जब स्वयं महादेव ने स्वप्न में आकर पुजारी को बताया अपने ज़मीन के नीचे दबे होने का राज़ ।

उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर परिसर में एक ऐसी घटना हुई जिसे जिसने भी देखा वह हैरत में पड़ गया।

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यह घटना है मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर की जो की शिप्रा नदी के किनारे बसा हुआ है , यहाँ 12 वर्षो के अंतराल से सिंघस्थ कुम्भ का आयोजन किया जाता है। उज्जैन में 12 जोय्तिर्लिंगो में से एक महाकालेश्वर शिवलिंग स्थापित है। पुराणिक कथाओ के अनुसार माना जाता है की यहाँ शिवलिंग में स्वयं महादेव भू रूप में विराजमान है ,यहाँ का वातावरण चित को शांति प्रदान करने वाला है।

महाकालेश्वर मंदिर में कई वर्षो से एक महंत जी पूजा पाठ किया करते थे , लोग बताते है की इतने वर्षो से महादेव की सेवा करते हुए महंत जी का महादेव के साथ सभी से भिन्न एक रिश्ता बन गया है।

महंत जी पूरी आस्था निष्ठा के साथ महादेव की सेवा प्रत्येक दिन किया करते थे , लोग महादेव के प्रति महंत जी के भाव देख अचंभित रह जाया करते थे। और हाल ही में इसी क्रूर कोरोना काल में महंत जी का निधन भी हो गया। परन्तु महंत जी के निधन के बाद एक ऐसा रहस्य खुल कर सामने आया है जिसे देख सभी की आँखे फटी की फटी रह गयी।

आज से कुछ माह पूर्व महंत जी जब बीमारियों से जूझ रहे थे ,ऐसे कठिन समय में भी महंत जी महादेव का जा[प करना नहीं छोड़ा करते थे , एक रात जब महंत जी शयन अवस्था में थे तब उन्हें स्वप्न में महादेव ने दर्शन दिए परन्तु बिना कुछ बोले वह चले गए।

अगली सुबह महंत जी ने यह बात उन सभी को बतायी जो उस समय महंत जी की देख रेख में लगे हुए थे , सभी ने इस बात को साधारणस्वप्न बताकर महंत जी को सब कुछ भुलाने की सलाह दी। परन्तु महंत जी का घूड़ विश्वास था की यह कोई साधारण स्वप्न नहीं था।

अगली रात जब महंत जी फिर से शयन अवस्था में गए तब फिर स्वप्न में महादेव ने आकर दर्शन दिए , महंत जी ने फिर सभी को जब यह बात बताई फिर भी किसी ने उनकी बात पर किसी ने यकीन नहीं किया।

ये सिलसिला धीरे धीरे रोज़ का हो गया था जा भी महंत जी शयन अवस्था में जाते तब महादेव उनके स्वप्न में आया करते।
और एक दिन तो ऐसा आया जहाँ महादेव ने स्वप्न में आकर महंत जी से कहा की मैं मंदिर परिसर में ही दक्षिण दिशा में ज़मीन के नीचे कई वर्षो से दबा हुआ हूँ और मैं चाहता हूँ की आप मुझे बहार निकलवाए।
इतनी बात कहकर महादेव स्वपन से विलुप्त हो गए।

महंत जी की आँख खुल गयी उन्होंने तुरंत ही मंदिर के कुछ लोगो को बुलाया और सारी बात बताकर , दक्षिण दिशा से महादेव को बहार निकलने की बात कही , परन्तु वहाँ सभी ने उन्हें एक बीमार वृद्ध व्यक्ति समजकर किसी ने उनकी बात पर भरोसा नहीं किया।

लेकिन महंत जी का विश्वास अडिग था की मादेव ने आकर स्वप्न में यदि कुछ का है उसका अर्थ कुछ ना कुछ तो अवश्य है।
इसी कारणवश महंत जी ने मंदिर प्रशासन को सारी बात बताने का निर्णय लिया परन्तु जा तक वह किसी को यह बात बता पाते उससे पहले काल चक्र में उनका निधन हो गया।

महंत जी के निधन के साथ महादेव के मंदिर परिसर में दक्षिण दिशा में दबे होने की बात भी दब कर रह गयी।

परन्तु हाल ही में मंदिर प्रशसन द्वारा विस्तारीकरण का कार्य शुरू करवाया गया , तभी ऐसा चमत्कार हुआ जिसे देख सभी के होश उड़ गए। जैसे ही विस्तारीकरण कार्य हेतु मजदूरों ने मंदिर परिसर के दक्षिण दिशा में खुदाई का कार्य करना प्रारम्भ किया।

खुदाई के दौरान धरातल से कुछ 2 फुट नीचे ही मजदूरों को एक विशाल काले रंग का विशेष पत्थर दिखाई पड़ा सभी ने उसे बहार निकला तो ज्ञात हुआ की यह कोई साधारण पत्थर नहीं है , यह तो साक्षात् शिवलिंग है।

मंदिर परिसर से शिवलिंग मिलने की खबर पूरे उज्जैन में आ की तरह फ़ैल गयी , तुरंत ही वहाँ पुरातत्व विभाग का समूह भी पहुँच गया।
खुदाई फिर से शुरू की गई तब वहाँ से दसवीं शताब्दी के विष्णु बघवान की मूर्ति भी मिली। यह सब देख वहाँ मौजूद लोग आस्था से झूम ऊठे।

और तभी वहाँ उपस्तिथ लोगो में से किसी ने कुछ माह पूर्व महंत जी को आये स्वप्न के बारे में सभी को याद दिलाया। जिस जिस ने महंत जी को बातो को युहीं हवा में उड़ा दिया था उन सभी को अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ , और साथ ही भक्तो ने महंत जी को याद कर उनको आस्था भाव को भी बहुत सराहा।

ज़मीन से खुदाई में मिली 10वीं शताब्दी की विष्णु भगवान् की चतुर्भुजी प्रतिमा स्थानक मुद्रा में है साथ ही 9वी शताब्दी के शिवलिंग की लम्बाई 5 है यह जितनी धरातल के ऊपर है उतनी ही ज़मीन के नीचे भी है।

आज के छल कपट से भरे हुए ज़माने के बीच महंत जी की प्रबल आस्था जिसके सामने प्रभु को भी स्वयं आना पड़ा उसे सभी ने शत शत नमन किया।

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जब एक शातिर चोर के सामने आये महादेव

