महादेव के असीम भक्त के सामने आये जंगली भेड़िये और सर्पो का झुण्ड

श्रीमद भगवत गीता में श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था की भगवान् हर स्थान पर है , मुझमें आप में , जल में थल में , आकाश में वायु में , कण कण में भगवान् है , बस देखने की दृष्टि होनी चाहिए।

ऐसे ही भगवान् जो हम सभी में है उसकी एक सत्य घटना आज हम आप सभी के सामने प्रस्तुत करने जा रहे है।
बिहार के एक छोटे से गांव में अभय नाम का एक नवयुवक रहा करता था , वह महादेव का असीम भक्त था। अभय रोज़ सुबह मंदिर जाकर पूरे श्रद्धा भाव से पूजा पाठ किया करता , साथ ही हर सोमवार का व्रत किया करता था। अभय अपने माता पिता का इकलौता पुत्र था , वह अपने माता पिता की बड़ी इज़्ज़त किया करता था।

अभय एक प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था , वह दिन रात मन लगा कर पढाई किया करता था। उसके जीवन में किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या आती तो वह उसे बिना किसी से साझा किये सिर्फ महदेव के ऊपर सब छोड़ दिया करता था , उसका प्रबल विश्वास था की महादेव उसके सभी संकट अवश्य ही दूर करेंगे। अभय कभी किसी के लिए कुछ गलत नहीं किया करता था।

अभय को परीक्षा की तैयारी करते हुए काफी समय हो गया था। एक दिन उसके प्रतियोगी परीक्षा की तिथि भी निश्चित हो गयी थी , उसे परीक्षा के लिए पास ही के दुसरे शहर जाना था। कुछ दिन बाद अभय परीक्षा के लिए दुसरे शहर को निकल गया। परीक्षा स्थल पर पहुँच कर अभय ने परीक्षा दी। अभय को पूर्ण उम्मीद थी की उसका परिणाम भी बेहद अच्छा आएगा।

वह ख़ुशी ख़ुशी वापस अपने घर की और रवाना ही गया , परन्तु लौटते हुए उसे रात बहुत हो गयी थी। वह बीच जंगल से गुज़र रहा था तभी उसे आस पास से कुछ बड़ी अजीब सी आवाजें आने लगी , जिन से अभय थोड़ा चौंक गया परन्तु वह बिना रुके आगे की ओर बढ़ रहा था।
अचानक से झाड़ियों के बीच से कुछ जंगली भेडियो ने अभय को चारो ओर से घेर लिया , जिन्हे देख अभय बहुत अधिक भयभीत हो गया।

अभय इस समय अपने स्थान से हिल भी नहीं पा रहा था क्युकी भेड़िये उसे चारो ओर से घेर चुके थे , सभी भेड़िये धीरे धीरे उसकी ओर बढ़ने लगे , जब अभय को कोई मार्ग प्रतीत ना हुआ तो उसने महादेव को याद किया ओर साहयता की गुहार लगायी। तभी फिर जो हुआ उसे देख अभय के होश भी उड़ गए। अचानक से वहाँ कुछ सांपो का झुण्ड आ गया और भेडियो के पैरो से लिपट गए। भेड़िये वहाँ से डर कर भाग गए । अभय को कुछ समज नहीं आ रहा था की इतने सारे सांप आये कहाँ से। कुछ देर बाद उसे समज आया की यह चमत्कार महादेव को स्मरण करने मात्र से हुआ है, महादेव ने ही सांपो को भेज कर मेरी रक्षा की है। घर पर सबको पता चला तो सभी ने मिलकर महादेव को धन्यवाद किया , इसके बाद अभय की आस्था महादेव को लेकर और प्रबल हो गयी।

अभय के संकट की घडी मे सापों के एक झुण्ड ने उसकी प्राण रक्षा की।

NeerajCC
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