Shardiya Navratri 2022 शारदीय नवरात्री जानिए तारीख कब है महाष्टमी और नवमी

 हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल शारदीय नवरात्री की शुरुवात 26 सितम्बर से लेकर 5 अक्टूबर तक मनाई जाएगी. अश्विन मास के अमावस्या के साथ पितृपक्ष खत्म हो जायेगा और इसी के साथ नवरात्री की शुरुवात हो जाएगी. नवरात्री को नवदुर्गा के नामसे भी जाना जाता है.  नवरात्री में 9 दिन 9 अलग अलग देवियो की पूजा की जाती है और १० वे दिन दशमी बनाई जाती है . तिथि के घटने बढ़ने के अनुसार नवरात्री में  अष्टमी और नवमी भी आगे पीछे होती रहती है।

शारदीय नवरात्रि का महत्व [Shardiya navratri 2022 importance ]

 नवरात्र का त्योहार हिंदू धर्म के सभी त्योहारों से भिन्न है क्योंकि  नवरात्र का पर्व नारी शक्ति का प्रतीक देवी दुर्गा का समर्पित है। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयतेयानी “सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ/ देवी तुम स्थित हो”.

ऐसे में  नवरात्र का यह पर्व हमें इस बात का एहसास दिलाता है की हर बुराई पर अच्छाई की जीत होती है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्ही 9 दिनों में माँ दुर्गा धरती पर आती है और धरती को उनका मायका कहा जाता है और इसी आगमन में नवरात्री को बहुत धूम धाम से मान्य जाता है .

नवरात्री में कैसे करते है माता चौकी की स्थापना / देवी पूजन की सही और सही विधि

नवरात्री की पूजा पूरी विधि विधान से की जाये तो माँ दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होती है. नवरात्री के ९ दिनों में इन खास बातो का हमेशा रखे ध्यान – १- नवरात्रि के पहले दिन ९ दिनों के उपवास का स्नाकल्प ले .

और कलश स्थापना करने के बाद देवी के इस स्वरूप की पूजा करें। सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें.और पूजा स्थल पर लाल कपडा रखे। हो सके तो किसी ब्रह्मण को इसके लिए बुलाये।

२- इन दिनों घर की सफाई का पूरी तरह ध्यान रखे .पुरे घर में गंगाजल और गोमूत्र का छिड़काव करे . उसके बाद फूल , अक्षत , चन्दन , कुमकुम, रोली से और र मिठाई का भोग लगाकर   देवी माँ क पूजा आरती  करे . और घी का दीपक जलाये ध्यान रखे ९ दिनों तक ये दीपक बुझ न पाए।   इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा स्तुति करें। और इस मंत्र के उच्चारण करे

 या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

देवी के  पाठ स्तुति करने के बाद दुर्गाजी की आरती करके प्रसाद वितरित करें। – नवरात्री के ९ दिन और ९ देवी के रूप , और उनके बीज मंत्र  /

शुभ रंग

 नौ दिनों तक Devi Durga के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है .नौ दिनों तक Devi दुर्गा 9  अलग-अलग रूपों की पूजा होती है, देवी के नौ रूप अलग अलग शक्तियों को दर्शाते हैं. आईये जानते है देवी के 9 रूप उनके मंत्र और खास रंग

  नवरात्रो मे क्या करे और क्या न करे

क्या करे :-

-नवरात्रि पर अगर आप 9 दिन के लिए व्रत न रख सकें तो नवरात्रि के पहले और अंतिम दिन व्रत रखें और मां की पूजा-अर्चना करें. मान्‍यता है कि इससे जीवन में सफलता मिलती है.

-इन 9 दिनों में घर की साफ-सफाई का पूरा ध्‍यान रखना चाहिए.

-नवरात्रि पर कन्या भोजन जरूर कराएं. मान्‍यता है कि इससे घर में अन्न की कमी नहीं होती.

-धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए. साथ ही लहसुन, प्याज और मदिरा के सेवन से भी दूरी बनाकर रखें.

-नवरात्रि पर पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था करनी चाहिए. -घर आए अतिथि और भिक्षा के लिए आए व्‍यक्ति को आदर के

साथ भोजन कराएं. इससे मां भगवती प्रसन्न होती हैं और भक्‍तों पर कृपा करती हैं

नवरात्र में क्या करे क्या न करे

-व्रत रखने वालों को दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं कटवाने चाहिए।

-नौ दिनों तक नाखून नहीं काटने चाहिए।

-अगर अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इन दिनों घर खाली छोड़कर नहीं जाएं।

-खाने में प्याज, लहसुन और तामसिक न खाएं।

-नवरात्रि के दौरान व्रत करने वालों को दिन में नहीं सोना चाहिए।

– नवरात्रि में चमड़े से बनी किसी भी चीज का प्रयोग न करें।

-नवरात्रि के उपवास में अनाज और नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। हालांकि कई लोग व्रत में सेंधा नमक का सेवन करते हैं।

 इन 9 दिनों में  फलाहार भोजन  करें . और  सुबह पूजा अर्चणा करने के बाद दिन भर माँ देवी का ध्यान करे और शाम में पूजा अर्चना करने के बाद  फलाहार करे या एक वक़्त का भोजन भी कर सकते है . ध्यान रखे इन दिनों तामसिक भोजन न करें यानि इन 9 दिनों में प्याज , लहसुन और मांस का सेवन नहीं कारण चाहिए .

नवरात्री से जुडी पौराणिक कथा / नवरात्री का इतिहास

Navratri Saal me do Baar शारदीय नवरात्रि असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है. इससे जुड़ा इतिहास  के अनुसार मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस का वध किया था . जिसने ब्रह्मा जी को अपने तपस्या से प्रसन्न किया था. महिषासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था की उसे कोई देव दानव और राक्षस उसका वध ना कर सके।  और इसलिए ब्रह्मा जी ने इस एक शर्त पर महिसासुर को अमरता का वरदान दिया था . की उसका वध केवल एक स्त्री कर सकती है।  अमरता  वरदान के कारणवश महिसासुर ने तीनो लोक – पृथ्वी , स्वर्ग ,नरक पर हमला किया।  और महिसासुर से भयभीत होकर सभी देवताओ ने ब्रह्मा , विष्णु , महेश से मदद की प्रार्थना की।

महिषासुर का अंत

उन सभी असहाय देवताओ को देख के भगवान् विष्णु ने महिला बनाने  का निर्यण लिया चुकि महिसासुर का वध एक महिला ही कर कर सकती थी . तब भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा ने महिषासुर के विनाश  करने के लिए भगवान विष्णु द्वारा बनाई गई महिला में अपनी सारी शक्तियां एक साथ रख दीं। जिससे नवदुर्गा का रूप लिया .तब भगवान शिव और भगवान ब्रह्मा ने महिषासुर को नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु द्वारा बनाई गई महिला में अपनी सारी शक्तियां एक साथ रख दीं। और उन्होंने देवी दुर्गा का जन्म हुवा। मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक घमासान युद्ध चला और दसवे दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था.

और माना जाता है की देवी दुर्गा माता पार्वती का अवतार है जो शिव जी की पत्नी है।

नवरात्रि मे कन्या पूजन की विधि / कन्या पूजन कैसे करे ?

मां भवानी कन्याओं के रूप में आशीर्वाद देने आपके घर आती हैं . कन्या पूजन करके नवरात्रि व्रत का विधिवत पारण किया जाता है। जो भक्त नवरात्र में कन्या पूजन करता है उस पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बरसती है। कन्या पूजन अक्सर महाष्टमी और महानवमी तिथि पर किया जाता है।
* नवमी तिथि के दिन कन्या पूजन से पहले घर को स्वच्छ कर लेना जरूरी है पहले घर का माहौल साफ-सुथरा कल लेना चाहिए तभी कन्या पूजन का फल मिलता है।
* कन्या पूजन में 9 कन्याओं के साथ एक बालक का पूजन करना उत्तम माना गया है। लेकिन अगर संभव नहीं हो तो कम से कम दो कन्याओं को जरूर भोजन कराएं।
* कन्याओं और बालक के पैर दूध या फिर पानी से अपने हाथों से साफ करें क्योंकि स्वयं देवी मां की सेवा मानी जाती है                        
* इसके बाद उनके पैर छूकर उनको साफ स्थान पर बैठाएं और फिर माथे पर अक्षत, फूल, कुमकुम का तिलक लगाएं।
*  कन्याओं को खीर-पूड़ी, हलवा-चना इत्यादि खिलाएं और इसके बाद उनको दान में रूमाल, लाल चुनरी, फल, खिलौने आदि भेंट स्वरूप दें और उनके चरण छूकर आशीर्वाद लें। इसके बाद उनको खुशी-खुशी विदा करें।
* इस प्रकार पूजा करने के बाद दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन कर देना चाहिए, लेकिन जवारों को फेंकना नहीं चाहिए। उसको परिवार में बांटकर सेवन करना चाहिए।

FAQs

नवरात्री कब से शुरू हो रहे है /When is it Nvaratri Starting in 2022?