बहुत समय पुराने बात है , पूर्वी भारत के इलाके में एक भूरा नाम का चोर रहता था। आस पास का कोई ऐसा धनि व्यक्ति न था जिसके यहाँ भूरा ने चोरी ना की हो इसी कारणवश लोग उसके नाम से भी डरते थे।  भूरा इस संसार में पूर्ण रूप से अकेला था , उसने चोरियां कर करके अपने पास बहुत धन जमा कर लिया था।  भूरा चोरी करके जो भी लाता उसे वह पास के जंगल में लेजा कर एक पुरानी झोपडी के अंदर मिटटी के मटको में भरकर ज़मीन के नीचे दबा दिया करता था।  देखते देखते भूरा ने बहुत धन एकत्रित कर लिया था।  
भूरा कोई भी गलत काम करने से पहले कुछ भी नहीं सोचा करता था , लोग भी उसे निर्दयी कहकर पुकारने लगे थे।
भूरा चोरियों को इस प्रकार अंजाम दिया करता की किसी को कोई सबूत नहीं मिलता था , कोई भी कोतवाल आज तक उसे पकड़ने में भी कामयाब न हो सका था।  कुछ ही समय पश्चात चोरी करना भूरा की जरूरत नहीं थी अब उसे इस काम में आनंद की प्राप्ति होने लगी थी।  
वह यही कदापि नहीं सोचा करता था की उसके इस गलत कृत्य का किसी पर केसा प्रभाव पड़ता है या पड़ेगा।
लोग परेशान हो रहे थे। वहाँ कोई ऐसा व्यक्ति न था जो अपना घर रात तो क्या दिन में भी खाली छोड़ दे।  भूरा सभी यहाँ चोरी कर चूका था तो उसने कोई नया स्थान ढूंढना शुरू किया , तब उसे सूर्यास्त के समय एक आश्रम दिखाई दिया , भूरा ने सोचा की यहाँ रहने वाले साधु दिन भर भिक्षा मांगते है इनके पास अवश्य ही बहुत सा धन होगा।  फिर वह वहाँ से चला गया और चोरी करने की योजना बनाने लगा।  दो दिन तक उसने अपनी योजना तैयार की और रात में श्री करने आश्रम में जा पंहुचा।  आश्रम का मुआइना किया और के बड़े से कक्ष में जा कर कीमती सामान ढूंढ़ने लगा , उसी कक्ष में एक साधु ध्यान मुद्रा में बैठे हुए थे , भूरा की नज़र उन पर न पड़ी।  सामन उठाते हुए एक चांदी का कटोरा भूरा के हाथ से चटक कर ज़मीन पर गिर गया जिससे साधु का ध्यान टूट गया और उनकी आँखे खुल गयी।  भूरा डर गया की अब वहाँ अवश्य ही पकड़ा जाएगा।  ध्यान टूटने के कारन साधु भी क्रोध में थे उन्होंने भूरा को पकड़ा नहीं बल्कि उन्होंने भूरा को श्राप दिया की आज तक तूने जिसके यहाँ से जो भी चोरी करके एकत्र किया है वह सब मिटटी हो जायेगा।  
इतना सुन कर भूरा डरकर वहाँ से भाग खड़ा हुआ।  भूरा वापस उसी झोपडी में आया जहाँ उसने सारा धन छुपाया हुआ था।  और थक कर सो गया जब सुबह उठा तो पहले उसने देखा की रात में जो हुआ उस कारन से कोई मुझे ढूंढ तो नहीं रहा।  परन्तु कोई बाहर नहीं था, भूरा का मन जो भय से भरा हुआ था वह शांत हो गया , तब उसे साधु से मिला हुआ श्राप याद आया परन्तु उसने सोचा ऐसा कुछ हो ही नहीं सकता और साधु से मिले श्राप को हवा में उड़ा दिया।  और दूसरी चोरी की योजना बनाने में लग गया , और योजना बनाकर चोरी करने निकल गया।  पर धीरे धीरे कुछ ऐसा होने लगा की अब भूरा जब भी किसी के यहाँ चोरी करने जाता तो या तो उसे वहाँ उसे कुछ भी नहीं मिलता ,या फिर वह पकड़ लिया जाता।  एक दो बार तो भूरा को लोगो ने पकड़ के मारा भी।  भूरा को समज नहीं आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है।  
उसने सोचा की ठीक है अब में कुछ दिन बड़ी नहीं छोटी चोरियां करता हूँ , परन्तु नतीजा वही था वह हर प्रकार से नाकामयाब हो रहा था।
तब उसे साधु से मिला हुआ श्राप याद आया उसे अब साधु की बात सच लग रही थी।  वह भागा भागा जंगल में झोपडी में जा पहुंचा और ज़मीन के नीचे से सारे मटके निकाले , और उनके मुँह पर बंधा हुआ कपडा हटाने लगा और जब वह कपडा नहीं हटा तो भूरा ने एक एक करके मटके तोड़ने लगा सब मटको से मात्र मिटटी ही निकल रही थी।

यह सब देख भूरा के चेहरे का रंग फीखा पड़ने लगा था।
भूरा ने आखिरी मटका उठा कर गुस्से से ज़मीन पर पटका तब जो हुआ उसे जान सभी हैरान रह गए। उस मटके से एक बड़ा ही चमकता हुआ शिवलिंग निकला और ज़मीन पर कुछ ऐसे गिरा जैसे किसी ने शिवलिंग की स्थापना की हो।  भूरा ये देख स्वयं भी आश्चर्य में आ गया, की यह कैसे हो सकता है।  शिवलिंग का तेज कुछ ऐसा था की भूरा की आँख भी नहीं खुल पा रही थी।

 भूरा ने शिवलिंग को उठाने का प्रयास किया परन्तु आकर में छोटा दिखने वाला शिवलिंग भार में बहुत अधिक था।  भूरा को समज आ गया की महादेव मुझसे नाराज़ हो चुके है इसीलिए साधु के श्राप द्वारा मेरा चुराया धन नष्ट करा दिया , और खुद उस धन की जगह विराजमान हो गए , और मुझे ऐसा तेज दे रहे की में उनसे आँख भी ही मिला पा रहा हूँ।  उसे अपनी गलती का अहसास हो चूका था।
वहाँ तुरंत ही भाग कर आश्रम में उन्ही साधु के पास पहुंचा ,उनसे माफ़ी मांगी और उन्हें सब कुछ विस्तार से बताया जिस पर साधु मुस्कुराने लगे।

 भूरा ने कहा आप हंस रहे है उधर महादेव मुझसे क्रोधित हो उठे है में उन्हें कैसे मनाऊ कोई मार्ग प्रदर्शित करे।  इस पर साधु बोले की सब महादेव की माया है तुम अब एक काम करो तुम्हारे कारन मेरा तप भंग हुआ था अब बारी तुम्हारी है तो जाओ महादेव के समक्ष जाकर तप करो प्रभु का क्रोध अवश्य शांत हो जायेगा।  भूरा वापस झोपडी की ओर लौटते हुए सोचने लगा यह तो बहुत आसान मार्ग है तप करने में कौन सी बड़ी बात है।  वहाँ वापस आकर ध्यान मुद्रा में बैठ गया परन्तु वहाँ ध्यान लगा नहीं पा रहा था , कभी उसे गर्मी से आने वाला पसीना परेशन करता तो कभी छोटे छोटे कीड़े काटते ऐसी अनेक समस्याओं के कारन वह ध्यान नहीं लगा पा रहा था।  

पर भूरा ने हार नहीं मानी वहाँ निरंतर प्रयास करता रहा तीन दिन तक भूरा के प्रयास जारी रहे तब एक दिन सूर्योदय के दिन शिवलिंग से निकलने वाली ज्योति ओर तेज हो गयी और भूरा को एक आवाज आयी की पुत्र आँख खोलो।  भूरा ने आँख खोली तो सामने कोई और नहीं स्वयं महादेव खड़े हुए है , महादेव बोले की तुम्हे अपनी गलती का पश्चाताप है ये देख मुझे बहुत ख़ुशी है।  मैं तुम से प्रसन्न हूँ  सदैव सत्य के मार्ग पर चलना।  इतना बोल कर महादेव लुप्त हो गए।

 भूरा आश्चर्य में रह  गया  की महादेव ने स्वयं उसे दर्शन दिए , उसके बाद भूरा का हिर्दय परिवर्तन हो गया वहाँ पूर्ण रूप से प्रभु की भक्ति में लीन हो गया बाद में भूरा ने संन्यास भी ले लिया जिसके बाद किसी को पता नहीं चला की वह कहाँ गया परन्तु भूरा ने जाने से पहले उस शिवलिंग को झोपडी से निकल जंगल में नदी किनारे पेड़ के नीचे स्थापित कर दिया।  इस प्रकार महादेव ने स्वयं आकर एक शातिर चोर को सही मार्ग प्रदर्शित किया। लोगो ने जब उस शिवलिंग का सच जाना तो वहाँ लोगो की भीड़ लगने लगी धीरे धीरे मान्यता बन गई की वहाँ जाकर महादेव से जो भी मनोकामना की जाये वो अस्वश्य ही पूर्ण होगी।

और किसी को किसी भी गलती का प्रायश्चित करना होता तो सभी लोग वही आकर किया करते , बड़े बड़े मुज़रिम भी महादेव के आगे आकर झूट नहीं बोल पाते थे। 

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सावन में कर ले ये 4 उपाय दूर हो जाएँगी साऱी परेशानी।

[5:40 PM, 8/6/2021] ns8909924: सावन का महीना महादेव को अति प्रिय है. इस महीने में वर्षा ऋतु अपना पूरा जोर लगाती है और हरी भरी प्रकृति मुस्कुराती सी नजर आती है. चारों ओर माहौल शिवमय दिखाई देता है. ज्योतिष विशेषज्ञों की मानें तो इस माह में यदि भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के थोड़े भी प्रयास करें तो महादेव की कृपा उन्हें प्राप्त हो जाती है. ऐसे में उनके मन में जो भी मनोकामना होती है, वो आसानी से पूर्ण होती है. यदि महादेव के भक्त सावन के महीने में कुछ विशेष उपाय करें तो उनकी सोई किस्मत भी जाग सकती है, वे मालामाल हो सकते हैं और हर वो मन्नत पूरी हो सकती है, जिसके लिए वो सालों से प्रतीक्षा कर रहे हैं. 25 जुलाई, रविवार से इस बार सावन की शुरुआत हो चुकी है . ऐसे में आप अपनी समस्या के हिसाब से इन उपायों को आजमा सकते हैं.

