बालाजी मंदिर के मंदिर में सच में हुए थी ये घटना जानकर चौक जाओगे

नमस्कार दोस्तों आज हम आपको भारत के सबसे चमत्कारी मंदिर बालाजी के बारे में बताने जा रहे है जहा से आज तक कोई खाली हाथ नहीं लोटा. हर भक्त की मनोकामना महेंदीरपुर बालाजी ने करि है. हनुमान जी को समर्पित इस मंदिर के प्रकट होने के संबंध में भी एक अनोखी चमत्कारी घटना है. कहते है एक बार जयपुर के किसी गांव में हनुमान जी के परम् भक्त गोसाई जी महाराज को रात को सोते समय एक बड़ा ही विचित्र सपना आया. सपने में उन्होंने देखा की एक तेज प्रकाश उनकी तरफ आ रहा है. और उसी प्रकाश में प्रकट हुए हनुमान जी जिनका तेज बहुत ही अधिक था. सूर्य के समान वह चमक रहे थे. आपने एक हाथ भक्त गोसाई जी महराज को पकड़ाते हुए हनुमान जी ने कहा वत्स मेरे साथ चलो. महारज जी हनुमान जी के साथ चल दिए तथा एक ऐसी जगह जाकर रुके जहा हजारो दीपक जल रहे थे. साथ ही तीन दिव्य शक्तिया जो बहुत ज्यादा चमक रही थी . हनुमान जी ने कहा यह हम तीन शक्तियों का बहुत बड़ा केंद्र है. यहां आने वाले हर भक्त की मनोकामना बहुत जल्दी पूरी हो जायेगी . तुम इस जगह में पूजा पाठ एवं सेवा का कार्य करो.
दोस्तों वह तीन चमत्कारी शक्तिया थी , बालाजी महराज, भैरव बाबा तथा पैतरा सरकार. उसके बाद घंटा घड़ियाल तथा नगाड़ो की आवाज आने लगी. अगली सुबह उठकर जब महराज जी को अपने सपने वाली बात यदि आयी. और वह उसे खोजने निकले तो अपने आप ही उनके कदम उस पहाड़ी की और बढ़ने लगे जिस के बारे में हनुमान जी ने उन्हें सपने में बताया था. और जैसे ही वह वहा पहुंचे तो महाराज जी का आश्चर्य का ठिकाना ना रहा. वह देखते है की उस पहाड़ की उस चौटी में हनुमान जी की मुर्तिया उकरी है . महराज ने वहा पूजा अर्चना आरम्भ कर दी . जब गांव के लोग वहा अपनी दुःख फरियाद लेकर आये तो हर किसी की मनोकामना मेहँदिर पुर बालाजी ने पूरी कर दी. देखते ही देखते इस मंदिर की ख्याति हर जगह फेल गयी.
इतना ही नहीं दोस्तों इस मंदिर से जुडी और विचित्र घटना घटित हुई. एक बार हनुमान जी का चोला उनकी प्रतिमा से सव्य ही उतर गया. क्योकि चोला सव्य हनुमान जी ने ही उतार दिया था तो मंदिर के पुजारी उसे गंगा जल में प्रवाहित करने के लिए ले गए. जब वे स्टेशन पहुंचे तो स्टेशन के कुछ कर्मचारियों ने उन्हें रोका और बोला की आपका समान शुल्क भी लगेगा. इसलिए जो भी आपके पास है उसे पहले तोलना पड़ेगा. तब भार के मुताबिक़ आपको पैसे देने होंगे. और उन्होंने हनुमान जी के उस चोले को तोलना आरम्भ कर दिया. परन्तु अद्भुत चमत्कार हनुमान जी का वह चोला कभी तो छोटा होता तो कभी अपने आप ही बड़ा हो जाता . अन्तत: रेलवे अधिकारी ने हार मान लिया और चोले को सम्मान सहित ट्रेन में जाने दिया |
दोस्तों मेहंदीपुर बालाजी के प्रतिमा में दिल के पास एक छोटा सा और बड़ा ही विचित्र छेद है. जिससे निकलने वाला पानी कभी खत्म ही नहीं होता. यह पानी बस बहता ही रहता है. आज तक यह रहस्य का विषय बना हुआ है. कहते इस पानी के छींटे यदि आप पर पड़ जाए तो आपके हर दुःख तकलीफ मेहंदीपुर बालाजी दूर कर देते है.