इस साल नवरात्री की शुरुवात 26 sepetember से हो रही है जो     4 october तक है और 5 अक्टूबर को विजयदशमी मनाई जाएगी .
नवरात्रि करने से क्या लाभ होता है?/ What are the Benefits of Navratri ?
नवरात्री में रखे गए व्रत का कई गुना ज्यादा फल मिलता है .  माँ दुर्गा  की उन पर विशेष कृपा बनी रहती है .व्यकित की इन दिनों भगवान के प्रति श्रद्धा और आस्था बनी रहती है नवरात्री के ये 9 दिन बहुत पावन  होते है . इसके साथ ही सुख है समृद्धि आती है

नवरात्रि 2022 अष्टमी कब है?/  When is Navratri 2022 Ashtmi?

राम नवमी के एक दिन पहले अष्टमी मनाई जाती है. इस बार शारदीय नवरात्री २६ सितम्बर से ४ अक्टूबर तक है तो इस साल नवरात्री  पर एक भी तिथि का क्षय न होने के कारण नवरात्रि नौ दिनों की पड़ रही है। जिसके कारण इस साल अष्टमी ३ अक्टूबर  को मनाई जाएगी।
शारदीय नवरात्रि क्यों मनाया जाता है?/ Why is  celebrated Shardiya Navratri ?
देवी दुर्गा ने आश्विन के महीने में महिसासुर के साथ 9 दिनों तक लगातार युद्ध किया और दसवे दिन  उसका वध किया.  इसलिए इस पर्व को 9 दिनों तक मनाया जाता है.
नवरात्रि का मतलब क्या होता है? / What is the meaning of Navratri ?

नवरात्रि एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘नौ रातें’। इन नौ रातों और दस दिनों के दौरान,शक्ति / देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। दसवाँ दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। नवरात्रि वर्ष में चार बार आता है।

    नवरात्रि साल में 2 बार क्यों मनाते हैं? / Why Navratri is celebrated twice a year?
धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रीराम ने रावण के साथ युद्ध पर जाने से पूर्व अपनी विजय की मनोकामना मानते हुए मां के आशीर्वाद लेने के लिए विशाल पूजा का आयोजन करवाया था। कहा जाता है कि राम देवी के आर्शीवाद के लिए इतना इतंजार नहीं करना चाहते थे और तब से ही प्रतिवर्ष दो बार नवरात्रि का आयोजन होता है।

      क्या है नवरात्रि का वैज्ञानिक महत्व? / What is the scientific significance of Navratri?
नवरात्र मनाने का वैज्ञानिक महत्व भी है। वर्ष के दोनों प्रमुख नवरात्र प्रायः ऋतु संधिकाल में या दो ऋतुओं के सम्मिलिन में मनाए जाते हैं। जब ऋतुओं का सम्मिलन होता है तो आमतौर पर शरीर में वात, पित्त, कफ का समायोजन घट बढ़ जाता है। इससे रोग प्रतिरोध क्षमता कम हो जाती है।

   नवरात्रों में क्या क्या खा सकते हैं? / What can eat during Navratras?

Navratri Vrat में लौकी, आलू ,शकरकंद ,कद्दू, गाजर, कच्चा केला ,खीरा और टमाटर का सेवन कर सकते हैं l. व्रत में आप दही का इस्तेमाल भी कर सकते हैं l आप अपने स्वाद के अनुसार दही को मीठी वा नमकीन इस्तेमाल कर सकते हैं .आप अधिक से अधिक फलों का सेवन कर सकते है . यदि आपने Navratri उपवास रखे है ,तो आप सिर्फ अरारोट का आटा ,साबूदाना आटा , कूटू का आटा, राजगिरा आटा ,समक के चावल या फिर सिंघाड़े के आटे का ही इस्तेमाल करें l

 

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नर्मदेश्वर शिवलिंग Narmadeshwar Shivling क्या है

नर्मदेश्वर शिवलिंग Narmadeshwar Shivling क्या है

दोस्तों आज मै आपको बताने जा रहा हूँ की नर्मदेश्वर शिवलिंग Narmadeshwar Shivling क्या है इसके फायदे ,लाभ, और पहचान आदि। तो आप इस ब्लॉग को पूरा पढ़े

यह कुछ प्रसिद्ध शिवलिंगो में से एक है। इस शिवलिंग को ‘बाणलिंग’ शिवलिंग के नाम से भी जाना जाता है। इस शिवलिंग के नाम के पीछे यह कारण बताया है की यह नर्मदा नदी के किनारे पाया जाता है। जिसके चलते ही इसका नाम नर्मदेश्वर शिवलिंग पड़ गया।

हमारे धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार मां नर्मदा को यह वरदान प्राप्त है कि इनकी नदी का किसी भी प्रकार का पत्थर शिवलिंग के रूप में ही विश्वभर में पूजा जाएगा। यहीं कारण है की नर्मदा नदी का हर पत्थर नर्मदेश्वर शिवलिंग के रूप में ही माना जाता है।

क्यों माना जाता है नर्मदेश्वर शिवलिंग को सर्वाधिक शक्तिशाली और पवित्र ?

नर्मदा नदी से निकलने वाले शिवलिंग को नर्मदेश्वर कहते है . – नर्मदा नदी को शिव के वरदान के कारण इससे प्राप्त होने वाले शिवलिंग को इतना ज्यादा पवित्र माना जाता है की नर्मदा नदी का कण-कण शिव माना जाता है.

जानिए नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा करने के क्या लाभ है

हिन्दू धर्म में शिवलिंग की पूजा का बहुत ही विशेष महत्व बताया जाता है। शिवलिंग की पूजा आप अपने घर के आस पास के किसी मंदिर में जाकर कर सकते है, इसके अलावा आप शिवलिंग को अपने पूजा घर में भी स्थापित कर सकते है। घर में शिवलिंग होने से ना सिर्फ सकारत्मक वातावरण रहता है बल्कि सुख और शांति का भी संचार होता है।

वैसे तो शिवलिंग के बहुत से प्रकार पाएं जाते है लेकिन आज हम जिस शिवलिंग के बारे में जानकारी देने जा रहे है वो है – नर्मदेश्वर शिवलिंग। इस जानकारी में हम आपको बताएंगे कि क्यों आपको अपने घर में यह स्थापित करने चाहिए और इसके क्या फायदे हो सकते है। आइये जानते है क्या है नर्मदेश्वर शिवलिंग और इसके फायदे।

Narmadeshwar Shivling With Stone Base
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नर्मदेश्वर शिवलिंग Narmadeshwar Shivling के लाभ

1 घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना से आप किसी भी प्रकार के भय से मुक्ति पा सकते है। इसके साथ ही यह आपको आत्मविश्वास हासिल कराने में भी बहुत मददगार साबित होता है।
2 हर रोज इस शिवलिंग कि पूजा करने से सभी प्रकार के रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही यह परिवारजनों पर आने वाले सभी
संकटों को भी टाल देता है।
3 यदि आप किसी काम के लिए बहुत अधिक प्रयास कर रहे है लेकिन किसी कारण से आपको सफलता नहीं मिल रही है तो इस स्थिति में
नर्मदेश्वर शिवलिंग की पूजा बहुत ही असरदार होती है। नर्मदेश्वर शिवलिंग भागोदय में भी कल्याणकारी साबित होता है।
4 नर्मदेश्वर शिवलिंग की प्रतिदिन पूजा करने से घर में सुख- समृद्धि के साथ शांति का भी वास होता है। माना जाता है की इसकी पूजा करने
से धन, वैभव, ज्ञान ओर ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
5 नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना करने से घर से सभी प्रकार की नेगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है। इसके अलावा यह शारीरिक कष्टों से
छुटकारा दिलाने के साथ ही मन की शांति प्रदान करने में भी असरदार साबित है।
6 नर्मदेश्वर शिवलिंग से अकाल मृत्यु की संभावना भी कम हो जाती है। वेद-पुराणों के अनुसार जिस स्थान पर नर्मदेश्वर शिवलिंग का वास
होता है, वहां काल और यम आसनी से प्रवेश नहीं करते है।

नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना के समय इन चीजों का रखें विशेष ध्यान

1 शिवलिंग की स्थापना किसी भी दिशा में की जा सकती लेकिन इनकी वेदी का मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए।
2 घर में स्थापित होने वाले शिवलिंग की ऊंचाई 6 इंच से अधिक नहीं होनी चाहिए।
3 शिवलिंग को एक बड़े पात्र में रखें और फिर पूजा-घर में स्थापित करें।
4 शिवलिंग को स्थापित करने के बाद जल और बेलपत्र आदि अर्पित करें।

असली नर्मदेश्वर शिवलिंग Narmadeshwar Shivling की पहचान क्या है

दोस्तों आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से बताने जा रहे है की नर्मदेश्वर शिवलिंग की पहचान कैसे करते है तथा नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा पाया जाता है. इसके अलावा इस टॉपिक से संबंधित अन्य और भी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले हैं. इसके लिए हमारा यह आर्टिकल लास्ट तक जरुर पढ़े.