  1. सावन के महीने में छोटा सा पारद शिवलिंग लेकर आएं और मंदिर में स्थापित करें. हर रोज इसे दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से स्नान कराएं. ऐसा करने से गरीबी दूर होती है और यदि कोई मनोकामना मन में है, तो वो पूर्ण होती है. पारद शिवलिंग को बहुत ही शक्तिशाली माना जाता है. लेकिन ध्यान रहे​ कि अगर ये घर में है, तो इसकी पूजा जरूर की जानी चाहिए.
  2. यदि लंबे समय से घर में आर्थिक तंगी झेल रहे हैं तो सावन के सोमवार के दिन बेल के पेड़ के नीचे खड़े होकर किसी जरूरतमंद को खीर और घी का दान करें. ऐसा करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और व्यक्ति के घर में धन धान्य की कोई कमी नहीं रहती.
  3. यदि वैवाहिक जीवन में किसी तरह की परेशानी चल रही है तो सावन भर जल में थोड़ा केसर डालकर महादेव का जलाभिषेक करें. इसके अलावा सावन के सोमवार या मंगलवार के दिन सुहाग का सामान किसी सुहागिन को दें. इससे भी वैवाहिक जीवन के संकट दूर होते हैं.
  4. यदि कोई व्यक्ति गृह कलेश , धन सम्बन्धी , विवाह संबंधी किसी भी परेशानी से झूझ रहा है वह अपने घर में नर्मदेश्वर शिवलिंग या शिवलिंग कलश की स्तापना कर के सारे संकटो से दूर हो सकता है , इनकी प्राण प्रतिस्टा की आवश्यकता नहीं होती है।

महादेव ने नास्तिक भक्त को दिखाया ऐसा चमत्कार, जानकर उड़ जाएंगें होश

हैलो दोस्तों आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक नास्तिक भक्त की चमत्कारी कहानी जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। 

सूरत शहर में रहने वाली जिगना मोदी एक बिजनेस वुमन है। जिसने हमारे साथ एक सच्ची कहानी को साझा किया है। दरअसल, जिगना ने अपने माता-पिता की पसंद से शादी कर ली थी। जिसके कुछ ही साल बाद उसके साथ अत्याचार होने लगे। ससुराल वालों का उसके साथ व्यवहार बहुत बुरा हो गया। इतना ही नहीं, वह लोग उसको ताने कसते थे। जिगना के लिए वहां पूरी जिंदगी गुजरा पाना काफी मुश्किल हो गया। जिगना की मां ने कहा कि, बेटा भगवान सब ठीक कर देंगे, लेकिन जिगना बचपन से ही भगवानों पर यकीन नहीं करती थी। कई बार तो वह भगवान के खिलाफ विरोध करने लगती थी। एक बार नौबत यहां तक आ गई कि, जब जिगना का पति उसे पूजा-पाठ करने के लिए कहता था तब वह उससे भी झगड़ने लगती थी। शादी को 5 साल बीत जाने के बाद एक दिन जिगना का पति कार एक्सीडेंट में जान गवां बैठा। जिसके बाद जिगना पूरी तरह से टूट गई और खुद को संभालने की कोशिश करने लगे।

कुछ समय बाद जिगना ने प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरु कर दिया। वहां पर जिगना की एक दोस्त बनी हेतल। कम समय में उन दोनों की दोस्ती काफी पक्की हो गई। एक बार हेतल ने जिगना से कहा कि, चलो हम उज्जैन चलते हैं महाकाल के दर्शन करते हैं। कहते हैं कि, महाकाल के दर्शन करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती है, लेकिन जिगना ने वहां जाने से मना कर दिया। फिर काफी दिनों तक हेतल के कहने पर जिगना को वहां जाना पड़ा। जिगना 20 साल बाद मंदिर जा रही थी। उसका भगवान पर से विश्वास बिल्कुल उठ गया था, लेकिन हेतल के कहने पर घूमने के लिए चली गई। उज्जैन महाकाल मंदिर में पहुंचने के बाद हेतल और जिगना मंदिर के अंदर पहुंच गई। मंदिर से पूजा करने के बाद जब जिगना हेतल कहीं पर घूमने के लिए निकली तो जिगना का बहुत बुरा एक्सीडेंट हुआ। समय रहते हेतल जिगना को अस्पताल लेकर पहुंची। डॉक्टर्स ने जब जिगना की हालत देखी तो कहा कि, इसको बचा पाना काफी मुश्किल है अब तो भगवान ही इसको जीवन दान दे सकते है।

जिस समय जिगना i.c.u में जिंदगी और मौत से लड़ रही थी उस समय महादेव स्वयं रूप में उसके पास खड़े  हो गए। जिगना ने कहा कि, क्या आप सच में भगवान हो या फिर कोई इंसान हो। फिर महादेव ने मुस्कुराते हुए कहा बेटी तुमने तो मुझे कभी भगवान माना ही नहीं, लेकिन तुम तो मेरी ही बेटी हो। महादेव की यह बात सुनकर जिगना काफी बुरी तरह से रोने लगी और कहा मुझे माफ कर दो भगवान मुझे लगता था कि,आप इस दुनिया में हो ही नहीं। तब महादेव ने कहा कि, मैं कण-कण में वास करता हूं। बस बात है नज़रिये कि, जो लोग मुझे जिस तरीके से पाना चाहते हैं मैं उसी तरीके से उनके पास पहुंचता हूं। तुमने कभी भी भगवान की कृपा को महसूस नहीं किया, लेकिन आज से तुम भगवान को मानना शुरु कर दोगी। जिगना महादेव से कहने लगी कि, क्या मैं ठीक हो भी पाऊंगी या नहीं, इस पर महादेव ने कहा कि, तुम आज से ठीक हो जाएगी। यह कहकर महादेव बाहर चले गये। कुछ देर बाद जब जिगना के घरवाले अस्पताल में पहुंचे तो जिगना चलने-फिरने लगी और उसको मामूली सी चोट आई थी।

डॉक्टर्स और हेतल यह सब देखकर हैरान हो गए कि कुछ देर पहले ही जिगना का इतना बड़ा एक्सीडेंट हुआ और अब अचानक से यह इतनी जल्दी ठीक कैसे हो गई। हेतल ने जिगना के आगे भी यही सवाल रखा। फिर सभी के सामने जिगना ने महादेव की कहानी सभी को बताई और कहा कि, यह सबक था मेरी जिंदगी का। महादेव की इतनी कृपा होने के बावजूद भी मैं कभी उनकी शक्तियों को नहीं समझ पाई। जिगना में इतना बड़ा बदलाव देखकर जिगना के घरवाले हैरान रह गए और जिगना से बिना सवाल जवाब किए उसको घर ले आए। जब से ही जिगना हर रोज़ महादेव के मंदिर में जाती है व पूजा-पाठ करके ही भोजन खाती है। अब जिगना महादेव की परम भक्त बन गई है।

हनुमान जी ने अपने भक्त को दिया चमत्कारी वरदान, रातों-रात बदल डाली किस्मत

हैलो दोस्तों आपका हमारा यूट्यूब चैनल में स्वागत  है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं एक हैरतअंगेज कहानी जिसे सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे और उस व्यक्ति से मिलने की इच्छा रखेंगें जिसपर भगवान ने अपनी असीम कृपा की है। कहते हैं कि, कलयुग में बढ़ते पापों की वजह से धरती पर भगवान प्रकट नहीं होते, लेकिन हमारी यह सच्ची कहानी सुनकर आपको इस बात पर यकीन हो जाएगा कि, भगवान अपने भक्त के लिए कही भी पहुंच सकते हैं। फिर चाहे कलयुग हो या फिर सतयुग अपनी भक्त की मदद करने के लिए भगवान दौड़े-दौड़े चले आते हैं।