यहां आप अपनी आँखों से देख सकते हो की यदि किसी भी व्यक्ति पर को बुरी आत्मा या बुरी शक्ति लगी है तो वह जैसे ही मंदिर के भीतर प्रवेश करता है तो वह अजीब तरह की हरकते करने लगता है. इस मंदिर में एक बहुत शक्तिशाली बहारी शक्ति है जिसके कारण ही जैसे ही कोई भी आत्मा मंदिर के अंदर कदम रखती है तो उस शक्ति के प्रभाव से तड़पने लगती है. भले ही कितनी भी शक्तिशाली और बुरी आत्मा हो इस मंदिर में आकर ढेर हो जाती है. कि यहाँ कई लोगों को जंजीरों से बंधा एवं उल्टा लटका हुआ देखा गया है . यह किसी चमत्कार से कम नहीं है, कि कई भूत-प्रेत से पीड़ित लोग इस मंदिर में आकर प्रेतों एवं बुरी आत्माओं से मुक्ति पा लेते है .यहाँ आत्माओं के वशीभूत हुए कई लोगों को प्रतिमा के सामने रोते-बिलखते और भूत-प्रेतों के प्रभाव से पीड़ित होकर सर पटकते देखा है . परन्तु यह साक्षात् बालाजी की चमत्कारी शक्तियों का प्रभाव ही है, कि ऐसे लोग बिना किसी दवा के स्वस्थ होकर मंदिर से बाहर निकलते है .

ऐसा कहा गया है की जब आप पर कोई भी भरी परेशानी या विपदा आये तो एक बार इस मंदिर में जरूर आये. आपकी सभी मुसीबत महेंदीपुर बालाजी दूर कर देंगे. क्योकि आज तक जो भी भक्त यहां आया है वह कभी यहां से खाली हाथ नहीं लोटा है.
इस मंदिर में इतनी शक्ति है की नास्तिक भी आस्तिक बनकर प्रभु के चरणों के दास बन जाते है. परन्तु दोस्तों ध्यान रखे यदि आप इस मंदिर में जा रहे है तो आपको पहले ही कुछ नियमो की हिदायत दे दी जाती है. अगर इन नियमो का पालन ना किया जाए तो आप बहुत बड़ी परेशानी में फस सकते है. दोस्तों मंदिर के अंदर किसी को भी छूने या बात करने से पहले आपको सावधान रहना होगा.

यहां सभी के साथ स्नेहपूर्ण एवं सहानभूति का व्यवहार रखना होगा और जहा तक हो सके किसी से भी बात करने से बचे. तथा जिन रोगियों को मार पड़ती हो उनके लिए आपको आस पास की जगह खाली कर देनी होगी. जो भक्त उस मंदिर के प्रांगण के अंदर रहे तो उस ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा तथा मॉस मदिर प्याज आदि के सेवन को कुछ दिनों के लिए भूल जाना होगा. जैसे ही आप इस गांव जहा यह मंदिर है वहा पहुंचने के तुरंत बाद ही कुछ भी खाने या पिने की सलाह नहीं दी जाती है. और जब आप मंदिर दर्शन कर इस गांव से निकले तो खाने के पैकेट और पानी की बोतले यही खाली करके निकले. यहाँ से लोटे समय अपने घरो के लिए मंदिर में ही दिए जाने वाले प्रसाद के अलावा आप कुछ भी यहां से ना ले जाए.