ये है दुनिया का सबसे पवित्र शिवलिंग, ऐसे करें आराधना

नर्मदेश्वर शिवलिंग को सबसे ज्यादा सर्वाधिक शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है. आइए जानें, इसकी आराधना और स्थापना करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए

शिव जी की पूजा में शिवलिंग का विशेष महत्व है। सामान्य तौर पर ऐसा भी कहा जाता है कि बिना शिवलिंग की पूजा किए शिव जी की आराधना अधूरी रहती है। बता दें कि शिवलिंग को भगवान शिव का निराकार स्वरूप कहा गया है। ऐसे में शिव भक्तों के लिए शिवलिंग का महत्व और भी अधिक हो जाता है। इसके अलावा शिवलिंग में शिव जी और मां शक्ति दोनों का ही वास है। इस तरह से शिवलिंग की पूजा करने से शिव और मां शक्ति दोनों की ही आराधना हो जाती है। मालूम कि शिवलिंग कुछ खास प्रकार के होते हैं। इन सभी का अपना अलग-अलग महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन सभी शिवलिंगों में नर्मदेश्वर शिवलिंग को सबसे पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। आज हम आपको नर्मदेश्वर शिवलिंग के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।

बता दें कि नर्मदा नदी से निकलने वाले शिवलिंग को नर्मदेश्वर शिवलिंग कहा जाता है। दरअसल नर्मदा नदी को भगवान शिव का आशीर्वाद मिला हुआ है। इस आशीर्वाद से नर्मदा नदी का कण-कण बहुत ही पवित्र बताया गया है। इस वजह से इस नदी से निकलने वाले शिवलिंग सबसे ज्यादा पवित्र माने जाते हैं। नर्मदेश्वर शिवलिंग के बारे में कहा जाता है कि वह हमें कई तरह के भय से बचाता है। कहते हैं कि नर्मदेश्वर शिवलिंग के वास स्थान से काल और यम का भय दूर रहता है।
शिव पूजा में शिवलिंग की महत्ता को देखते हुए इसे घर और मंदिर दोनों जगहों पर स्थापित किया जाता है। इसे इन दोनों जगहों पर स्थापित करने के अलग-अलग नियम हैं। इसमें सबसे सामान्य सी बात यह है कि शिवलिंग की वेदी का मुख उत्तर दिशा में होना चाहिए। कहा जाता है कि नर्मदेश्वर शिवलिंग की आराधना से भक्त पर शिव जी की कृपा बरसती है। नर्मदेश्वर शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय उसमें बेलपत्र भी शामिल करना चाहिए। ऐसा करने से शिव जी काफी प्रसन्न रहते हैं।

अफगानिस्तान में साक्षात प्रकट हुए महादेव, फंसे यात्रियों को 12 घंटे में दिखाया अविश्वसनीय चमत्कार

हेलो दोस्तों आपका हमारा यूट्यूब चैनल में स्वागत है। आप सभी जानते हैं कि, इन दिनों अफगानिस्तान में आतंकी मामला कितना गर्माया हुआ है कि, लोग वहां से जान बचाकर भारत वापिस लौटने की कोशिश कर रहे हैं। जी हां, वहां पर महादेव ने स्वयं अपने भक्तों की जान बचाई है। 

अफगानिस्तान मामले से आप अच्छे से रूबरू होगें, इन दिनों वहां पर लगभग 3000 हिंदु फंसे हुए हैं और अपनी जान बचाने के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं। आपने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज देखी होगी, जिसमें लोग अपनी जान बचाने के लिए पागलों की तरह हवाई जहाज पर लटकर यात्रा करने पर मजबूर है। ऐसे में उनकी जिंदगी भगवान भरोसे है। इसी दौरान एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगें, जी हां, वहां पर महादेव ने अपने भक्तों की पुकार सुनकर अद्भूत चमत्कार दिखाया है।

जिसको देखते ही आपकी भी आंखें खुली की खुली रह जाएगीं। दरअसल, अफगानिस्तान में कई हिंदु और मुस्लिम लोग अपनी जान बचाने के लिए एक ऐसी जगह पर कैद हुए हैं जहां पर महादेव का पहले से ही वास है। दरअसल, इन दिनों अफगानिस्तान का माहौल बेहद गंभीर बना हुआ है। जिसका शिकार वहां पर बसे लोग हो रहे हैं। कुछ हिंदु और कुछ मुस्लिम लोगों ने अफगानिस्तान के एक कारखाने में खुद को कैद कर लिया है और लगातार महादेव से विनती कर रहे हैं कि, जल्द से जल्द वह अफगानिस्तान छोड़कर भारत पहुंच जाएं। अपने भक्तों को परेशान देखकर महादेव ने चमत्कार दिखाया और ज़मीन में से निकलकर उनकी रक्षा की।

दरअसल, हुआ कुछ यूं कि, कारखाने के अंदर एक मशीन के नीचे से सोने की चमक जैसी रोशनी निकल रही थी। जिसको वहां कैद सुखवीर नाम के लड़के ने देखा तो उसने सभी को यह बात बताई तब अशरफ़ नाम के लड़के ने सुखवीर की मदद करके पहले मशीन हटाई फिर वहां पर छोटा सा गड्ढा था जिसमें से लगातार वह रोशनी निकल रही थी। उन्होंने  फिर गड्ढे को पूरी तरह से खोदना शुरु कर दिया। जैसे ही उन्होंने अंदर हाथ डालकर खींचा तो एक चमचमाता हुआ शिवलिंग उनके हाथ में आया, लेकिन हैरानी इस बात की थी वह शिवलिंग सोने का नहीं था, लेकिन फिर भी उसमें से ऐसी चमक आ रही थी।

यह चमत्कारी शिवलिंग जैसे ही बाहर आया तो वहां फंसे सभी लोगों का मन उनकी तरफ आर्कषित होने लगा वहां मौजूद हर व्यक्ति ने महादेव की 12 घंटे शिवलिंग के सामने बैठकर पूजा की। हिंदु की भक्ति देखकर वहां बैठे मुस्लिम लोगों ने भी पूजा-पाठ की और अगले ही दिन एयरपोर्ट से 120 लोगों को भारत लाया गया। जिसमें सारे वह लोग मौजूद थे। जिन्होंने महादेव की भक्ति की थी। वह उस शिवलिंग को लेकर भारत लौटे हैं इतना ही नहीं, वह मुस्लिम लोग भी मानते हैं कि, आज वह शिवलिंग की वजह से सही सलामत भारत वापिस आ गए हैं। अब उस शिवलिंग को कहां स्थापित करेगें ये साफ नहीं हो पाया है। 

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पहली बार इच्छाधारी नागिन का वंश आया सामने, चमत्कारी अंडे देखकर खुली रह जाएगीं आंखें

हेलो दोस्तों आपका हमारा यूट्यूब चैनल में स्वागत है। दोस्तों आज की वीडियो काफी दिलचस्प होने वाली है उसके लिए आपको हमारे साथ वीडियो के अंत तक जुड़े रहना होगा। इस वीडियो में हम बात करने वाले हैं इच्छाधारी नागिन की। जो युगों- युगों से एक रहस्य बनी हुई है। जिसके बारे में पूरी सच्चाई आजतक कोई नहीं जान पायी है। हाल ही में हमें एक ऐसी इच्छाधारी नागिन के बारे में पता चला है। जिसके बारे में जानकर आप दंग रह जाएंगें।  

यह सच्ची घटना उत्तरप्रदेश के एक छोटे से गांव में राघव नाम के लड़के के साथ घटित हुई है। जो महादेव का परम भक्त है। इसी वजह से राघव पर महादेव की असीम कृपा थी। राघव हर सोमवार को महादेव का व्रत रखता था व उनकी पूजा-पाठ करता था। कभी-कभी तो पूरा दिन राघव महादेव की भक्ति में निकाल देता था। एक बार सावन के महीने में राघव के साथ ऐसा चमत्कार हुआ जिसका जिक्र वह आजतक किसी के साथ नहीं कर सका। जी हां, इस चमत्कार को देखकर राघव की आवाज़ चली गई और वह किसी को कुछ नहीं बता पाया, लेकिन गांव का दूसरा लड़का भीम ने ये चमत्कार पेड़ के पीछे छुपकर देखा। उसने बताया कि, सावन के महीने में हमारे गांव में बहुत ही बड़ा मेला लगता था। इस दौरान काफी सपेरे आते हैं और नागों का खेल दिखाते हैं। उस दिन राघव महादेव की भक्ति दिल से करता था और सांपों और अन्य जानवरों को खाना खिलाता था। उस दिन जैसे ही राघव कुत्ते को दूध पिलाने के लिए मंदिर के बाहर गया तो वहां पर एक अजीब सा नाग जंगल की ओर जा रहा था।