आपने यह पढ़ा और सुना होगा कि, घमंड रावण का नहीं रहा तो इंसान का क्या रहेगा। जी हां, एक ऐसी ही कहावत के साथ हम आपको सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहे हैं। यह कहानी यू.पी के अलीगढ़ में रहने वाले सावंत सोनी की है। जो पेशे से 5 स्टार होटल में वेटर था। यह नौकरी सावंत काफी सालों से कर रहा था। इसके अलावा सावंत हनुमान जी का परम भक्त था। बचपन से ही उसको हनुमान जी की भक्ति करने में आनंद आता था। वह अपने छोटे से छोटे काम को संपन्न करने से पहले हनुमान जी का नाम लेता था। कई साल हनुमान जी की भक्ति में बीतते चले गए। फिर एक बार उसकी जिंदगी में ऐसा चमत्कार हुआ जिसके बाद से सावंत आज बुलंदियां हासिल कर रहा है। सावंत ने अपनी कहानी को हमारे साथ साझा करते हुए सबसे पहली बात यह बोली कि, आधुनिकता युग में आज हम भगवान के चमत्कारों को अंधविश्वास का नाम देते हैं, लेकिन सच्चाई तो यह कि, यदि दिल से आप भगवान को बुलाते हो तो वह स्वयं रूप में आपके सामने आकर आपकी मदद करते हैं। किसी को मेरी इस कहानी पर यकीन हो या ना हो, लेकिन आप लोगों के माध्यम से मैं यह कहानी उन लोगों तक पहुंचाना चाहता हूं जो भगवानों के चमत्कारों को नज़रअंदाज करके अंधविश्वास का नाम देते है, तो चलिए मैं बताता हूं कि, आखिर मेरे सामने हनुमान जी क्यों प्रकट हुए और ऐसी कौन-सी वस्तु मुझे देकर गए है जिसने मेरी जिंदगी बदल दी।

सावंत ने आगे बताया कि, मैं 8 साल से होटल लाइन में काम कर रहा हू्ं। मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं। मेरे घर में 5 लोग है दो बहन एक मैं और मेरे माता-पिता। पिताजी काफी बुजुर्ग हैं और एक बहन की शादी हो चुकी है। दूसरी बहन की शादी की टेंशन लिए मैं आगे बढ़ने की कोशिशों में लगा रहता हूंं। एक बार सावंत के साथ ऐसी घटना घटी जिसे जानकर आप भी हैरान रह जाओगे। सावंत ने बताया कि, 5 साल बाद होटल का मैनेजर की बदली हुई। पहले वाले मैनेजर से मेरा व्यवहार काफी अच्छा था, लेकिन नए मैनेजर  के साथ मेरी अक्सर अनबन रहती थी। 5 साल के अनुभव के बावजूद भी वह मेरी गलतियां किसी ना किसी काम में निकालने लगा। एक बार तो उसके साथ मेरी हाथपाई हो गई और उसने मुझे नौकरी से निकाल दिया। जिसके बाद मेरी आर्थिक स्थिति काफी खराब होती चली गई व हालत ऐसे हो गए थे कि, मुझे कही भी नौकरी नहीं मिल रही थी। हर तरफ से निराशा हाथ लग रही थी। फिर एक दिन किसी बडी कंपनी में नौकरी की तलाश में गया वहां भी मुझे नहीं रखा गया। उस दिन मैं काफी हताश होकर हनुमान जी के मंदिर में जाकर अंदर ही अंदर रोने लगा।

जिसके कुछ देर बाद वहां पर मुझे हनुमान जी स्वयं रूप में दिखे यह देखकर पहले तो मुझे ऐसा लगा कि, यह कोई इंसान है जो हनुमान जी के वस्त्र पहनकर मेरे साथ बैठ गए, लेकिन उनके चेहरे की चमक बता रही थी कि, वह साधारण इंसान नहीं बल्कि भगवान हैं। इसके बाद हनुमान जी ने मुझसे पूछा कि, बेटा क्यों इतना हताश है मैं जानता हूं कि, तेरे पास ना नौकरी है ना पैसा है, लेकिन विश्वास तो है जो तूने मुझपर बना रखा है। हनुमान जी की यह सब बातें सुनकर सावंत उनके पैरों पर अपना माथा टेक कर रोने लगा कि, भगवान मेरा उद्धार करो मैं इस समय काफी दुखी और परेशान हूं। यह सुनकर हनुमान जी चमकने वाला पत्थर सावंत को दिया। कहा कि, बेटा इसे तुझे अपने पास तब तक रखना है जब तक तू इस धरती पर है जिस दिन तू यहां नहीं रहेगा यह पत्थर खुद ब खुद गायब हो जाएगा, इसलिए इसको हमेशा संभालकर अपने पास रखना। हनुमान जी की ये सब बातें सुनकर सावंत को हैरानी हुई और उनसे पूछा कि, हनुमान जी क्या सच में मेरी सारी परेशानियां दूर हो जाएगी। इसके बाद हनुमान जी मुस्कुराए और बोले बेटा अब तेरी जिंदगी में बहुत बड़ा चमत्कार होने वाला है। इसके बाद सावंत ने जैसे ही हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करने को नीचे झुका वैसे ही अचानक से हनुमान जी गायब हो गए। यह देखकर सावंत चौंक गया और उस चमत्कारी पत्थर को लेकर घर चला गया। फिर घर पहुंचकर सावंत ने सारी बातें अपने घरवालों को बताई, लेकिन किसी ने भी सावंत की बात पर यकीन नहीं किया और हंसने लगे।

इसके बाद सावंत ने अपने कमरे में पत्थर को मंदिर के अंदर रखा और अगली ही सुबह सावंत भगवानों की पूजा के साथ उस पत्थर को भी पूजने लगा और फिर नौकरी की तलाश में चला गया। अचानक ही सावंत का एक पुराना दोस्त मिला जोकि, एक होटल में काम करता था। उसने सावंत की नौकरी की बात अपने होटल में की। वहां पर इंटरव्यू देने के बाद उसकी नौकरी लग गई। सावंत के लिए सबसे अच्छी बात यह थी कि, उसके पुराने होटल का मैनेजर इस नए होटल में मैनेजर था। यह बात सुनकर सावंत काफी खुश हुआ। धीरे-धीरे समय बीतता गया और सावंत की जिंदगी में नई-नई खुशियां आने लगी। इतना ही नहीं,  यह बात सुनकर आपको हैरानी होगी कि, आज सावंत का खुद का होटल है। एक मामूली सा वेटर आज होटल का मालिक है। इसके पीछे की वजह सिर्फ और सिर्फ हनुमान जी कृपा है। आज सावंत खुशहाली जीवन बीता रहा है। जिसको वह शब्दों में बयां नहीं कर पाता।

जब भूत से अपने भक्त की रक्षा करने पहुंचे बजरंग बलि।

भूत पिसाच निकट नहीं आवे ,महावीर जब नाम सुनावे ” अर्थात कोई नकारात्मक शक्ति आपके पास भी नहीं आ सकती मात्र हनुमान जी का नाम लेने से।  इसका जिवंत उद्धरण देखने को मिला हमें आंध्र  प्रदेश के एक गांव गंतुर जिले में जहाँ  सौरभ नाम का एक व्यक्ति रहता था , जो की एक मिठाई की दूकान चलाया करता था , सौरभ बचपन से ही हनुमान जी का अनन्य भक्त था इसी कारणवश सौरभ ने अपनी दूकान का नाम भी हनुमान जी के नाम से रखा।  वह दिन रात हनुमान जी की भक्ति में लगा रहता , हर मंगलवार व्रत किया करता किसी प्रकार का संकट क्यों न हो वह सहायता हेतु मात्र हनुमान  जी को याद किआ करता और उन्हें ही अपना संकट बताया करता।  आस पास के लोगो के बीच सौरभ की हनुमान जी के प्रति आस्था अक्सर चर्चा का विषय बनी रहती थी। सदैव सुखी रहने वाले सौरभ के ऊपर किस प्रकार का दुःख आने वाला था इससे वह स्वयं भी अनजान था।  


एक दिन जब एक सौरभ विवाह समारोह से लौट रहा था तब उसकी गाडी बीच मार्ग में बंद हो गयी उसने गाडी को चालू करने का बहुत प्रयास किया परन्तु वह सफल ना हुआ।  तब उसने गाडी को धक्का देकर आगे बढ़ाना शुरू किया तभी उसे प्रतीत हुआ की जैसे किसी ने उसके दोनों पैर पकड़ लिए हो, उसने  आगे बढ़ने का प्रयास  किया परन्तु वह असमर्थ था पैरो को पकड़ने वाला बल बहुत ज्यादा था।  तभी उसे गाड़ी पर दो बड़े हाथो के निशान दिखाई दिए वह इन सब चीज़ो को अनदेखा कर आगे बढ़ने लगा तभी उसे अपने आगे एक परछाई दिखाई  दी जो उसे आगे बढ़ने से रोक रही थी।  सौरभ भयभीत हो गया उसे कुछ समज नहीं आ रहा था की उसके साथ क्या हो रहा है और वह करे तो क्या करे।


