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    Home » Ekadashi vrat- एकादशी व्रत का महत्व और ये है इस दिन चावल न खाने के पीछे की प्रमुख वजह
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    Ekadashi vrat- एकादशी व्रत का महत्व और ये है इस दिन चावल न खाने के पीछे की प्रमुख वजह

    Prabhu BhaktiBy Prabhu BhaktiFebruary 6, 2024Updated:February 6, 2024
    Ekadashi vrat
    Ekadashi vrat
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    एकादशी व्रत का महत्व (Ekadashi vrat ka mahatva)

    वैष्णव परंपरा (vaishnavism) से संबंध रखने वाले लोग एकादशी व्रत (Ekadashi Vrat) का पालन करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक हर वर्ष आने वाले 24 एकादशी व्रत का पालन करता है उसे जीवन में किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी और आर्थिक समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता। साथ ही उन्हें कभी दरिद्रता का सामना भी नहीं करना पड़ता।  

    विष्णु पुराण (Vishnu Puran) में एकादशी के बारे में कुछ इस तरह का वर्णन मिलता है कि तन-मन का बेहतर स्वास्थ्य बनाये रखने के लिए और शारीरिक सुंदरता की कामना रखने वालों को एकादशी व्रत रखना चाहिए।

    वहीँ स्कन्द पुराण (Skand Puran) में यह कहा गया है कि सभी प्रकार की परेशानियों से निजात पाने के लिए और जीवन में सुख-समृद्धि को प्राप्त करने के लिए एकादशी व्रत अधिक फलदायी है।

    ekadashi vrat 2023
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    एकादशी व्रत कब आता है? (Ekadashi vrat kab aata hai?)

    एकादशी (Ekadashi) साल में कुल 24 बार और महीने में दो बार आता है।  हर महीने पूर्णिमा के बाद की कृष्ण पक्ष और अमावस्या के बाद की शुक्ल पक्ष तिथि को एकादशी मनाई जाती है।

    कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) में आने वाली एकादशी में व्रत करने से पूर्वजों और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वंश की वृद्धि के साथ संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। 

    इसी प्रकार शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) को पड़ने वाली एकादशी को व्रत करने से पितृमातृकाओं एवं मातृमात्रकाओं को प्रसन्नता होती है और उन्हें मुक्ति मिलती है।

    ekadashi karne ke fayde
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    एकदशी व्रत के फायदे (Ekadashi vrat ke fayde)

    1. सौभाग्य की प्राप्ति होगी,

    2. विवाह में आने वाली अड़चनें समाप्त होंगी,

    3. मोक्ष की प्राप्ति होगी,

    4. मन स्थिर और शांत रहेगा,

    5. दीर्घायु और रोगों से मुक्ति मिलेगी,

    6. खोया हुआ मान-सम्मान और धन-दौलत मिलेगी,

    7. लक्ष्मी माता की कृपा बनी रहेगी,  

    8. शत्रुओं से रक्षा होगी,

    9. मोह-माया से व्यक्ति दूर रहेगा,

    10. बुध और चन्द्रमा से जुड़े सभी दोष समाप्त होंगे।

    (एकादशी में तुलसी माला से जाप करना बहुत ही शुभ माना जाता है। यदि आप जाप माला खरीदने के इच्छुक हैं तो इसे prabhubhakti.in पर खरीद सकते हैं हमारे पास Tulsi Japa Mala किफायती कीमत पर उपलब्ध है।)

    devshayani ekadashi vrat
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    एकादशी व्रत में चावल क्यों नहीं खाने चाहिए? (Ekadashi vrat me chawal kyu nahi khane chahiye?)