जिसके पीछे-पीछे राघव जाने लगा। मैं वहां पर मंदिर के बाहर लगी टंकी से पानी भर रहा था। फिर मैं भी राघव को रोकने के लिए उसके पीछे चलने लगा, लेकिन उसको मेरी आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी। इसके बाद वह एक पत्थर के पास जाकर रूक गया वहां पर एक गड्ढा था, जिसमें से एक आधी नागिन और आधी महिला बाहर निकली। उसका रूप देखने में काफी भयावह था। उसको देखने में ऐसा लग रहा था कि, वह काफी गुस्से में है। राघव उसे देखकर डर गया और भगाने की कोशिश करने लगा तभी उस इच्छाधारी नागिन ने कहा कि, आज तो तुमने मुझे देख लिया इस जंगल में मैं काफी सालों से कैद हूं। एक सपेरे ने मुझे यहां कैद कर दिया है। मेरे साथ मेरे बच्चे भी है। अब तुम ही हमें यहां से बाहर निकलोगे। यह सुनकर राघव हैरान रह गया। फिर जैसे ही नागिन पूरी तरह गड्ढे से बाहर निकली तो उस गड्ढे में सोने की तरह चमक निकल रही थी। फिर राघव ने झांककर गड्ढे में देखा तो उसे नागिन के 3 अंडे दिखे। जोकि, सोने की तरह चमक रहे थे। यह देखकर राघव काफी हैरान रह गया और नागिन से खुद को सही सलामत यहां से भेजने की विनती करने लगा। कुछ ही देर में वहां पर एक सपेरा आया जिसने उस नागिन को कैद कर रखा था।

सपेरे ने राघव से कहा कि, यह कोई मामूली नागिन नहीं इच्छाधारी नागिन है इस जंगल में मैंने इसको छुपाकर रख रखा है। तब फिर राघव ने पूछा ये जो 3 अंडे है यह क्या है। तब सपेरे ने बताया कि, यह नागिन के अंडे है इसमें से चमत्कारी नाग वंश निकलेगा। जिसका इंतजार मुझे कई सालों से है। यह नागिन यदि यहां से जाना चाहती है तो इसको अपने बच्चे मेरे हवाले करने होगें, लेकिन नागिन नहीं मानी और बोली कि, मैं ही अपने बच्चों की रक्षा खुद करूंगी यहां से कही नहीं जाऊंगी। फिर सपेरे ने कहा कि, यदि तुम्हारी यही इच्छा है तो रहो, लेकिन यह बच्चे जब ही जन्म लेंगे मैं इनको लेने जरूर आएगा। यह कहकर सपेरा वहां से चला गया और वह इच्छाधारी नागिन रोने लगी। यह देखकर राघव काफी भावुक हुआ और सोचने लगा कि, मैं चाहकर भी इस नागिन की सहायता नहीं कर सकता। सोचते-सोचते वह जंगल से बाहर आ गया और अपनी गांव की ओर चला गया। जैसे ही वह घर पहुंचा सबको यह बात बताने लगा, लेकिन उसके गले से आवाज़ नहीं निकल रही थी, वह बोल नहीं पा रहा था। अचानक आवाज़ जाने की वजह राघव को वो नागिन ही लग रही थी। फिर वह डॉक्टर्स के पास गया वहां से भी उसको आराम नहीं लगा। फिर राघव शहर गया वहां भी उसकी आवाज़ का इलाज नहीं हुआ।आखिर में राघव को लगा अब उसकी आवाज़ कभी वापिस नहीं आएगी। ऐसे में वह निराश हो गया और गूंगा बनकर अपनी जिंदगी जी रहा है।  

आखिर क्यों रातो रात इस मशहूर सुपरस्टार ने बनवाया हनुमान मंदिर, 17 साल बाद खुला रहस्य

सफलता का मुकाम कितना भी बड़ा क्यों ना हो, लेकिन आस्था के आगे हर कोई झुक जाता है। इंसान कितनी भी बुलंदियां क्यों ना छू लें, लेकिन ईश्वर के आगे अपनी इच्छाओं के लिए झुक जाता है। एक ऐसी ही सच्ची कहानी से आज हम आपको रूबरू कराने वाले हैं। जिसमें एक सुपरस्टार किस तरह हनुमान जी कृपा पाने के लिए तमाम कोशिशें करता है। इतना ही नहीं, हनुमा्न जी उसकी मदद के लिए हमेशा तत्पर भी रहे। आईये जानते हैं आगे कि कहानी…. 

आज हमारी वीडियो के साथ जुड़े हैं साउथ के सुपरस्टार एक्शन किंग अर्जुन सरजा। जिन्होंने अपना सपना 17 साल बाद सच कर दिखाया। वैसे तो सफलता आज उनके कदम चुमती है, लेकिन आज भी उनके दिल में हनुमान जी वास करते हैं। जब ही तो 17 साल बाद उन्होंने अपने सपने को साकार किया है और चेन्नेई में इतना अद्भूत हनुमान जी का मंदिर बनवाया है। अर्जुन सरजा साउथ के जाने-माने फिल्म स्टार हैं। अर्जुन का मानना है कि, आज जितनी भी सफलता उन्हें मिली है उसके पीछे राम भक्त हनुमान जी का ही आशीर्वाद है। ऐसे में अर्जुन सरजा ने अपने बचपन से अभी तक के कई चमत्कारी अनुभव हमारे साथ साझा किया है। जी हां, अर्जुन सरजा ने बताया कि, मेरे घर में हनुमान जी की भक्ति शुरु से ही होती आई है। मेरे घरवाले और मैं प्रभू हनुमान जी को दिल से मानते है। बचपन से मेरी जिंदगी बहुत मुश्किलों भरी रही, लेकिन हर जगह हनुमान जी कृपा से वह हल भी हो गई।

एक बार मैं किसी ऐसी परेशानी से जूझझ रहा था। जिसको मैं आप सब के साथ साझा नहीं कर सकता, लेकिन उस समय में काफी परेशान था। मेरे हालत ऐसे हो गए थे कि, मुझे कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा था। फिर भी मैंने हिम्मत नहीं हारी और जाकर अपने घर के नज़दीक एक हनुमान मंदिर में जाकर बैठ गया और हनुमान जी की मूर्ति को प्यार भरी आंखों से देखने लगा और मन ही मन कहने लगा हे हनुमान जी मुझे इस समस्या से बाहर निकाल लो, ताकि मैं एक सुखी जीवन जी पाऊं। उस मंदिर में जाकर मुझे इतनी शांति मिलने लगी कि, मैं हर मंगलवार को उस मंदिर में जाता और अपने दुखों को दूर करने की अरदास लगता। करीबन 7 मंगलवार के बाद मेरी समस्या हल होना शुरु हो गई और मैं तरक्की की राह पर आगे बढ़ने लगा। काफी मशक्कत के बाद मेरी परेशानियां दूर होने लगी और मेरा एक सपना बन गया कि, मुझे एक हनुमान जी का इतना विशाल मंदिर बनवाना है जिसे देखकर हनुमान भक्त खुश हो जाएं और बजरंगबली की कृपा मुझको भी मिले।

इसी सपने के साथ मैंने फिल्मों में कदम रखा ताकि मैं अपने सपनों को एक के बाद एक पूरा कर पाऊं। शुरुआत में मेरी फिल्मों का रिस्पॉन्स अच्छा नहीं आता तो मैंने हनुमान जी के मंदिर में जाकर फिर से अपने सपनों को साकार करने की अरदास लगाई तो हनुमान जी ने मेरी विनती सुनी और एक के बाद एक एक्शन फिल्मों में काम मिलने से मुझे कामयाबी हाासिल होनी शुरु हो गई। इसी के साथ मुझे एक्शन किंग के नाम से भी जाना जाने लगा। इसी के बीच मेरे साथ एक ऐसी घटना घटी जिसको मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल सकता। इसमें भी भगवान हनुमान जी ने स्वयं मुझे बचाया। दरअसल, मुझे कभी भी कोई परेशानी आती है तो सबसे पहला स्मरण मैं हनुमान जी का करता हू्ं और आज मैं जो कुछ भी हूं हनुमान जी के बदौलत हूं, इसलिए मेरा सपना था कि, मैं हनुमान जी का मंदिर अपनी मेहनत की कमाई से बनवाऊं। मुझे आशा है कि, यह मंदिर सबको पसंद आएगा। साथ ही मेरी तरह लोगों के अंदर भी हनुमान जी को लेकर श्रद्धा जागृत होगी और उनकी सभी समस्या दूर होगी।

