Sakat Chauth 2022: सकट चौथ व्रत कथा, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

सकट चौथ व्रत का महत्व ( Sakat Chauth Vrat ka mahatva )

हिंदू पंचांग के हिसाब से तो हर महीने दो बार चतुर्थी आती है जो भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती हैं। परंतु माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को इन चतुर्थियों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, इसे ही सकट चौथ, तिलकुटा चौथ, तिलकुट चतुर्थ, माघी चतुर्थ जैसे अन्य नामों से जाना जाता है। बता दें कि माघ मास की इस चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को गुड़ और तिल से बने लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।

सकट चौथ पूजा विधि  ( Sakat Chauth pooja Vidhi )

1. प्रातःकाल स्नानादि से निवृत होकर स्वच्छ लाल वस्त्र पहने।   
2. फिर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश जी, माता लक्ष्मी की प्रतिमा को रखें।  

3. एक कलश में जल भरकर रखें फिर गणेश जी, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा आरम्भ करें।  

4. भगवान को पुष्प, फल और नैवैद्य अर्पित करें।   

5. फिर घी का दीपक और धूप जलाएं।

6. अब भगवान गणेश मंत्र का जाप करते हुए उन्हें 21 दुर्वा अर्पित करें।

7. इसके बाद संध्या के समय चंद्र देव को अर्घ्य दें और फिर फलाहार या सात्विक भोजन लेकर व्रत खोलें।

8. सकट चतुर्थी के दिन घर में Crystal Ganesh Pyramid स्थापित करें। आपके घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहेगी।  

सकट चौथ व्रत कथा ( Sakat Chauth Vrat Katha  )

Sakat Chauth ki Katha कुछ इस प्रकार है कि एक बार एक नगर में साहूकार और साहुकारनी रहा करती थी। दोनों को धार्मिक कार्यों, दान पुण्य या सामाजिक कार्यों में कोई दिलचस्पी नहीं थी। वे निःसंतान थे यही उनकी सबसे बड़ी चिंता थी। एक बार सकट चौथ के दिन उनकी पड़ोसन पूजा अर्चना कर रही थी। साहुकारनी ने पड़ोसन को पूजा करते देखा तो पूछने लगी कि आखिर तुम यह क्या कर रही हो? पड़ोसन ने कहा कि आज सकट चौथ है और मैं इसकी पूजा कर रही हूं। फिर साहुकारनी ने पूछा कि Sakat Chauth का व्रत और पूजा से क्या लाभ होता है?

पड़ोसन ने कहा कि इस व्रत से धन, वैभव, सुहाग की दीर्घायु और संतान की प्राप्ति होती है। पड़ोसन की बात सुनकर सहुकारनी बोली कि अगर मेरी संतान हुई तो जरूर Sakat chauth का व्रत रखूंगी और सवा सेर तिलकुट करूंगी। साहुकारनी के मुख से निकले उन वचनों पर तो मानो देवी सरस्वती विराजमान थीं। भगवान गणेश ने साहुकारनी की मनोकामना सुन ली और वह गर्भवती हो गई।

गर्भवती होने पर साहुकारनी बोली कि अगर मेरे पुत्र हुआ तो मैं ढाई सेर तिलकुट करूंगी। इसके बाद साहुकारनी के पुत्र हुआ। अब साहुकारनी ने कहा कि मेरे पुत्र का विवाह भली प्रकार तय हो जाए तो मैं पांच सेर तिलकुट करूंगी। इसपर भगवान गणेश ने यह मुराद भी सुनी और अब पुत्र का विवाह भी तय हो गया। साहुकारनी ने जो भी मुराद मांगी थी वह सब पूर्ण हुई पर उसने तिलकुट नहीं किया। इससे सकट अत्यधिक नाराज हो गए और उन्होंने क्रोध दिखाना शुरू किया।

जब साहुकारनी का पुत्र विवाह में फेरे ले रहा था तब उसे फेरे के बीच में से उठाकर पीपल के पेड़ पर बिठा दिया। सब लोग वर को इधर – उधर ढूंढने लगे। जब वर नहीं मिला तो सब लोग निराश होकर घर की ओर चले गए। जिस कन्या से साहूकारनी के बेटे का विवाह होने वाला था वह एक दिन सहेलियों संग गणगौर पूजा के लिए जंगल में दूब लेने के उद्देश्य से गई। तब उसने वहां पीपल के पेड़ से आवाज सुनी कि ओ मेरी अर्धब्याही…… उस कन्या ने जैसे ही यह सुना वह काफी डर गई और वहां से भागते हुए अपने घर पहुंची।

