इन 2 चीज़ो का दान भूल से भी ना करे वरना गरीबी और दरिद्रता गले पड़ जाती है

दान करना इसलिए जरूरी है क्योकि हम अपने जिंदगी में जाने अनजाने में जो पाप करते है उन के दुष्प्रभाव से हमे मुक्ति मिले. आपने देखा होगा की कभी अचानक आपके जिंदगी में अचानक दुःख आ जाता है ऐसा हमारे उन पापो के परिणाम स्वरूप ही होता है . तभी तो कहा गया है की मनुष्य को अच्छे व बुरे कर्म का फल इसी जिंदगी में मिलता है. और इन पापो के दुष्परिणाम को काम करना का सबसे उत्तम मार्ग है दान. परन्तु क्या आपने कभी सोचा ही की आप जो दान कर रहे है क्या उसका फल आपको अच्छा ही मिलेगा ? आज हम आपको 8 ऐसे दानो के संबंध में बताएंगे जिन्हे आप भूल से भी ना करे अन्यथा दान का पुण्य तो आपको मिलेगा नहीं उल्टा उसका विपरीत परिणाम आपको भुगतना पड़ सकता है.

अक्सर क्या होता है की कुछ खाने की वस्तु जो बासी हो जाती है परन्तु हमे लगता है की ये अभी भी खाने लायक है और हम उसे गाय को दे देते है या फिर हमारे घर पर आये किसी गरीब को जो की सही नहीं है. शास्त्रों में बासी खाने का दान महापाप बताया गया है. बासी खाने के दान से हमें पुण्य नहीं पाप की प्राप्ति होती है. बासी खाने का दान आपके परिवार में बिमारी लेकर आता है. यहाँ तक विज्ञानं ने भी इस तर्क को बिलकुल सही बताया है. दरअसल दोस्तों ऐसा माना जाता है की खाने की चीज़े लगभग 2 घंटे के बाद से ही बासी होने लगती है और उनमे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो बाद में फ़ूड पोइजन का काम करते है. ऐसे में आप यदि किसी को भी बासी खाना दान कर रहे है तो आप उनका भला नहीं उन्हें नुकसान पहुंचा रहे है. इसलिए बासी खाना कभी दान ना करे .

झाड़ू का दान करना भी शास्त्रों में मनाही है. अक्सर लोग मंदिर में झाड़ू का दान कर देते है ताकि उस मंदिर में साफ़ सफाई का प्रबंध सही रहे. परन्तु इसकी जगह आप झाड़ू खरीदने के लिए मंदिर के पुजारी को धन दे तो वह ज्यादा सही रहेगा. इसके आलावा कभी अपने घर का झाड़ू किसी पड़ोसी या अन्य व्यक्ति को प्रयोग करने के लिए ना दे भले ही कुछ मिंटो के लिए वह आपसे झाड़ू मांगे. ऐसा इसलिए है क्योकि शास्त्र में झाड़ू को घर की लक्ष्मी की उपाधि दी गयी है. जब हम झाड़ू को दान करते है तो हम अपने घर की लक्ष्मी दूसरी व्यक्ति को सोप रहे है ऐसा माना जाता है. जिस कारण आपको धन की कमी और गरीबी का समाना करना पड़ता है. क्योकि आपके घर की लक्ष्मी तो किसी और की हो चुकी है इसलिए भूल से कभी झाड़ू का दान आप ना करे.

स्टिल के बर्तनो का दान करना शास्त्रों में वर्जित है इसके जगह आप कांस्य के बर्तन दान कर सकते है. स्टिल के बर्तनो का दान आपके सम्मान इज्जत में कमी लाता है. क्योकि यह अनेक धातुओं के मिश्रण से बना होता जिनमे कुछ अशुद्ध धातुवे भी सम्लित है जिन्हे दान के कार्यो में सम्मलित नहीं क्या जा सकता है. यह आपके कुंडली में सूर्य की स्थिति को प्रभावित करता है जो की आपके लिए अपयश यानी की आपके सम्मान में कमी लता है. इसलिए भूल से भी स्टील के बर्तनो का दान आप ना करे. इसी प्रकार प्लास्टिक भी एक अपवित्र धातु मानी गयी है. इसको खुद के प्रयोग के लिए तो आप खरीद ले परन्तु इसका दान करना ना केवल घर परिवार की उन्नति बल्कि कारोबार में भी हानि लेकर आता है. इसलिए तो पवित्र गंगा जल को भी प्लास्टिक में नहीं रखा जाता है.

शिक्षा से संबंधित समान, जैसे कॉपी , किताब तथा धर्मिक ग्रंथो का दान यदि आप करते है तो यह बहुत ही पुण्य दायी माना गया है परन्तु अगर यह बहुत ही पुरानी एवं जर्जर स्थिति में हो जैसे की इसके कुछ पेज ही फ़टे हो तो उसे स्थिति में यदि आप इन चीज़ो का दान करे तो आपके ज्ञान का क्षय होता है यानी यह आपके बुद्धि को कम करता है तथा माता सरस्वती का भी ऐसा करने से अपमान माना जाता है. क्योकि दोस्तों आप दूसरे व्यक्ति को आधा अधूरा ज्ञान प्रदान करवा रहे है.

तेल का दान करने से शनि की स्थिति आपके कुंडली में सही होती है. तथा यदि शनि की कोई बुरी दशा आप पर चल रही यही तो उससे भी छुटकारा मिलता है परन्तु वही यदि आप खराब तेल या फिर ऐसा तेल जिसका आप प्रयोग करे हो और उसे आप दान में दे रहे हो तो ऐसे तेल का दान शास्त्रों में वर्जित है. अक्सर घर की स्त्रियाँ जो घर में खाना बनाने के लिए अपने तेल खरीदा था उसी तेल में से आप तेल का दान कर देती है जो की शनि देव को क्रोधित करता है और आपके घर में कलेश लड़ाई झग़डे का मुख्य कारण बनता है. ध्यान रखे हमेसा या तो आप नया तेल खरीद कर दान करे या फिर पूजा के लिए जो आपने अलग से तेल रखा है केवल उसे ही दान करने के लिए प्रयोग में लेकर आये.

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