आपके चैनल के माध्यम से मैं बताना चाहता हूं कि, यह मंदिर मैंने नहीं बनवाया यह हनुमान जी का आर्शीवाद है जिसका लाभ हम सब मिलकर उठेगें। यह मंदिर चेन्नई एयरपोर्ट के पास बनवाया गया। इस मंदिर का उद्घाटन मैंने पारंपारिक कुंभाभिषेक अनुष्ठानों के बाद किया है। यह मंदिर जल्द ही श्रद्धालुओं के लिए खुल जाएगा। 17 साल बाद इस मंदिर की स्थापना मेरे हाथों से हुई। इस समारोह में तमिलनाडू के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पत्नी दुर्गा स्टालिन भी शामिल हुई थीं। हनुमान जी की इस मूर्ति का वजन 180 टन है। यह मूर्ति अपने आप में अद्भूत है। देखते ही हर कोई मूर्ति की तरफ आर्कषित हो जाता है। अब जल्द ही इस मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। आगे अर्जुन सरजा ने अपनी एक और सच्ची घटना को हमारे साथ साझा किया जिसके बारे में शायद ही कोई जानता हो।

अर्जुन सरजा ने बताया कि, मैं इस दौरान उस एक्ट्रेस का नाम नहीं लेना चाहता। एक बार मैं किसी फेमस तमिल एक्ट्रेस के साथ फिल्म शूट कर रहा था। जिस दौरान हमारी अच्छी-खासी दोस्ती हो गई और नज़दीकियां बढ़ने लगी, लेकिन कुछ समय से वह मुझे परेशान करने लगी तो मैंने उससे अलग होने का फैसला लिया, लेकिन उसने मेरे से बदला लेने के लिए मुझपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। जिसके बाद मैं काफी साल तक कानूनी रूप से परेशान रहा। आप लोग खुद समझ सकते हैं कि, ऐसा आरोप लगना कितना दुखद होता है, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और डटकर इस लड़ाई का सामना किया। इसी के साथ मैं हनुमान जी से अरदास लगता रहा कि, मुझे जल्द से जल्द इस समस्या से बाहर निकालें। इस दौरान मैं हनुमान जी के कई मंदिरों में दर्शन करने गया। फिर धीरे-धीरे ये केस संभलने लगा और एक बार फिर से मेरा विश्वास राम भक्त हनुमान पर बनने लगा। इतना ही नहीं, उस एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिये भी मुझे फंसाने का पूरा इरादा कर लिया था। उसने मी-टू कैंपन के जरिये मुझे बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन हनुमान जी ने मुझे वहां भी बचा लिया, क्योंकि मैंने कभी उसके साथ गलत नहीं किया।

मेरी जिंदगी में कई ऐसी परेशानियां आई है जिनका निवारण सिर्फ हनुमान जी ने ही किया है, इसलिए मैं आज उनका प्रबल भक्त हूं। मेरी जिंदगी में हनुमान जी की इतनी कृपा है और उन्होंने मुझे इतने चमत्कार दिखाए हैं जिनका जिक्र आज मैं करूं तो शायद पूरा दिन भी कम पड़ जाए। हनुमान जी ऐसे भगवान है जिनका चमत्कार सच में मिनटों में नज़र आता है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि, मैं सुपरस्टार बनाऊंगा इतना नाम कमाऊंग बल्कि मैं तो पुलिस अधिकारी बनकर सरकारी नौकरी करना चाहता था, लेकिन कब मेरे करियर की दिशा इस ओर चली गई मुझे खुद पता नहीं चला। हालांकि, मैंने जिंदगी में बहुत स्ट्रगल किया है, लेकिन हनुमान जी के बिना सच में मैं कुछ भी नहीं हूं। चेन्नेई में तो मैंने अपना सपना पूरा कर लिया है अब चेन्नेई से बाहरी इलाकों में भी मैं हनुमान जी का मंदिर बनवा रहा हूं, ताकि हनुमान जी की कृपा का लाभ हर भक्त उठा सके। ये कुछ राज़ थे मेरी जिंदगी से जुड़े हुए जोकि, मैंने आपके चैनल के जरिये अपने फैंस और हनुमान भक्तों तक पहुंचाएं है। कहते हैं कि, इंसान का विश्वास यदि बुलंद को तो भगवान भी साथ देते हैं ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ है। शायद आपको मेरी जिंदगी की सच्चाई जानकर अच्छा लगा होगा कि, एक साधारण इंसान से सुपस्टार बनने के बाद भी उस पर भगवान की  कृपा होनी अतिआवश्यक है। आपको यदि हमारी ऐसी आस्था भरी कहानी पसंद आए तो कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट जरूर करें। 

महादेव-पार्वती ने अपने भक्त को दिए मायावी गुफा में दर्शन, भक्त को दिया चमत्कारी वरदान

हेलो दोस्तों आपका हमारे यूट्यूब चैनल में स्वागत है। आज एक ऐसी ही सच्ची घटना का जिक्र इस वीडियो में करेगें। जिसको देखकर आप हैरत में पड़ जाएंगें। 

कहते हैं कि, मानो तो सबकुछ है ना मानो तो कुछ भी नहीं है। इसका मतलब है कि, यदि मानो तो भगवान हमारे आस-पास है नहीं मानो तो वो कही भी नहीं है। ऐसी ही एक कहानी हमारे साथ शुभम राजपूत ने साझा की है। दरअसल, शुभम बचपन से ही महादेव का परम भक्त है। शुभम ने बताया कि, बचपन में वह हिमाचल के एक छोटे से गांव में रहता था। वहां पर एक महादेव का एक रहस्यमय मंदिर है जिसमें सिर्फ शुभम ही जा सकता है। यह सुनने में आपको जरूर अटपटा लग रहा होगा, लेकिन यह सच है कि, वहां पर सिर्फ शुभम ही महादेव और पार्वती के दर्शन कर सकता है। महादेव का यह मंदिर पहाड़ों में काफी फीट ऊपर जाकर स्थित है। कोई भी साधारण इंसान इस मंदिर के दर्शन नहीं कर सकता। शुभम ने बताया कि, मेरी मां का देहांत बचपन में ही हो गया था। मैं उनको बहुत याद करता था। उस समय मेरी उम्र महज 13 साल की थी। मुझे मेरी मां इतनी याद आती थी कि, उनको सोचकर मैं अकेले पहाड़ों पर जाकर रोने लगता था।

एक बार मेरी सौतली मां ने मेरी गलती पर मेरा हाथ जलती लकड़ी से जला दिया और मुझसे कहा कि तू यहां से चला जा तेरी वजह से हमारे घर में क्लेश रहता है। उस समय हाथों में जितना दर्द हो रहा था उतना ही दिल दुखी था। ऐसे में रोते-रोते में पहाड़ों की तरफ जाने लगा और कब मैं पहाड़ों की ऊंचाई पर पहुंच गया मुझे पता नहीं चला। थोड़ी दूर और आगे चलने पर मैंने देखा कि, एक गुफा के अंदर से आवाज़ आ रही है जैसे ही मैं उस गुफा में गया तो मैंने देखा पार्वती और महादेव जैसे कपड़े पहनकर कोई आपस में लड़ रहा है। जैसे ही मैं उनके पास गया तो पार्वती बनी महिला ने मुझे गले लगा लिया। फिर मैं उनके गले लगकर बहुत बुरी तरह से रोने लगा, क्योंकि उस दिन मुझे मेरी मां की कमी खल रही थी। इसके बाद जैसे ही मैंने उनसे पूछा कि, आप लोग कौन हो तो उन्होंने कहा कि, मैं मां पार्वती हूं और ये महादेव है।

यह सुनकर मुझे यकीन नहीं हुआ मैंने पूछा कि, क्या आप सच में भगवान हो। उन्होंने कहा हां मैं हम सच में भगवान है। यह सुनकर यकीन तो हो नहीं रहा था, लेकिन उन्होंने जब मेरे बारे में सबकुछ बताया तो मुझे यकीन हो गया कि, वाकई में यह भगवान है। इसके बाद जब मैंने उनसे मेरी मां लौटाने की इच्छा रखी तो उन्होंने कहा कि, पुत्र तुम्हें तुम्हारी असली मां हम नहीं लौटा सकते, लेकिन हां तुम्हारी सौतली मां को असली मां बना सकते है। तुम जब घर जाओगे तो वह तुम्हारे साथ असली मां जैसा व्यवहार करेगी। इसके बाद महादेव ने कहा कि, पुत्र बताओ तुम्हारी क्या इच्छा है, तुमने हमें स्वयं रूप में देखा है। आजतक भी किसी ने हमें इस रूप में नहीं देखा। तब शुभम ने बोला कि, महादेव ऐसा वरदान दे दो मैैं दुखी लोगों की पीड़ा हर सकूं। उनको सही मार्गदर्शन दे सकूं और लोगों की सेवा कर सूकं। तब महादेव ने शुभम को एक रूदाक्ष दिया और कहा कि, बेटा निस्वार्थ से तुम यदि लोग कल्याण करना चाहते हो तो मैं तुम्हारे साथ हूं। आज से यह रूद्राक्ष तुम्हारे हमेशा काम आएगा। यह कहकर महादेव ने कहा कि, तुम्हारा नाम शुभम नहीं आज से रूद्रा है। तुम्हें लोग रुद्रा के नाम से जानेगें। यह कहकर उन्होंने मुझे वहां से जाने को कहा।

