्य देव एकमात्र ऐसे देवता हैं जो प्रत्यक्ष रूप से सभी के बीच मौजूद है। उनकी कृपा से न जानें कितनी ही बिमारियों पर पूर्ण विराम लग जाया करता है। सूर्य देव के वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों ही तरह के लाभ हैं।

जहाँ एक तरफ सूर्य की किरणें व्यक्ति को हड्डियों और आँखों और त्वचा से संबंधित रोगों से मुक्ति दिलाती हैं वहीँ सूर्य कवच या कवच रूपी लॉकेट में कई ऐसी अलौकिक शक्तियां समाहित है जो भीतर के सभी आंतरिक कलह को दूर करती है। सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाती है। साथ ही व्यक्ति की कुंडली में मौजूद विभिन्न प्रकार के वास्तु दोष की समाप्ति भी होती है।

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