    ज्योतिष (Jyotish) की मानें तो चावल में जल तत्व अधिक मौजूद होता है और जल को ही चन्द्रमा (Chandarma) सबसे अधिक प्रभावित करता है। जिस कारण यदि व्यक्ति इस दिन चावल का सेवन करता है तो इससे शरीर में जल तत्व की मात्रा अधिक हो जाएगी। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति का मन विचलित और अत्यधिक चंचल हो जाएगा। वहीँ एकादशी (Ekadashi) के दिन मन और शरीर का सात्विक रहना बहुत जरूरी होता है।  

    वहीँ दूसरी मान्यता एक पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है। दरअसल देवी शक्ति (Devi Shakti) के क्रोध से अपने आप को बचाने के लिए महर्षि मेधा (Maharishi Medha) ने अपने शरीर का त्याग कर दिया था। इसके पश्चात उनके शरीर के सभी अंग धरती में समा गए थे। जिस दिन महर्षि मेधा धरती में समाये वह एकादशी का दिन था।

    माना जाता है क़ि महर्षि मेधा (Maharishi Medha) का जन्म जौ और चावल के रूप में हुआ था जिस कारण उन्हें एक जीव के तौर पर माना जाता है। इसलिए एकादशी के दिन चावल और जौ खाने की सख्त मनाही है।   

    ekadashi ka vrat

    साल 2022 एकादशी कैलेंडर (Year 2022 Ekadashi Calender)

    13-जनवरी, 2022 बृहस्पतिवार
    (शुक्ल पक्ष – पौष मास)

    पुत्रदा एकादशी
    प्रारम्भ – 04:49 PM, Jan 12
    समाप्त – 07:32 PM, Jan 13

    28-जनवरी, 2022 शुक्रवार
    (कृष्ण पक्ष – माघ मास)

    षटतिला एकादशी
    प्रारम्भ – 02:16 AM, Jan 28
    समाप्त – 11:35 PM, Jan 28

    12-फरवरी, 2022 शनिवार
    (शुक्ल पक्ष – माघ मास)

    जया एकादशी
    प्रारम्भ – 01:52 PM, Feb 11
    समाप्त – 04:27 PM, Feb 12

    26-फरवरी, 2022 शनिवार
    (कृष्ण पक्ष – फाल्गुन मास)

    विजया एकादशी
    प्रारम्भ – 10:39 AM, Feb 26
    समाप्त – 08:12 AM, Feb 27

    13-मार्च, 2022 सोमवार
    (शुक्ल पक्ष – फाल्गुन मास)

    आमलकी एकादशी
    प्रारम्भ – 10:21 AM, Mar 13
    समाप्त – 12:05 PM, Mar 14

    28-मार्च, 2022 सोमवार
    (कृष्ण पक्ष – चैत्र मास)

    पापमोचिनी एकादशी
    प्रारम्भ – 06:04 PM, Mar 27
    समाप्त – 04:15 PM, Mar 28

    12-अप्रैल, 2022 मंगलवार
    (शुक्ल पक्ष – चैत्र मास)

    कामदा एकादशी
    प्रारम्भ – 04:30 AM, Apr 12
    समाप्त – 05:02 AM, Apr 13

    26-अप्रैल, 2022 मंगलवार
    (कृष्ण पक्ष – वैशाख मास)

    वरूथिनी एकादशी
    प्रारम्भ – 01:37 AM, Apr 26
    समाप्त – 12:47 AM, Apr 27

    12-मई, 2022 बृहस्पतिवार
    (शुक्ल पक्ष – वैशाख मास)

    मोहिनी एकादशी
    प्रारम्भ – 07:31 PM, May 11
    समाप्त – 06:51 PM, May 12

    26-मई, 2022 बृहस्पतिवार
    (कृष्ण पक्ष – ज्येष्ठ मास)

    अपरा एकादशी
    प्रारम्भ – 10:32 AM, May 25
    समाप्त – 10:54 AM, May 26

    10-जून, 2022 शुक्रवार
    (शुक्ल पक्ष – ज्येष्ठ मास)