उस समय में मैं बच्चा ही था ज्यादा समझ नहीं होने की वजह से बिना कुछ कहे मैं वहां से चला गया। इसके बाद जैसे ही गुफा से निकला तो फिर से झगड़ा करने की आवाज़ें आने लगी मैंने जैसी पीछा मुड़कर देखा तो वहां पर कोई नहीं था। धीरे-धीरे मेरी आंखों के सामने वो गुफा लुप्त होने लगी। यह देखकर मेरी रूह कांप गई और डरते-डरते मैं पहाड़ों से नीचा आया और घर जाकर सारी बातें बताई, लेकिन किसी ने भी मेरा यकीन नहीं किया, लेकिन जैसा महादेव ने कहा था। वैसा ही मेरे साथ होना शुरु हो गया। मेरी मां का व्यवहार मेरे लिए बिल्कुल बदल गया और कुछ सालों बाद में संयासी बन गया   लोग मुझे रूद्रा बाबा के नाम से जाने लगे। मेरे पास कोई भी अपनी समस्या को लेकर आता है तो मैं उसका समाधान जरूर करता हूं। कोई भी भक्त मेरे पास से खाली हाथ नहीं जाता। आज मैं पहाड़ों पर वास करता हूं और फिर से उस गुफा के दिखने का इंतजार कर रहा हूं। अब महादेव मुझे कब दर्शन देंगे यह इंतजार मुझे रहता है। दोस्तों यदि आपको हमारी यह कहानी पसंद आई हो तो कमेंट बॉक्स में हर-हर महादेव लिखें।  

नागपंचमी पर इच्छाधारी नागिन ने धारण किया विकराल रूप, आंखों से खून निकालकर की महादेव से बगावत

हेलो दोस्तों आपका हमारे यूट्यूब चैनल पर स्वागत है। आज हम महादेव भक्तों के लिए एक ऐसी वीडियो लाए है, जिसे देखकर वह हैरान रह जाएंगें, जी हां, यह तो आप सभी जानते होंगे कि, महादेव को नाग कितने प्रिय है। इसी वजह से वह उनको आभूषण की तरह अपने गले में हमेशा सजाए रखते हैं। इसी के साथ महादेव को सावन की नागपंचमी भी बेहद प्रिय है। ऐसे में इस पावन दिन पर यदि उनके नाग देवता ही उनसे नाराज़ हो जाए तो क्या परिस्थिति होगी। इसकी जानकारी आज हम आपको वीडियो के जरिए देगें।

आपने अक्सर सुना या देखा होगा कि, नाग-नागिन का जोड़ा हमेशा एकसाथ रहता है। वह कोई भी काम एक-दूसरे के बिना नहीं करते। यहां तक की ज़मीन पर भी वह एकसाथ चलते हैं। इसके पीछे का कारण उनका प्रेम है, जी हां आपने फिल्मों और असल जिंदगी में भी देखा होगा कि, नाग-नागिन किस तरह एक-दूसरे की रक्षा करते है व एक-दूसरे के साथ किस तरह प्यार करते हैं। इसी तरह कि एक सच्ची कहानी हम आपके लिए लाएं है जोकि, एक इच्छाधारी नागिन की है। हिंदु धर्म में मान्यता है कि, यदि कोई भी इच्छाधारी नाग-नागिन के जोड़े को देख लेता है तो उसकी किस्मत चमक जाती है, लेकिन आज की इस सच्ची कहानी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि, किस तरह एक इच्छाधारी नागिन ने विकारल रूप धारण करके महादेव से बागवत की, जी हां, इस धरती पर प्यार की मिसाल बनने वाले इस इच्छाधारी नाग-नागिन के जोड़े के साथ नागपंचमी के दिन एक ऐसी अनहोनी हुई। जिसको पूरे गांव ने देखा।

दरअसल, गहोर गांव में नागपंचमी वाले दिन दूर-दूर से लोग महादेव के मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। यहां तक की कई गांवों के नाग भी इस दिन यहां इक्ट्ठा होते हैं। इसी तरह यह इच्छाधारी नाग-नागिन का जोड़ा भी महादेव की कृपा पाने के लिए जंगल से मंदिर की ओर जा रहा था। यह जोड़ा हमेशा एकसाथ चलता था, लेकिन नाग तेज़ी से आगे बढ़ने लगा और नागिन धीरे-धीरे पीछे आ रही थी। नाग इतनी तेज़ी में जाने लगा कि, सड़क के बीच में पहुंच गया, जिस दौरान एक कार सड़क के बीच में से गुजर रही थी और वह नाग कार के नीचे आकर मर गया। यह देखकर नागिन गुस्से में आ गई। वह रो-रोकर अपना फन सड़क पर बुरी तरह से पटकने लगी। इतने में लोगों की भीड़ सड़क पर लग गई। उनमें से एक शख्स जिसे सांपों को पकड़ने का अनुभव है उसने नाग को सावधानी से उठाया और ज़मीन में दफनाने लगा। यह देखकर नागिन को क्रोध आया और उसने उस आदमी को डस लिया। जिसके बाद वहीं पर उसकी मौत हो गई। ऐसा करने के बाद वह नागिन अपने नाग को मुंह में दबाकर महादेव के मंदिर के अंदर ले गई और शिवलिंग के पास उसे रख दिया।

इसके बाद उस इच्छाधारी नागिन ने अपना विशाल विकराल रूप दिखाया। उसका ऐसा रोद्र रूप देखकर गांव वासियों के पसीने छूटने लगे। फिर इच्छाधारी नागिन ने अपना रूप बदला और आधी नागिन और आधी औरत बन गई। धीरे-धीरे वह इतनी विशाल हो गई की, लोग उसे देख भी नहीं पा रहे थे। वह चिल्ला-चिल्लाकर शिवलिंग के आगे अपने नाग को वापिस मांगने बागवत कर रही थी। उसके आंसू खून के रूप में ज़मीन पर गिर रहे थे। ऐसा नज़ारा देखने के बाद गांव वासियों की रूह कांप गई। नागिन का ऐसा रोद्र रूप देखकर गांव वासियों को लगा कि, वह पूरे गांव को निगल जाएगी, लेकिन वह शांत नहीं हो रही थी। इसके बाद एक साधू विशाल रूप में वहां पर आया और नागिन से कहा कि, तुम इतनी बागवत क्यों कर रही हो, क्या तुम नहीं जानती तुम्हारे नाग ने किसी निर्दोष महिला की जान ली है। तुम्हें महादेव से ये शक्ति प्राप्त है कि, तुम दोनों ही सालभर में 3 बार ही इंसान का रूप धारण कर सकते हो, जिसमें तुम बुरे और अच्छे कर्म कर सकते हो, उस समय तुम्हारे नाग के पास खुद को अच्छा साबित करने का समय था, लेकिन उसने पहले महिला के साथ गलत किया और फिर उसकी जान लेकर भागने लगा। यह उसके कर्म है जोकि, उसको भुगतने है।

इस धरती पर हर कोई अपना कर्म भुगता है फिर चाहे वह इंसान हो या जानवर। इस बात पर नागिन भड़क गई और कहने लगी कि, एक मौका तो मेरे नाग को दिया जा सकता है, वह भटक गया था, लेकिन आपने तो उसकी जान ही ले ली। यदि मेरा नाग आज के आज वापिस नहीं आया तो मैं इस पूरे गांव को खत्म कर दूंगी। यह बात सुनकर गांव वासी डर गए और साधू से विनती करने लगे कि, हे बाबा आप हम लोगों को बचा लो यहां हमारे छोट-छोटे बच्चे भी हैं। फिर साधू ने कहा, ठीक है बेटा महादेव इसको जीने का वरदान देंगे, लेकिन तुम दोनों से ही इच्छाधारी होने का गुण छीन लेंगे और तुम दोनों मिलकर इस गांव की रक्षा करोगे, ताकि यहां पर कभी भी कोई अनहोनी ना हो। इसपर नागिन ने कहा कि, ठीक है मुझे सिर्फ मेरा नाग चाहिए और वो आपको देना होगा, फिर वह साधू साधारण रूप धारण करके महादेव के आगे पूजा-पाठ करने लगा और मंत्रों का जप करते हुए नाग पर गंगा जल छिड़कने लगा। कुछ ही देर में उस नाग की पूंछ धीरे-धीरे हिलने लगी यह देखकर नागिन काफी खुश हुई, फिर जैसे ही मंत्र खत्म हुए तो वह नाग जिंदा हो गया।