उसने डरते हुए हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए बजरंगबली को याद करना शुरू किया , और परछाई उसे अब भी आगे बढ़ने से रोक रही थी , अचानक से सौरभ को महसूस हुआ की कोई अदृश्य शक्ति उसका गला दबा रही है। सौरभ की साँस घुटने लगी तब उसने चिल्ला कर बजरंग बलि से मदद की गुहार लगायी।  तभी वहाँ सौरभ ने उस परछाई को सड़क पर गिरते हुए देखा सौरभ पूर्ण  रूप से आज़ाद महसूस कर रहा था।  सौरभ ने फिर से हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया।  अब सौरभ को दो परछाई दिखाई देने लगी एक वह जो वहाँ उसे आगे बढ़ने से रोक रही थी और दूसरी वह जिसका विशाल शरीर था और हाथ में गदा वह कोई और नहीं स्वयं बजरंगबली थे।  इस ओर सौरभ का हनुमान चालीसा का पाठ निरंतर चालू था ओर दूसरी ओर सौरभ को आगे बढ़ने से रोकने वाली परछाई वहाँ से कुछ ही पल में लुप्त हो गयी और तब सौरभ ने हनुमान जी रुपी परछाई के आगे झुक कर नमस्कार व धन्यवाद अर्पित किया।  


सौरभ की रक्षा स्वयं बजरंग बलि ने की की है यह जान उसका विश्वास बजरंगबली के प्रति और दृढ हो गया। 

सच्ची घटना: हैवान दरिंदों से बच्ची को बचाने प्रकट हुए वीर हनुमान, अपराधियों को दिया सरेआम भयानक दंड

देश की राजधानी दिल्ली महिलाओं के लिए असुरक्षित है। यह आपने अक्सर खबरों में पढ़ा होगा। यहां पर बच्चे क्या, महिलाएं क्या सभी के साथ गलत काम करने वाले दरिंदे भगवान से डरते नहीं है। जी हां, हम आपको एक ऐसी सच्ची घटना बताने जा रहे हैं। जिसको सुनकर आपकी रूह कांप उठेगी, क्योंकि यह कहानी एक छोटी सी बच्ची की है। जोकि, महज 12 साल की है। 

यह कहानी दिल्ली की एक मलिन बस्ती की है। जहां पर पूजा शर्मा नाम की एक 12 साल की बच्ची अपने गरीब माता-पिता के साथ रहती थी। उसके मां-बाप दोनों मजदूरी करके अपना पेट भरते थे। पूजा अपने स्कूल से आने के बाद शाम तक घर में अकेली रहती थी। आस-पास के पड़ोसी उसका ख्याल रखते थे। एक बार पूजा के पड़ोस के घर में एक रिश्तेदार रूकने आया। जिसकी उम्र 20 साल थी। उसकी पूजा पर गलत नज़रें थी। वह काफी समय से पूजा को घूरता था, लेकिन पूजा इस बात से पूरी तरह अनजान थी। बचपन से ही पूजा का मन हमेशा धार्मिक गतिविधियों में लगा रहता था। कभी धार्मिक पुस्तकें पढ़ना या सत्संग में आना-जाना। वैसे तो पूजा हनुमान जी को अपना परम भगवान मानती थी। रोज़ सुबह उठकर पूजा मंदिर में जाती थी  और वहां से आकर घर पर भी बजरंबली की पूजा करती। उसके बाद ही वह कुछ खाती थी।

एक बार वह सुबह के समय स्कूल की ड्रेस पहनकर मंदिर में पूजा करने जा रही थी। अचानक बीच सड़क पर एक अनजान कार रूकी। उसमें से कुछ लोग निकले और पूजा को उठाकर कही दूर ले गये। इससे पहले कोई कुछ समझ पाता वह दरिदें पूजा को लेकर एक सूनसान जगह पर चले गये। उन्होंने पूजा को बेहोशी वाली दवा सूंघा दी। ताकि वह किसी को पहचान ना पाए। इस पूरी घटना को अंजाम देने वाला पूजा का पड़ोसी रिश्तेदार था। जिसने अपने दोस्तों को भी पूजा के बारे में बताया और फिर इस साजिश में उनको भी शामिल कर लिया। यह लोग पूजा को एक सूनसान से जंगल में ले गये। जहां पर कोई भी आता-जाता नहीं था। इसके बाद उन्होंने पूजा को ज़मीन पर लेटा दिया। इतने में वह कुछ कर पाते पूजा को होश आ गया और वह भागने की कोशिश करने लगी। फिर उन लोगों ने पूजा को पेड़ से बांध दिया। इतने में ही वहां पर एक काफी अद्भूत मनुष्य आया। जिसके चेहरे पर एक अलग ही चमक नज़र आ रही थी। वह कोई साधारण पुरुष नहीं लग रहा था, बल्कि वह कोई महाबली लग रहा था। ऐसे में वह लड़के भी उस महाबली को नहीं देख पा रहे थे। उसके शरीर में से जिस तरीके का तेज़ आ रहा था। उसमें उन लोगों को कुछ नज़र नहीं आ रहा था। इसके बाद उस महाबली ने पूजा को पेड़ से खोलकर अपने साथ खड़ा कर लिया। जिसके बाद उन लड़कों को वह महाबली दिखने लगा। उन लड़कों ने मिलकर उस महाबली के साथ हाथापाई की, लेकिन महाबली के आगे कौन टिक पाया है। वह भी एक ही वार में परास्त हो गए। उस महाबली के पास एक गदा था। जिससे वह उन लड़कों पर वार कर रहा था। यह देखकर पूजा को आशंका हुई कि, यह कहीं हनुमान जी तो नहीं हैं, यह देखकर पूजा ने पहले हाथ जोड़े और कहा कि, आप तो मेरे परम भगवान हनुमान जी हो। यह देखकर पूजा की आंखों में खुशी के आंसू आने लगे। पूजा की यह बात सुनकर लड़कों ने भी महाबली से माफी मांगी, लेकिन उन्होंने कहा तुम्हें धरती पर तो सज़ा भुगतनी होगी साथ ही जब तुम मृत्युलोक में आओगे तुम्हें वहां भी इस लड़की के साथ गलत भावना रखने का दंड जरूर भुगतोगे। यह सुनकर लड़के अपनी जान की भीख मांगने लगे और पूजा से कहने लगे कि, बहन हमें माफ कर दो। हम समझ गये कि हम गलती नहीं पाप करने जा रहे थे, लेकिन बजरंगबली ने उनकी एक नहीं सुनी और उन तीनों को अपने हाथों से हवा में उठाकर जंगल के बाहर ले आए और फिर सड़क पर गिरा दिया। जिसके बाद वह लड़के सड़क से उठ नहीं पा रहे थे। वह भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हनुमान जी की शक्ति की वजह से वह सड़क से नहीं उठ पा रहे थे। इसके बाद हनुमान जी उस लड़की को लेकर पुलिस स्टेशन गये और उसको कहा कि, तुम यहां पर सारी बातें बताना, लेकिन मेरे बारे में कुछ मत कहना। उन लड़कों सारी सच्चाई बताना। जब पूजा ने पूछा कि, आपके बारे में मैं पुलिस अंकल को क्यों नहीं बताऊं, तो बजरंगबली ने कहा कि, यह कलयुग है बेटी यहां पर चमत्कार को अंधविश्वास का नाम दिया जाता है। तुम अगर मेरे बारे में कुछ भी बताओगी तो यह लोग यकीन नहीं करेंगे और तुम्हारी सारी बातों को झूठ मानेगें। पूजा ने उनकी बात मानी और पुलिस स्टेशन में अकेली चली गई। बजरंगबली बाहर खड़े होकर सारी परिस्थितियों को देख रहे थे। इसके बाद वह लड़की उसी सड़क पर पुलिस वालों को लेकर गई। वह लड़के अब भी सड़क से उठ नहीं पा रही थे। पुलिस ने उन लड़कों को गाड़ी में बैठाया और पुलिस स्टेशन ले आई। वहीं लड़की और उन अपराधियों के घरवालों को पुलिस स्टेशन में बुलाया गया। जिसके बाद अपराधियों ने खुद इस बात को कबूला कि, उन्होंने यह अपराध किया है, लेकिन हनुमान जी से उन्होंने माफी मांगी है। यह सुनकर पुलिस वाले बोलने लगे कि, कलयुग में कहा भगवान प्रकट होंगे और तुम जैसे हैवानों को दिखेंगे। उनकी यह बातें सुनकर पुलिस वालों ने अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की और पूजा को सही सलामत उसके घर पहुंचा दिया। घर पहुंचने के बाद पूजा ने अपने घरवालों को हनुमान जी के चमत्कार के बारे में सारी सच्चाई बताई। जिसके बाद से पूजा की जिंदगी बदल गई और हनुमान जी के लिए उसका श्रद्धा भाव दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। भक्त की पुकार पर अचानक हनुमान जी का धरती पर प्रकट होना किसी चमत्कार से कम नहीं है, जब ही तो उनको संकटहर्ता और दुखहर्ता का नाम दिया गया है।

