जब शेषनाग ने अंध शिव भक्त के पाँव से लिपट कर बचायी उसकी जान

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भगवान को लेकर सभी की आस्था और विश्वास भिन्न भिन्न होता है , कोई भगवान् को पिता के रूप में देख , खुद को उसकी संतान बताता है तो कोई भगवान् को मित्र ही बताता है। और भगवान् के भक्त कुछ है ही इस प्रकार के की अपने भक्ति की सहारे से ही आत्मा का परमात्मा से मिलान करवा ही लेते है।

तो यह कहानी है ऐसे ही काशी के गंगा घाट पर रहने वाले अन्ध शिव भक्त की जिनका नाम भोला था ।भोला जन्म से अंधा था और माता
पिता को ही बचपन में खो दिया था तो क्रूर संसार में जब भोला अकेला था तो उसने भगवान शिव का हाथ थामा। भोला प्रात
उठकर रोज गंगा नदी में स्नान करने जाता तो लोग कहा करते थे कि मत जा भोला, तुझे दिखता तो है नहीं किसी दिन डूब
जाएगा, तो भोला कहता मुझे नहीं दिखता तो क्या हुआ भोलेनाथ को तो दिखता है ना वह बचा लेंगे। भोला का भाव महादेर के प्रति कुछ अलग ही था। दिन भर शिव का नाम लेकर उन्हें याद करता। परंतु जब कुछ गलत होता तो शिव का नाम लेकर उन पर चिल्लाता उन्हें डांट
देता।

भोला के भाव व भक्ति शिव के प्रति कुछ भिन्न ही थी। इस कारण लोगों से पागल भी कहने लगे थे। पर भोला ने कभी इन बातों
पर ना ध्यान दिया ना दिल में रखकर बुरा लगाया । वह खुद में और शिव की भक्ति में खुश था। एक रोज जब भोला पूजा कर घर
की ओर लौट रहा था तब भोला को पता चला कि शहर से बाहर आज शाम शिव सत्संग है, तो भोला ने सोच लिया कि वह आज
सत्संग में जाएगा।

घर पहुंचकर अपना थैला जिसमें शिवजी की एक तस्वीर और कुछ फल थे व अपनी लाठी उठाई और चल दिया सत्संग के लिए । शहर से बाहर था एक रेलवे फाटक भोला उसे पार करने लगा। पर वह इस बात से अनजान था कि दूसरी ओर से तेजी से बढ़ती हुई ट्रेन भोला की तरफ चली आ रही है। आसपास के लोगों ने चिल्लाकर भोला को पीछे हटने को कहा पर भोला ट्रेन की आवाज में कुछ सुनने में असमर्थ था। भरी भीड़ में से किसी ने कहा देखो एक साँप उसकी ओर तेजी से बढ़ रहा है l आसपास की भीड़ ने मान लिया कि आज भोला की जान नहीं बचेगी एक ओर से ट्रेन दूसरी ओर से साँप । और फिर लोगों ने कुछ ऐसा देखा जिसे देखकर भी माना ना जा सके।

भोला के दोनों पैरों में रस्सी की तरह लिपट गया और जब भोला ने आगे कदम बढ़ाया तो वह गिर गया और ट्रेन भोला के बगल से निकल गई। ट्रेन के निकलते ही सांप भी भोला के पैरों से अलग होकर कहीं दूर निकल गया तो यह देखकर सभी मौजूद लोग अचंभित रह गए। यह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जब लोगों ने बोला, वो सब बताया तो वह मुस्कुराया और बोला मेरी रक्षा किसी और ने नहीं भगवान शिव व उनके भेजे शेषनाग ने की है।हां, यह सत्य है। मैं जन्म से अंधा हूं। मैं कुछ देख नहीं पाता परंतु शिव तो सब देखता है,मेरा सुख-दुख सब मैं अपनी रक्षा क्या करूंगा। शिव है ना मेरी रक्षा करने वाले और जय महादेव बोल कर वहां से निकल गया , भोला की भक्ति और महादेव के प्रति आस्था व विश्वास को देख सभी हैरानी में पड़ गए।

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