    निर्जला एकादशी
    प्रारम्भ – 07:25 AM, Jun 10
    समाप्त – 05:45 AM, Jun 11

    24-जून, 2022 शुक्रवार
    (कृष्ण पक्ष – आषाढ़ मास)

    योगिनी एकादशी
    प्रारम्भ – 09:41 PM, Jun 23
    समाप्त – 11:12 PM, Jun 24

    10-जुलाई, 2022 रविवार
    (शुक्ल पक्ष – आषाढ़ मास)

    देवशयनी एकादशी
    प्रारम्भ – 04:39 PM, July 09
    समाप्त – 02:13 PM, July 10

    24-जुलाई, 2022 रविवार
    (कृष्ण पक्ष – श्रावण मास)

    कामिका एकादशी
    प्रारम्भ – 11:27 AM, July 23
    समाप्त – 01:45 PM, July 24

    08-अगस्त, 2022 सोमवार
    (शुक्ल पक्ष – श्रावण मास)

    श्रावण पुत्रदा एकादशी
    प्रारम्भ – 11:50 PM, Aug 07
    समाप्त – 09:00 PM, Aug 08

    23-अगस्त, 2022 मंगलवार
    (कृष्ण पक्ष – भाद्रपद मास)

    अजा एकादशी
    प्रारम्भ – 03:35 AM, Aug 22
    समाप्त – 06:06 AM, Aug 23

    shattila ekadashi vrat katha
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    06-सितम्बर, 2022 मंगलवार
    (शुक्ल पक्ष – भाद्रपद मास)

    पद्मा एकादशी
    प्रारम्भ – 05:54 AM, Sep 06
    समाप्त – 03:04 AM, Sep 07

    21-सितम्बर, 2022 बुधवार
    (कृष्ण पक्ष – आश्विन मास)

    इन्दिरा एकादशी
    प्रारम्भ – 09:26 PM, Sep 20
    समाप्त – 11:34 PM, Sep 21

    06-अक्टूबर, 2022 बृहस्पतिवार
    (शुक्ल पक्ष – आश्विन मास)

    पापांकुशा एकादशी
    प्रारम्भ – 12:00 PM, Oct 05
    समाप्त – 09:40 AM, Oct 06

    21-अक्टूबर, 2022 शुक्रवार
    (कृष्ण पक्ष – कार्तिक मास)

    रमा एकादशी
    प्रारम्भ – 04:04 PM, Oct 20
    समाप्त – 05:22 PM, Oct 21

    04-नवम्बर, 2022 शुक्रवार
    (शुक्ल पक्ष – कार्तिक मास)

    देवउठनी एकादशी
    प्रारम्भ – 07:30 PM, Nov 03
    समाप्त – 06:08 PM, Nov 04

    20-नवम्बर, 2022 रविवार
    (कृष्ण पक्ष – मार्गशीर्ष मास)

    उत्पन्ना एकादशी
    प्रारम्भ – 10:29 AM, Nov 19
    समाप्त – 10:41 AM, Nov 20

    03-दिसम्बर, 2022 शनिवार
    (शुक्ल पक्ष – मार्गशीर्ष मास)

    मोक्षदा एकादशी
    प्रारम्भ – 05:39 AM, Dec 03
    समाप्त – 05:34 AM, Dec 04

    19-दिसम्बर, 2022 सोमवार
    (कृष्ण पक्ष – पौष मास)

    सफला एकादशी
    प्रारम्भ – 03:32 AM, Dec 19
    समाप्त – 02:32 AM, Dec 20

    एकादशी व्रत कब और कैसे करना चाहिए? | Ekadashi Vrat kab aur kha karna chaiye

    एकादशी व्रत (Ekadashi vrat) हर महीने में दो बार रखा जाता है. एक शुक्ल पक्ष में तो दूसरा कृष्ण पक्ष में. इस व्रत में अन्न और जल कुछ भी ग्रहण नहीं किया जाता है, और इस दिन व्रती सुबह उठकर स्नान करके सच्चे मन से श्री हरि विष्णु की अराधना करती हैं. इसको लेकर पंडित बसंत शर्मा महाराज ने बताया कि एकादशी (Ekadashi) के दिन शाम को फलहारी ग्रहण करना चाहिए.