इस पहाड़ पर आज भी बैठती है ये रहस्यमय नागकन्या, सालों से छुपाकर बैठी है चमत्कारी नागमाणि

हैलो दोस्तों आपका हमारा यूट्यूब चैनल में स्वागत है।  आज हम आपको बताने जा रहे हैं, नागों का एक अनोखा रहस्य जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। जी हां, शायद ही आपको नागों के बारे में इतना बड़ा सच पता होगा। इसी के साथ वीडियो में बात करने वाले हैं नागों से बनी नागमाणि की। इस चमत्कारी नागमाणि की रक्षक कौन है इसके बारे में जानकर आपके पैरों तले ज़मीन खिसक जाएगी। कई साधु-संत और सपेरे इस नागमाणि की तलाश में काफी सालों से भटक रहे है, लेकिन यह नागमाणि किसी के हाथ नहीं आती। आजतक ये नागमाणि किस नाग के साथ विलुप्त है उसका भी राज़ इस वीडियो के जरिए हम आपतक पहुंचाएंगें।आप आखिरी तक हमारी इस दिलचस्प वीडियो को देखें।  

कहते हैं कि, जिस भी इंसान के पास नागमाणि होता है, उसकी किस्मत रातों-रात बदल जाती है, इसलिए सालों से नागमाणि की तलाश चल रही है। आज हम आपको एक चमत्कारी नागमाणि से रूबरू कराएंगें। जोकि,  दुलर्भ माणि है। इस माणि में इतनी चमक होती है कि, आप इसको नंगी आंखों से नहीं देख पाओगे। यह एक अद्भूत माणि है। जिसकी लालसा हर इंसान को रहती है। यदि ये नागमाणि किसी व्यक्ति को अनजाने में मिल जाती है तो उसकी किस्मत बदल जाती है। फिर उसकी जिंदगी में सबकुछ उसकी इच्छा के मुताबिक होने लगता है, जोकि साधारण लोगों के साथ नहीं होता। साथ ही उन लोगों का संघर्ष समय भी खत्म होने लगता है और सबकुछ बिना कुछ किए मिल जाता है।  इतना ही नहीं, जब तक यह नागमाणि किसी इंसान के पास रहती है तब तक उसकी जिंदगी में चमत्कार होते रहते हैं। बताते हैं कि, नागमाणि में देवताओं जैसा अंश आ जाता है। जिसके कारण उसे आसानी से प्राप्त करना अंसभव है और ये चमत्कार होना देवताओं की उसपर कृपा की वजह से होता है। 


यह कहानी हमारे साथ राजस्थान से राणा प्रताप सिंह ने साझा की है। वह राजस्थान में काफी प्रसिद्ध और अमीर शहजादे  हैं। उन्होंने अपने जीवन में कई बुलंदियां हासिल की है, जिसके पीछे का कारण उन्होंने एक अदृश्य नागकन्या को बताया है। आपको बता दें कि, राणा प्रताप नागकन्या से मिले हुए हैं। जिसके बाद से उनकी जिंदगी में कई ऐसे चमत्कार हुए है जिसको वह शब्दों में जाहिर नहीं कर पाते। जी हां, उनको जीवन में वह सब प्राप्त हुआ जो उनको चाहिए था। लोगों की बात करें तो अमीर से अमीर इंसान की भी इच्छाएं भगवान के आगे अधूरी रह जाती है, लेकिन राणा एक ऐसे अकेले इंसान है जिनकी सभी इच्छा इस नागकन्या की वजह से पूरी हो गई। राणा की सफलता के पीछे क्या-क्या राज़ छुपे हैं वो हम आपको आज बताएंगें। दरअसल, राणा 5 साल पहले पेशे से एक दुकान में कपड़े दिखाने का काम करते थे। उस दौरान वह जितने कमाते थे उतने में सिर्फ उनका घर  खर्च चलता था, ना कोई सेविंग और ना ही कोई भविष्य योजना वह इतने पैसों में नहीं कर पाते थे। वैसे राणा किशोर अवस्था से ही शिवजी की मन से पूजा करने लगे थे। उनकी पूजा किसी साधना से कम नहीं होती थी। वह 4-5 घंटे शिवजी के मंत्रों का जाप करते हुए बिता देते थे। जब भी राणा को समय मिलता वह शिवजी के मंत्रों का जाप कहीं पर भी कर लेता था, लेकिन अपनी आर्थिक स्थितियों से परेशान राणा कभी किसी को इस बात का एहसास नहीं होने देते थे कि, वह अंदर से कितना दुखी है। वह पूजा के समय ही भगवान से अपने दुखों को दूर करने की विनती करते थे।

समय बीतता गया और सावन नज़दीक आया, सालों से राणा सावन का उपवास शिवजी के लिए रखते आए हैं, इस बार भी उसने भगवान शिव के लिए उपवास रखा। पहले दिन के उपवास में राणा की पत्नी आर्थिक स्थिति को लेकर काफी परेशान थी। उसको गुस्सा था कि, इतना सबकुछ करने के बावजूद भी भगवान उनका साथ नहीं दे रहे। तभी सावन के पहले सोमवार पर राणा ने जैसे ही शिवजी की पूजा-अर्चना करनी शुरु की, वैसे ही राणा की पत्नी का गुस्सा फूटा और उसने शिवजी की मूर्ति उठाकर घर से बाहर रख दी। यह देखकर राणा को गुस्सा आया और उसने कहा कि, तुम्हारा दिमाग खराब हो गया भोले बाबा की मूर्ति को बाहर क्यों रखा। फिर राणा की पत्नी बोली इन्होंने आजतक हमें दिया ही क्या है। ना हमारे पास घर है ना हमारे पास पैसा और ना ही हमारे पास सुकुन भरी जिंदगी है आखिर हमने ऐसे हमने क्या पाप किया जिसका दंड हम इस तरह भुगत रहे है। काफी देर तक पति पत्नी का झगड़ा चलता रहा। कुछ देर बाद जब दोनों का गुस्सा ठंडा हुआ तब राणा बाहर से महादेव की मूर्ति को उठाकर लाता है और फिर से मंदिर में रख देता है और पूजा-पाठ करके अपनी नौकरी के लिए निकल जाता है। राणा उस समय साईकिल से नौकरी करने जाता था। जैसे ही वह घर से कुछ ही दूरी पर एक सूनसान सड़क पर पहुंचा तो वहां पर एक साधू बीन बाजता हुआ जा रहा था उसकी बीन की आवाज़ दिल छूने वाली थी। मुझे नहीं पता कब मैं उसके पीछे-पीछे चलने लगा। मैंने अपनी साईकिल सड़क पर छोड़ी और उस साधू के पीछे चलने लगा। जंगल में काफी अंदर पहुंचने के बाद वह साधू एक खूबसूरत महिला में बदल गया और उसके पास एक चमकदार माणि था जो मुझे अपनी तरफ आर्कषित करने लगा। अचानक जंगल में बारिश होने लगी और वह महिला एक नागिन में परिवर्तित हो गई। यह सब देखकर मेरी आगे जाने की हिम्मत नहीं हुुई और मैं वापिस सड़क की तरफ जाने के लिए जैसे ही मुड़ा वह नागिन दूर एक पत्थर पर आधी नागिन और आधी महिला का रूप लिए बैठी थी। इशारे से उसने मुझे अपने पास बुलाया, लेकिन डर की वजह से मैं वहां जाना नहीं चाहता था। मैं सड़क की तरफ बढ़ने लगा तो कुछ लोग पता नहीं कहा से आए और मुझे उस नागकन्या के पीछे खड़ा कर दिया। वह अपना मुंह मुझे नहीं दिखा रही थी। इसके पीछे क्या कारण था मैं नहीं जानता।