यह चमत्कार देखकर वहां के लोग डर गए। इसके बाद वह नागिन और नाग एक-दूसरे के गले लग गये। यह दृश्य देखने में काफी भावुक था,फिर साधू ने कहा कि, तुम्हारे मुताबिक मैंने अपना वादा पूरा किया अब तुम्हारा वादा तुम दोनों मिलकर पूरा करोगे। इस गांव की रखवाली तुम दोनों हमेशा ही करोगे। इस पर नाग-नागिन ने कहा कि, यह गांव नहीं आज से हमारा घर है, इसलिए हर मुसीबत आने पर हम लोग इस गांव की रक्षा करेगें। यह सुनकर साधू वापिस जंगल की ओर जाने लगा। इसके बाद जहां-जहां पर साधू के पैर पड़ रहे था वहां-वहां पर पैरों के निशान चिन्ह बनने लगे। यह चमत्कारी दृश्य देखने के बाद लोगों को यकीन होने लगा कि, यह कोई साधू नहीं बल्कि स्वयं महादेव थे। जिन्होंने नागिन के नाग को पुर्नजन्म दिया और हमारी जान बचाई। महादेव के पैरों के निशान मंदिर से लेकर सड़क के बीचों-बीच आज भी स्थित है, जब से ही लोगों की मान्यता है कि, इन चिन्हों पर ना तो कोई पैर रखता है और ना ही कोई इस पर कार चढ़ता है, यदि कोई ऐसा करता है तो उसको उसका दंड भुगतना पड़ता है। इसे चमत्कार कहे या फिर नागिन के सच्चे प्रेम की परीक्षा ये तो महादेव ही जानें। यदि आपको हमारी यह कहानी पसंद आई हो तो महादेव की कृपा पाने के लिए आप कमेंट बॉक्स में हर हर चमत्कारी महादेव जरूर लिखें।

चंद मिनटों में हनुमान जी ने बख्शी फौजियों की जान, चमत्कार देख हर कोई हैरान

हेलो दोस्तों आपका हमारे यूट्यूब चैनल में स्वागत है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, एक ऐसी सच्ची घटना के बारे में जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। दरअसल, यह घटना वाघा बॉर्डर पर फौजियों के साथ घटित हुई। जिसके बाद से ही वहां के सभी फौजी हनुमान भक्त बन गये हैं। अब वहां पर फौजियों का मानना है कि, यहां पर हनुमान जी का वास होता है। तब ही वह इतनी बड़ी मुसीबत से आसानी से बच गये।

यह बात तो सब जानते हैं कि, वाघा बॉर्डर से पाकिस्तान  ज्यादा दूरी पर नहीं है। वहां पर लोगों की आवाजाही भी फौजियों की देखरेख में होती है। ऐसे में वहां पर एक घटना घटी जिसको शायद ही कोई भूल पाएगा। साथ ही, वाघा बॉर्डर पर सभी फौजी भाई मिलकर परेड करते हैं। जिसका लुफ्त उठाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। वहीं एक दिन फौजियों के साथ भयानक घटना घटी। वाघा बॉर्डर पर रोज़ाना बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी सुबह-शाम की जाती है। इसमें सभी फौजी परेड करते हैं जिन्हें देखने के लिए काफी संख्या में लोग वहां पहुंचते हैं।

कहानी कुछ यूं है कि, एक बार शाम के समय सभी फौजी बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी में आर्मी ट्रक में जा रहे थे। इस समय मौसम काफी खराब था आंधी तूफान ज़ोरों से अपना कहर बरपा रहे थे। ऐसे खराब मौसम में ही फौजियों के 8 ट्रक भरकर वाघा बॉर्डर की ओर जा रहे थे। कुछ ही दूरी पर पहुंचने के बाद सबसे आगे चलने वाले ट्रक को पता चला कि, ट्रक का ब्रेक फेल हो गया है, काफी देर तक कोशिश करने के बावजूद भी ट्रक की गति को संभाला नहीं जा रहा था। ऐसे में 7 ट्रक पीछे भी आ रहे थे। जब ड्राइवर को कुछ समझ नहीं आया तो उसने बस के सभी फौजियों को बताया कि, अब ट्रक मेरे काबू में नहीं है। यह सुनकर फौजियों ने भी काफी कोशिश की ट्रक को दूसरी तरफ मोड़कर रोका जाए, लेकिन ब्रेक बिल्कुल भी काम नहीं कर रहे थे।

इसके बाद उन्हीं फौजियों में से एक हनुमान के परम भक्त थे। जिन्होंने सभी फौजी भाईयों से कहा कि, क्या पता यह रास्ता हमारे लिए आखिर हो और क्या पता हम सभी को राम भक्त हनुमान जी बचाने आ जाएं। वह संकट हरता है हमारी इस विनती को वह जरूर सुनेगें। उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद सभी फौजियों ने मिलकर आंखें बंद कर ली और हनुमान चालीसा का जप करने लगे, वहीं ट्रक ड्राइवर ट्रक को ब्रेक लगाएं बिना दूसरी ओर चला रहा था, ताकि ट्रक किसी से टकराए ना। कुछ ही देर में अचानक ट्रक अपने आप रूक गया। यह देखकर ट्रक ड्राइवर हैरान रह गया और देखने के लिए ट्रक से नीचे उतरा। वह ट्रक की स्थिति को देखकर घबरा गया। इसके बाद ड्राइवर ने घबराती हुई आवाज़ से सभी फौजियों को बाहर आने को कहा। जैसे ही फौजी बाहर आए तो उन्होंने देखा कि, इतना भारी-भरकम ट्रक बिना किसी सहारे के इस तरीके से रूका हुआ था, मानो जैसे कि, किसी ने इसको सहारा देकर रोक रखा हो। वहीं, ट्रक के पिछले टायर तेज़ी से घूम रहे थे। यह चमत्कार सभी ने अपने फोन में कैद किया और समझने की कोशिश की आखिर ऐसा कैसे हो सकता है।

इस नज़ारे को देखने के बाद हर कोई एक-दूसरे की शक्ल हैरानी से देखने लगा। इसके पीछे क्या वजह है यह जानने की इच्छा हर किसी की हो रही थी। फिर सारे ट्रक आगे चले गये और यह ट्रक सबसे पीछा हो गया। जैसे ही ड्राइवर अपनी सीट पर जाकर बैठा तो उसने सामने ट्रक के शीशे पर देखा कि, दो बड़े-बड़े हाथों के निशान है जोकि, साधारण इंसानों के नहीं होते। वह निशान इस तरीके थे, जैसे मानो कि, किसी ने हाथों के जरिये ट्रक को काबू किया हो और रोक लिया हो। इसके बाद मैकनिक को वहां पर बुलाया गया और ट्रक को सही करवाया गया। इसे हनुमान जी का चमत्कार कहें या फिर फौजियों की किस्मत। इस राज़ को तो कोई नहीं जानता, लेकिन वो हाथों के निशान हनुमान जी के चमत्कार की ओर इशारा जरूर कर रहे हैं। यदि आपको हनुमान जी से जुड़ी अन्य तमाम सच्ची कहानियों के बारे में जानना है तो हमारे कमेंट बॉक्स में जय हनुमान जी लिखें।

फौजी की मदद करने के लिए छलावा बनकर सामने आए हनुमान जी, देखने वालों की हुई बुरी हालत

हेलो दोस्तों हमारे यूट्यूब चैनल में आपका स्वागत है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक ऐसे देशभक्त की सच्ची कहानी जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगें, जी हां, इस देशभक्त की मदद किस करने के लिए हनुमान जी ने किस तरह की साजिश रची उसके बारे में हम आपको इस वीडियो में बताएंगें। 

दरअसल, ये कहानी कर्मवीर प्रताप की है जोकि, फौज में देशरक्षक बनकर देश की भक्ति कर रहे हैं। कर्मवीर ने खुद यह कहानी हमारे साथ साझा कि, उन्होंने बताया कि, किस तरह हनुमान जी ने उनकी सहायता की और उनकी वजह से एक अनजान व्यक्ति की जिंदगी बदल दी। कर्मवीर ने बताया कि, एक बार वह दिपावली की छुट्टियां मनाने के लिए अपने घर लेह से उत्तर प्रदेश जा रहा थे। कर्मवीर गाजियाबाद के रेलवे स्टेशन पर उतरे और स्टेशन के बाहर निकल रहे था, इतने में ही वहां पर सफाई करने वाले एक लड़के ने कर्मवीर का पर्स चोरी कर लिया।