    एकादशी व्रत में क्या खाते हैं? | Ekadashi Vrat mein kya khaate hai

    इस व्रत में दशमी को रात में भोजन नहीं करना चाहिए. एकादशी (Ekadashi) को सुबह श्री कृष्ण की पूजा की जाती है. इस व्रत में सिर्फ फलों का ही भोग लगाया जाता है. इस दिन केवल जल और फल का ही सेवन किया जाता है.
    ekadashi upvas
    ekadashi upvas

    एकादशी का व्रत रखने के क्या नियम है? | Ekadashi ka Vrat rakhne ke kya niyaam hai

    एकादशी व्रत (Ekadashi vrat)करने वाले लोगों को दशमी यानी एकादशी से एक दिन पहले मांस-मछली, प्याज, मसूर की दाल और शहद जैसे खाद्य-पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन चावल का सेवन भी वर्जित होता है. एकादशी का व्रत(Ekadashi ka vrat)करने वालों को दशमी और Ekadashi दोनों दिन भोग-विलास से दूर पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

    क्या लड़कियां एकादशी का व्रत रख सकती हैं? | Kya ladkiya Ekadashi ka Vrat rakh sakti hai

    शास्त्रों के अनुसार, कुंवारी कन्याएं या पुरुष निर्जला एकादशी का व्रत (Ekadashi ka vrat)रख सकते हैं। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से उन्हें मनचाहा वर का वरदान मिलता है।

    एकादशी व्रत के कितने घंटे हैं? | Ekadashi Vrat ke kitne ghante hai

    एकादशी एक हिंदू धार्मिक अनुष्ठान है जो महीने में दो बार आता है और भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। जो लोग एकादशी का व्रत रखना चाहते हैं वे आम तौर पर एकादशी के दिन सूर्योदय से व्रत शुरू करते हैं और अगले दिन सूर्योदय पर इसे समाप्त करते हैं।

    एकादशी का व्रत किसका होता है? | Ekadashi ka Vrat kiska hota hai

    एकादशी का व्रत (Ekadashi ka vrat) भगवान विष्णु की आराधना को समर्पित होता है। इस एकादशी का व्रत करके श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करना चाहिए। इस दिन विधिपूर्वक जल कलश का दान करने वालों को पूरे साल की एकादशियों का फल मिलता है। इस प्रकार जो इस पवित्र एकादशी का व्रत करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।

    एकादशी के व्रत में चाय पी सकते हैं क्या? | Ekadashi ke vrat mein chai pee sakte hai kya

    हाँ, आप एकादशी व्रत (Ekadashi vrat) में चाय पी सकते हैं। इसमें चाय पीने का कोई विरोध नहीं है।

    एकादशी के व्रत में शाम को क्या खाएं? | Ekadashi ke Vrat mein shaam ko kya khay

    एकादशी व्रत में फल, चीनी, कुट्टू, आलू, साबूदाना, शकरकंद, जैतून, नारियल, दूध, बादाम, अदरक, काली मिर्च, सेंधा नमक आदि का सेवन किया जा सकता है।
    Ekadashi ka khana
    Ekadashi ka khana

    एकादशी व्रत रहने से क्या लाभ होता है? | Ekadashi Vrat rahne se kya laabh hota hai

    श्री हरि विष्णु को प्रसन्न करने के लिए यह दिन दिन विशेष माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश होता है और साधक के पूर्वजों को भी मुक्ति मिलती है। इस एकादशी का महत्व (Ekadashi ka mahatva) इसलिए और भी ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन ही भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया था।
     
     
     
     
     
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