अचानक वह अनजान लोग भी कहां गायब हो गए मैं नहीं जानता। यह सब मेरी आंखों के सामने हो रहा था। जिसे देखकर मैं काफी डर गया था और शिवजी का नाम जप रहा था। फिर वह नागकन्या  बोली की तुम महादेव के सबसे करीबी भक्त हो। मैं जानती हूं कि, तुम एक ईमानदार सच्चे इंसान हो, लेकिन तुमने आज एक गलती कर दी है मुझे सारे रूपों में देखकर, लेकिन महादेव भक्त होने की वजह से मैं तुम्हें छोड़ रही हूं। क्या तुम मेरे पास रखे इस नागमाणि की ताकत को जानते हो। तुम नहीं जानते होंगे, लेकिन यहां से जाने के बाद तुम सबकुछ खुद ब खुद समझ जाओगे। जाओ मेरा तुमसे वादा है कि तुम कभी भी जिंदगी में दुखी नहीं रहोगे। क्या तुम यह नागमाणि मुझसे लेना चाहोगे। तो राणा ने कहा हां मैं यह नागमाणि अपने पास रखने को तैयार हूं, लेकिन नागकन्या तो सिर्फ उसकी परीक्षा ले रही थी। इसके बाद राणा ने कहा कि, मुझे नहीं पता था आप नागकन्या हो, नहीं तो मैं खुद आपके पीछे नहीं आता। मैं किस तरह यहां तक पहुंच गया मुझे खुद नहीं पता। यह सुनकर नागकन्या हंसने लगी और बोला कि, यहां तुम आए नहीं हो बुलाए गए हो। महादेव की इच्छा थी कि, तुम्हारे सारे दुखों का निवारण आज ही हो जाए। जाओ मैं तुम्हें ये शक्ति देती हूं कि, जब तक तुम इस धरती पर जीवित रहोगे तब तक तुम्हारी हर एक इच्छा बिना किसी समस्या के पूरी होगी। आज से तुम्हारे दिन बदल जाएंगें। यह सुनकर राणा काफी खुश हुआ, लेकिन नागकन्या ने बोला कि, तुम यह राज़ कभी किसी को नहीं बताओगे कि तुमने मुझे स्वयं देखा है।

यदि तुमने इसके बारे में किसी को बताया तो उस दिन से ही तुम्हारी बर्बादी शुरू हो जाएगी। इसका अंजाम तुम्हें बुरा भुगतना होगा। यह सुनकर राणा दंग रह गया और सोच में पड़ गया कि, आखिर यह सब कैसे होगा। यह सब बातें बोलने के बाद वह नागकन्या उस माणि को लेकर कहां गायब हो गई मैं यह नहीं देख पाया। ऐसे में खुद को जंगल में अकेला पाकर मैं तुरंत जंगल से बाहर आया और घर की तरफ चला गया। जैसे ही मैं घर पहुंचा तो मैंने सारी बातें अपनी पत्नी ने बताई। फिर मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि, एक विदेशी महिला आई थी। उसने मुझे जेवरात और ये पैसे दिए है, मैंने पूछा कि, क्यों दे रहे हो तो बोली तु्म अपने पति से पूछना। इसके बाद राणा सारी बात समझ गया कि, उसने अपनी पत्नी से कहा कि, वह कोई और नहीं नागकन्या थी। वही यहां पर आकर ये सब देकर गई है।राणा ने अपनी पत्नी से कहा कि, अब हमारी जिंदगी बदलने वाली है। इसके बाद राणा कि पत्नी ने अपने पति और शिवजी भगवान से माफी मांगी और नई जिंदगी की शुरुआत की। उस नागकन्या ने अपने वादे के अनुसार राणा की पूरी जिंदगी बदल दी और आज वह राहिसों जैसी जिंदगी व्यतीत कर रहे हैं, लेकिन यह कहानी नागकन्या ने राणा को किसी को बताने से मना किया था, लेकिन शिवजी को मानने वाले भक्तों के लिए राणा ने यह सच्चाई साझा की अब देखना होगा कि राणा की जिंदगी में अब क्या होगा।

चोर को आसरा देने के बाद हनुमान मंदिर क्यों हुआ गायब? जानें इस रहस्मय मंदिर का खतरनाक राज़

हैलो दोस्तों आपका हमारे यूट्यूब चैनल में स्वागत है आज हम आपको बताने वाले हैं संकटहर्ता-दुखहर्ता हनुमान जी की एक ऐसी सच्ची कहानी। जिसे सुनकर आप भी दंग रह जाएंगें। यह कहानी सुनकर आपके मन में भी सवाल उठेगा कि, आखिर हनुमान जी ने अपने भक्तों के साथ ऐसा क्यों किया? वैसे तो हनुमान जी के चमत्कार और उनकी कृपा के बारे में आपने हमारी सभी वीडियो में जरूर देखा होगा, लेकिन आजतक आपने हनुमान जी से अपने भक्तों की ऐसी नाराज़गी शायद ही सुनी या देखी होगी।

यह सच्ची घटना हिमाचल के एक छोटे से गांव की है। जहां पर हनुमान जी के भक्तों का निवास है। इस पूरे गांव में हनुमान जी के अलावा किसी भी भगवान की पूजा नहीं की जाती। गांव में घुसते ही बजरंगबली की बहुत बड़ी मूर्ति है, लेकिन लोगों के घरों में किसी भी भगवान की कोई मूर्ति नहीं है, ऐसा इसलिए है क्योंकि गांव वासियों का मानना है कि, गांव के रक्षक स्वयं हनुमान जी हैं। उनका पहरा गांव में 24 घंटे रहता है।

गांव में घुसते ही सबसे पहले हनुमान जी की मूर्ति के दर्शन होते हैं। हम सभी गांव वासी मिलकर परिवार की तरह उनकी पूजा अर्चना सुबह-शाम करते हैं। यह गांव प्रेम भाव से भरा हुआ है। यहां पर सभी एक-दूसरे के साथ मिलजुल कर रहते हैं। इस गांव पर हनुमान जी की असीम कृपा है। स्थानीय निवासी यहां तक बताते हैं कि, यहां पर लोगों ने हनुमान जी को साक्षात रूप में भी देखा है, लेकिन एक घटना कुछ ऐसी इस गांव में घटी। जिसके बाद से इस गांव की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी। गांव के लोगों ने बताया कि, दीपावली का समय चल रहा था। घरों में काफी चहल-पहल थी। इस दौरान लोग मिल-जुल कर बजरंगबली की शाम के समय पूजा कर रहे थे। ऐसे में एक अनजान व्यक्ति उस गांव में घुसकर लोगों के घरों से पैसे और गहने लूटकर ले गया। जब तक गांव वासियों को पूरी कहानी पता चलती तब तक वह चोर काफी दूर निकल चुका था। गांव वासियों के मुताबिक, वह चोर चोरी करके एक पहाड़ पर पहुंच गया। जहां पर हनुमान जी का एक रहस्यमय मंदिर स्थापित था। बताया जाता है कि, वह चोर उस मंदिर में चला गया, जिसके बाद से ही यह मंदिर रहस्यमय और अद्भूूत हो गया। दरअसल, यह मंदिर दूर से दिखाई देगा लेकिन जैसे-जैसे आप इसके नज़दीक जाओगे वैसे-वैसे यह मंदिर गायब हो जाएगा। ऐसा क्यों होता है, इसके पीछे एक बड़ी वजह है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि, सालों से हमारे घरों में ताले नहीं लगे है। कोई भी कहीं भी जाए कितनी भी दूर जाए या कितने भी दिनों के लिए जाए, लेकिन ताला किसी के घर में नहीं लगता। ऐसा इसलिए है, क्योंकि लोगों का हनुमान जी की शक्तियों पर पूरा भरोसा है, उनका मानना है कि, हनुमान जी के रहते हुए वह सभी सुरक्षित हैं, लेकिन अचानक काफी सालों बाद यहां पर चोरी होना काफी अचंभे कि बात थी। जहां पर सालों से ताला ना लगाने की प्रथा चल रही थी, वहां पर अचानक इतने घरों में से चोरी होना बेहद दुखद की बात है। इस घटना के बाद से ही लोगों को हनुमान जी से शिकायत होने लगी। कहते हैं कि, हनुमान जी को लोग मानते तो हैं, लेकिन पहले की तरह यहां पर हनुमान जी के भक्त नहीं है। जी हां, यहां पर अब हनुमान जी पर लोगों का विश्वास कम हो गया है। इसे भक्तों की नाराज़गी समझें या फिर गांव वासियों की लापरवाही। इस पर कुछ भी कह पाना ठीक नहीं होगा।