घर पहुंचकर उस लड़की ने सारी बात अपनी मां को बताई। तब मां अपनी बेटी की बात सुनकर पीपल के पेड़ के निकट पहुंची। लड़की की मां देखती है कि पीपल के पेड़ पर वह लड़का बैठा है जिससे उसकी बेटी का विवाह होने वाला था। लड़की की मां जमाई से बोली कि मेरी बेटी को अर्धब्याहा कर यहां क्यों बैठे हो? अब क्या चाहते हो हमसे ? इस पर साहूकारनी का पुत्र बोला कि मेरी मां ने चौथ का तिलकुट बोला रखा था, जिसे उन्होंने अभी तक नहीं किया।

मां की वजह से सकट देवता काफी नाराज हुए और उन्होंने मुझे यहां पीपल के पेड़ पर बैठा दिया। ये बात सुनकर लड़की की मां दौड़ी – दौड़ी साहूकारनी के घर पहुंची और उससे सकट चौथ के बारे में पूछा। इसपर साहूकारनी बोली हां मैंने पांच सेर तिलकुट बोला रखा था। एक बार फिर साहूकारनी ने कहा हे सकट चौथ महाराज ! अगर मेरा बेटा सही सलामत घर वापस आ जाए, तो मैं अब पांच सेर नहीं बल्कि ढाई मन का तिलकुट करूंगी। अबकी बार फिर भगवान गणेश ने उसे मौका दिया और उसके बेटे को सही सलामत घर वापस भेज दिया। बेटे के घर लौटने के बाद उसका धूमधाम से विवाह रचाया गया।
 
जब साहूकारनी के बेटे और बहू घर आ गए तब साहूकारनी ने अपने कहे अनुसार ढाई मन तिलकुट किया और बोली है सकट महाराज! आपकी कृपा से मेरे बेटे पर आया संकट दूर हुआ, उसका विवाह संपन्न हुआ और बेटा व बहू सकुशल घर पर भी आ गए हैं। मैं आपकी महिमा को भली भांति समझ चुकी हूं। अब से मैं हमेशा तिलकुट करके सकट चौथ का व्रत का पालन करूंगी। सकट चौथ की कहानी यह बताती है कि जो भी सच्चे मन से भगवान गणेश का व्रत तथा पूजन करता है और sakat chauth katha का पाठ करता है, उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण होती है।

सकट चतुर्थी का व्रत कब किया जाता है? ( Sakat Chaturthi ka Vrat kab kiya jata hai? )

सकट चतुर्थी का व्रत माघ मास में कृष्णा पक्ष की तिथि को रखा जाता है। बताते चलें कि माघ मास की कृष्ण पक्ष तिथि को आने वाली चतुर्थी का अपना अलग महत्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से कार्यों और मार्गों में आने वाले सभी विघ्न दूर हो जाते हैं।

सकट चौथ के व्रत में क्या खाना चाहिए? ( Sakat Chauth ke Vrat me kya khana chahiye? )

दिनभर अन्न ग्रहण न कर केवल फलाहार ही करना चाहिए और एक ही बार सात्विक भोजन ग्रहण करें। व्रत के खाने में सिंघाड़े का आटा, कुटु का आटा, साबूदाना आदि शामिल किया जा सकता है।  

सकट चतुर्थी का व्रत 2022 में कब है? ( Sakat Chaturthi ka Vrat 2022 me kab hai? )

इस वर्ष Sakat Chauth का पर्व 21 जनवरी 2022 को शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।

Sakat Chauth 2022 Date

शुक्रवार, जनवरी 21, 2022
माघ मास, कृष्ण पक्ष चतुर्थी

चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – जनवरी 21, 2022 सुबह 08:51 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – जनवरी 22, 2022 को सुबह 09:14 बजे
सकट चौथ चन्द्रोदय समय – रात्रि 09:00 बजे

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