जिसके बाद वह चुपके से वहां से निकलकर अपनी बाईक लेकर भाग गया। यह बात कर्मवीर को पता नहीं थी कि, उनका पर्स चोरी हो गया। उसमें कुछ पैसे और आर्मी का आईडी कार्ड था। जोकि कर्मवीर के लिए बेहद जरूरी था। जैसे ही स्टेशन से बाहर निकले तो कर्मवीर का बेटा उसे लेने आ गया। कर्मवीर बाईक से अपने बेटे के साथ घर की तरफ जा रहा था इतने में ही उसने देखा कि, सड़क के बीचों-बीच दो लोगों में काफी बुरी तरह से हाथापाई हो रही है और लोग वहां पर तमाशा देख रहे हैं ये देखकर कर्मवीर ने बेटे से बाईक रुकवाई और वहां जाकर देखा कि मामला क्या है। कर्मवीर ने देखा कि, एक बाईक सवार लड़के को तीन लड़कों ने मिलकर नीचे ज़मीन पर गिरा रखा है और वह उसको पीट रहे हैं।

फिर कर्मवीर ने सोचा कि, यदि में अपना आईडी कार्ड दिखाऊंगा तो शायद यह मामला ठंडा हो जाए। जैसे ही कर्मवीर ने अपनी जेब में हाथ मारा तो उसकी जेब में पर्स नहीं था। यह देखकर वह काफी परेशान हुआ, लेकिन फिर भी उस बाईक वाले की मदद करने लगा और उन लोगों को मारने से रोकने लगा, लेकिन कर्मवीर यह नहीं जानता था कि, यह वहीं चोर है जिसने उसका पर्स चुराया है। इस चोर की मदद कर्मवीर ने अनजाने में की। वह स्टेशन से भागकर बाईक से अपने घर जा रहा था। जल्दबाजी में रेड लाइट क्रॉस करने लगा जिस दौरान उसकी बाईक कार के नीचे आ गई और कार वालों ने उस बाईक वाले की पिटाना शुरु कर दिया। रेड लाईट होने पर भी वह चोर तेज़ी में सड़क को क्रॉस कर रहा था। जिसकी वजह से बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया। ऐसे में फौजी कर्मवीर ने बीच में आकर उस अनजान चोर की मदद की और कार वालों को वहां से जाने को कह दिया।

जब सभी लोग वहां से चले गये तो फौजी को उस चोर ने कहा, साहब मैं आपका पर्स लेकर भागा था। मैं वहां पर काम करने के साथ-साथ चोरी भी करता हूं। आज आपका पर्स चुराकर मैं भागने की फिराक में था। थोड़ी सी दूर आने पर मेरी बाईक भारी होने लगी जैसे ही मैंने पीछे मुड़कर देखा तो हनुमान जी का छलावा दिखा फिर दोबारा शीशे में देखा तो वहां कोई नहीं था, लेकिन बाईक पूरे समय भारी रही जैसे की कोई भारी-भरकम चीज़ मेरी बाईक पर बैठी हो। इसी कारण बाईक अनियंत्रित हो गई और ये एक्सीडेंट हो गया। तब फौजी ने बताया कि, इस पर्स में हनुमान जी तस्वीर है मैं उनका बहुत बड़ा भक्त हूं। शायद इसलिए मेरी मदद करने के लिए उन्होंने तुम्हें चुना और तुम्हें सबक सिखाने के लिए मुझे चुना। सच में राम भक्त हनुमान की लीला अपरम पार है। फिर उस चोर ने फौजी की बात को समझा और बोला साहब आज के बाद में ईमानदारी से नौकरी करूंगा और अपना जीवन अच्छे से व्यतीत करूंगा। यह सुनकर फौजी काफी खुश हुआ और हनुमान जी का धन्यवाद करने लगा। यदि आपको ऐसी सच्ची चमत्कारी घटनाओं के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करनी हो तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में जय हनुमान जी जरूर लिखें।   

शिवलिंग के साथ कट्टर मौलाना ने की ये गंदी हरकत, फिर महादेव ने की नागों की बारिश

हेलो दोस्तों आपका हमारा यूट्यूब चैनल में स्वागत है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं, देवों के देव महादेव के एक ऐसे रहस्य के बारे में जिसको सुनकर आप दंतों तले उंगली दबा लेगें। जी हां, यह तो सब जानते हैं कि, महादेव को नाग कितने प्रिय है। वह अपने गले में नाग देवता को आभूषण की तरह सजाए रखते हैं, लेकिन विकराल रूप धारण करने पर वह नाग देवता से ही अपनी नाराज़गी जाहिर करते हैं। ऐसा क्यों हुआ और किस वजह से हुआ इन सभी बातों को जवाब आपको हमारी इस रहस्यमय वीडियो में मिलेगा।

यह कहानी राजस्थान के एक छोटे से गांव की है।जहां पर एक सुखराम नाम का पुजारी रहता था। जोकि,महादेव का परम भक्त था। सुखराम ने ही हमें सारी कहानी के बारे में बताया कि, एक बार उनके गांव में सांपों की बारिश होने लगी, उसके पीछे एक मुस्लिम धर्म के मौलान की ऐसी करतूत थी जिसको देखकर हर किसी की रूह कांप गई। जी हां, राजस्थान के इस गांव में मंदिर के सामने ही पीर बाबा की मजार है। यहां पर भक्त अपने-अपने धर्म के मुताबिक इक्ट्ठा होते हैं व भगवानों की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसे में एक बार सावन महीने में एक घटना घटी जिसको देखने के बाद सभी को आंखों से आंसू आ गये और लोग अपनी जान की भीख मांगने भगवान के दर पर गये। दरअसल, सुखराम ने बताया कि, हमारे गांव में सावन महीने में महादेव का मेला लगता है, जिसमें कई साधू संत आते हैं और महादेव को मानने के लिए यज्ञ करते हैं, लेकिन एक कट्टर मौलाना की गंदी करतूत की वजह से उसने महादेव को क्रोधित कर दिया जिसके बाद नाग आसमान से बरसने लगे।

सुखराम ने आगे बताया कि, जब वह साधू यज्ञ करने के बाद शिवलिंग पर दूध का अभिषेक कर रहे थे, तब मौलाना ने एक नाग को पकड़कर उसकी हत्या कर दी और मंदिर के अंदर फेंक दिया। उसने यह सब छुपकर किया, लेकिन एक हिंदु भाई ने उसको यह सब करते देख लिया और वहीं उसको पकड़ लिया और लोगों को बुलाकर उसको खूब मारा, लेकिन यह बात किसी को नहीं पता था कि, वह नाग-नागिन के साथ रहता था, इसलिए वह नागिन भी वहां पर आ गई और गुस्से में उस मौलाना को कांटकर उसकी जान ले ली। इसके बाद महादेव को क्रोध आया और अंधाधुंध नागों की बारिश आसमान से होने लगी। इतने नाग आसमान से कैसे गिर रहे थे, यह सवाल सबके मन में चल रहा था, लेकिन आर्श्चय की बात यह थी कि, आसमान से नाग इतनी संख्या में गिर रहे थे एक नागों का पहाड़ बन गया था। फिर सुखराम पुजारी ने साधू-संतो से विनीत की आप यदि महादेव से प्रार्थना करोगे तो शायद यह प्रकोप थम जाएगा। इस पर साधू-संत ने कहा कि, अब इसको सिर्फ मां पार्वती ही रोक सकती है। हम सबको मिलकर उनसे विनीत करनी होगी ताकि यह कहर थम जाए।

इसके बाद जब सभी लोगों ने मंदिर के अंदर जाकर मां पार्वती से नागों की बारिश रूकवाने की अरदास लगाई तो थोड़ी ही देर में वहां पर कई सपेरे आए और नागों को पकड़कर अपने साथ ले जाने लगे। लोगों ने उन सपेरों से बात करनी चाहि, लेकिन वह किसी से भी बात नहीं कर रहे थे। उनको देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो, वह सिर्फ यहां पर नागों को लेने आए हैं और नाग वर्षा को रोकने के लिए आये हो। हैरानी की बात तो ये थी कि, उन सपेरों के आते ही नागों की बारिश पूरी तरह से रूक गई थी।  यह सब होने के बाद वहां पर मची हलचल भी खत्म हो गई। यह सब देखकर मुस्लिम धर्म के लोग डर गए और कहने लगे वाकई आपके तीनों लोकों के देव महादेव सच में जितने दयालु हैं उतने ही विकराल भी हैं, यदि आज हमारी जान बची है तो सिर्फ मां पार्वती की वजह से ही ऐसा हुआ है। हमने यह चमत्कार कभी भी नहीं देखा था। आज यह देखकर विश्वास हो गया कि, हिंदु धर्म के महादेव काफी शक्तिशाली भगवान हैं। इस चमत्कार के बाद से ही उस गांव के सभी मुस्लिम लोग महादेव के आगे सिर झुकाते हैं व उनको दिल से मानते हैं। 

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