आगे हनुमान जी के भक्तों ने बताया कि, उस चोर को पहाड़ों की तरफ जाते हुए हनुमान मंदिर के एक पुजारी ने देखा और उसका पीछा करते हुए पहाड़ पर पहुंच गये। जिसके बाद वह चोर हनुमान जी के मंदिर में चला गया। जैसे ही वह पुजारी उस मंदिर के अंदर पैर रखने वाला था। इतने में ही वह पूरा मंदिर गायब हो गया। यह देखकर पुजारी डरकर सहम गया और वापिस पहाड़ से नीचे आ गया। फिर पलटकर जैसे ही पुजारी ने मंदिर को देखा तो वह फिर नज़र आने लगा। इसके बाद पुजारी ने यह सारी घटना गांव वासियों को बताई। फिर गांव वासी उस मंदिर को देखने गये। उन लोगों के साथ भी पुजारी जैसी घटना घटी। जिसके बाद से ही यह कहानी पूरे जगह फैल गई, लेकिन नाराज़ भक्तों को लगता है कि, उस चोर को हनुमान जी ने आसरा दिया है, लेकिन पुजारी ने बताया कि, उस चोर को हनुमान जी दंड दे रहे हैं तभी तो वह आजतक मंदिर के बाहर नहीं निकल पाया। काफी समझाने के बाद भी हनुमान जी को मानने वाला गांव अब उनपर कम विश्वास करता है और उनकी भक्ति पहले की तरह नहीं करता। वाकई यह कहानी सुनने में अजीब है, लेकिन सच्ची है।

जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण का हुआ चमत्कार देखने वाले रह गए हैरान

श्री कृष्ण के चमत्कार किसने देखे व सुने नहीं है , आज कलयुग में भी ना जाने कितने चमत्कार हो जाते है जिन्हे देख सभी दंग रह जाते है।
ऐसा ही चमत्कार हुआ झारखण्ड के धनबाद नामक शहर में रहने वाले शांतनु के साथ , जिसे देख उन्हें खुद भी विश्वास ना हुआ।

शांतनु डाक विभाग में करने वाला एक आम आदमी है , वह बचपन से ही श्री कृष्ण की बाल लीला व पराक्रम के किस्से सुनते हुए ही बड़ा हुआ है, शांतनु श्री कृष्ण की भक्ति में लगा रहता है। यहाँ तक की शांतनु तो श्री कृष्ण को अपने परिवार का ही सदस्य मानता है , उनकी देख रेख भी एक बालक की भांति करते हुए उन्हें भोजन का भोग लगाना उन्हें सुलाना यह सब कुछ वह बड़े ही आदर व आस्था भाव से किया करता है।

शांतनु बड़े ही शांत प्रवृति का व्यक्ति है जो सभी सहायता करने हेतु भी सदैव तत्पर रहता है।
कुछ वर्षो पुरानी बात है , शांतनु की इच्छा थी की वह इस वश आने वाली जन्माष्टमी अपने परिवार सहित श्री कृष्ण के धाम मथुरा में जाकर मनाये। शांतनु के माता पिता ने भी उसके इस सुझाव पर सहमति दिखाई।

सभी लोग जन्माष्टमी से एक दिन पहले मथुरा के लिए रवाना हो गए , सभी भक्ति भाव से परिपूर्ण थे। शांतनु गाडी चला रहा था व उसके माता पिता पीछे बैठे हुए थे , श्री कृष्ण के भजन गाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

परन्तु वह यह नहीं जानते थे की कोई बड़ा संकट उनके निकट आने को तैयार बैठा हुआ है। वह सभी एक लम्बे सफर के बाद लखनऊ पहुंचे। तभी शांतनु के पिता ने कहा की हमें कुछ देर यहाँ रुक कर आराम कर लेना चाहिए और इसी बहाने कुछ जलपान भी हो जायेगा।
शांतनु ने अपने पिता की बात मान कर गाडी सड़क किनारे स्थित एक ढाबे पर लगायी , माता पिता गाडी से उतर गए एवं शांतनु गाडी को पार्क करने के लिए गाडी जैसे ही पीछे की।

तभी उसे नज़र आया की दूसरी और से एक बड़ी बस बेकाबू होकर उसकी और तेज रफ़्तार में बढ़ी चली आ रही है। यह देख वह घबरा गया उसने तुरंत गाडी को आगे लेने का प्रयास किया गाडी आगे तो हो गयी परन्तु गाडी का पीछे का हिस्सा बस से टकरा गया। और शांतनु की गाडी बहुत तेजी से पलट कर सड़क पर उलटी गिर गयी , इतना भयानक एक्सीडेंट देख वह मौजूद लोग डर गए , तुरंत ही गाडी के चारो और भीड़ जमा हो गयी , शांतनु के माता पिता भी गाडी के पास पहुँच गए।

शांतनु को गंभीर रूप से चोट आयी थी , वहाँ उपस्थित लोगो ने गाडी से शांतनु को गाडी से बाहर निकला , शांतनु को इस हाल में देख उसके माता पिता अपने आंसू रोक नहीं पाए। लोगो ने उसे उसे होश में लाने के लिए बहुत प्रयास किये किसी ने उसके अचेत शरीर को हिलाया , तो किसी ने पानी के छीटें उसके चेहरे पर मारे परन्तु किसी रूप की कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई।

तभी वहाँ कुछ ऐसा हुआ जिसे देख वहाँ मौजूद सभी लोग दंग रह गए किसी को अपने आँखों देखे पर यकीन ना हुआ।
अपने पुत्र को अचेत अवस्था में देख शांतनु के माता पिता ने विलाप करते हुए श्री कृष्ण से प्रार्थना करते हुए , अपने पुत्र के प्राण रक्षा की गुहार लगायी। कुछ ही समय बाद वहाँ एक व्यक्ति पंहुचा जिसके चेहरे पर एक विशेष रुपी तेज़ था , सभी चिंताओं को भुला देने वाली मुस्कान थी।
उसने वहाँ आस पास से भीड़ को एक और किया और शांतनु के करीब आकर बैठ कर उसके कान में कुछ कहा और फिर शांतनु के सर पर अपना हाथ फिराया।

जिसके कुछ ही देर बाद शांतनु का अचेत शरीर मे चेतना आने लगी उसकी आँखे धीरे धीरे खुलने लगी , लोग या देख आश्चर्य में थे की यह चम्तकार कैसे हुआ किसी के हाथ फेरने मात्र से कैसे किसी अचेत शरीर में जान आ गयी।

कुछ ही देर बाद जा लोगो ने उस व्यक्ति को ढूंढ़ने का प्रयास किया तब तक वह वहाँ से लुप्त हो चूका था किसी को को कुछ समज नहीं आ रह था। शांतनु की आँखे खुलते ही माता पिता के चेहरे की मुस्कान लौट आयी थी।
माता पिता ने ही सबको बताया की उस व्यक्ति को ढूंढ़ने का प्रयास बंद कीजिये वह कोई आम मनुष्य नहीं था वह तो स्वयं श्री कृष्ण थे जिन्होंने हमारी प्रार्थना का स्वीकार करके हमारे पुत्र की प्राण रक्षा की है , इतना बड़ा चमत्कार देख व माता पिता की बात उपस्थित लोगो की आँख फटी की फटी रह गयी।

इस प्रकार श्री कृष्ण ने जन्माष्टमी के दिन ही अपने सच्चे भक्त की प्राण रक्षा की।

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