What is Navratna Ring and Benefits in Hindi

Navratna ring ज्योतिषीय कारणों से पहने जाने वाली सबसे प्रसिद्ध रिंग हैं। इसकी विशेषता है कि यह आपके जीवन को संतुलन में लाने के लिए बहुत उपयुक्त है। यह व्यक्ति के आसपास की किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करते हुए एक प्रभावकारी ऊर्जा का उत्सर्जन करती है। इसे अंगूठी को बहुत ही शुभ माना जाता है, इसको पहनने वालों के लिए यह उत्तम सौभाग्य और स्वास्थ्य का वरदान देती है।

What is Navratna Ring

नवरत्न या नौ रत्न उन नौ ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन पर भारतीय ज्योतिष आधारित है। नवरत्न से सजे आभूषणों का सबसे आम प्रकार navratna ring stone है।
इस अंगूठी की लोकप्रियता कुछ इस प्रकार है की इसे कई बड़े-बड़े राजनेता और अभिनेता भी धारण करते है। इस अंगूठी मे लगे सारे नवरत्नों को एक साथ धारण करने से सभी ग्रहों की दशा में सुधार होता है व सकारात्मक शक्तियां आकर्षित होती हैं। एक नवरत्न अंगूठी पर रत्नों का स्थान ‘वास्तु’ सिद्धांतों के अनुसार होना चाहिए। लोग अपनी राशि या कुंडली के आधार पर इन शुभ रत्नों का चयन कर सकते हैं।

Navratna gold ring में लगे विभिन्न रत्न अलग-अलग ग्रहों पर निर्भर करते हैं जैसे कि रूबी सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है, मोती चंद्रमा को दर्शाता है, लाल मूंगा या मूंगा मंगल का प्रतीक है वही पन्ना बुध का प्रतिनिधित्व करता है। पीला-नीलम या पुखराज बृहस्पति का फल देता है, हीरा जिसे वज्र भी कहते है शुक्र को दर्शाता है। नीलम रत्न भगवान शनि का प्रतिनिधित्व करता है, गोमेध रत्न कुंडली में राहु की दशा में सुधार लाता है और वैदूर्यम जिसे कैट आईज भी बोला जाता है वह केतु का फल देता है।

इन रत्नो की दिशा, इष्ट और उनसे जुड़े ग्रह कुछ इस प्रकार है-

ईशान्य कोना – उत्तर पूर्व – पन्ना – बुध

इंद्र – पूर्व – हीरा – शुक्र

अग्नि – दक्षिणपूर्व – मोती – चंद्रमा

कुबेर – उत्तर – पीला नीलम – बृहस्पति

हवा – उत्तर पश्चिम – कैट आई (वैदूर्यम) – केतु

सूर्य – ब्रह्मस्थान – माणिक – रवि

यम – दक्षिण – लाल मूंगा – मंगल

वरुण – पश्चिम – नीलम – शनि

निरुथी कोना – दक्षिण पश्चिम – गार्नेट – राहु

ध्यान रखने योग्य बात है कि ऊपर दिए गए रत्न उपयुक्त क्रम में ही होने चाहिए। अंगूठी पहनने वाले व्यक्ति का हाथ पूर्व की ओर होना चाहिए। हीरा, पन्ना और मोती की दिशा धारण करने वाले के नाखून की ओर तथा नीलम शरीर की दिशा मे होना चाहिए।

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साक्षात मां लक्ष्मी और विष्णु की शक्तियां करती है इस अंगूठी में वास, जल्द आपके जीवन में ला सकती है तन, मन और धन का सुख।

How to Wear Navratna Ring

विद्वानों के अनुसार navratna stone ring को केवल शुक्ल पक्ष के शुक्रवार के दिन ही धारण करने की सलाह दी जाती है। नवरत्न अंगूठी सूर्योदय के पहले घंटे के भीतर पहनी जा सकती है। आप रविवार के दिन भी यह अंगूठी धारण कर सकते है। दोनों ही दिन, सुबह 5 से 7 बजे के बीच सूर्योदय का समय नवरत्न अंगूठी पहनने के लिए आदर्श है।

Navratna ring for ladies एवं पुरुष दोनों के लिए इस अंगूठी को धारण करने के अलग-अलग नियम बताये गए है। पुरुष नवरत्न अंगूठी को दाहिने हाथ की अनामिका पर पहनते हैं वही महिलाएं इसे बाएं हाथ की अनामिका पर धारण करती हैं।

नवरत्‍न अंगूठी के लाभ

  • नवरत्न को हमारे शास्त्रों में अत्यंत शुभ माना जाता है। कहा गया है कि जो भी इसे पहनता है उसे जीवन भर कोई भी गंभीर रोग अपने आगोश में नहीं लेता।
  • यह अंगूठी स्वास्थ्य, समृद्धि, खुशी और मन की शांति का प्रतीक है।
  • यह प्रतिकूल ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा और उनके दुष्प्रभाव को दूर करती है।
  • इस नौ रत्नो से जड़ी अंगूठी को धारण करने से एकाग्रता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
  • कार्य-क्षेत्र मे भाग्य आपका साथ देता है।
  • समाज में पद-प्रतिष्ठा और समृद्धि का विकास भरपूर रूप से होता है।

Navaratna Ring Price

Navratna ring की सही परख होना हर इंसान के बस की बात नहीं है परन्तु खरीदने से पहले उसके बारे में उचित जानकारी होना बहुत ही आवश्यक है। यहाँ आपको एकदम सटीक जानकारी के साथ-साथ उचित मूल्यों मे navratna ring online प्राप्त होंगी।

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नवरत्न पेंडेंट धारण करने से नव ग्रहों से दोष खत्‍म होकर शुभ फल प्राप्‍त होते हैं और धन पद प्रतिष्‍ठा पारिवारिक शांति प्राप्‍त होती है। ऐसे व्‍यक्ति जिनकी कुंडली में अधिकांश ग्रह कमजोर हो वो भी नवरत्‍न पेंडेंट को धारण कर सकते हैं।

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