स्कंदमाता  देवी दुर्गा का एक रूप है, जिनकी पूजा नवरात्री के पांचवें दिन की जाती है।

स्कंदमाता को अकसर एक शेर पर बैठती हुई और अपने शिशु स्कंद को अपनी गोद में लिए हुए दिखाया जाता है। 

रूप और दिखावट

स्कंदमाता की पूजा मातृ प्रेम, सुरक्षा और देखभाल का प्रतीक होती है। वह भगवान स्कंद की मां होती है

महत्व

भक्त  माता को  फूल, धूप, और परंपरागत अर्चना से सजाते हैं। वे प्रार्थनाएँ करते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ या देवी सर्वभू‍तेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

स्कंदमाता मंत्र

स्कंदमाता, हिमालय की पुत्री पार्वती हैं। इन्हें माहेश्वरी और गौरी के नाम से भी जाना जाता है।

मां स्कंदमाता को केला प्रिय है, इसलिए पूजा के समय मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाना चाहिए. 

स्कंदमाता भोजन 

मां स्कंदमाता को श्वेत रंग प्रिय है। मां की उपासना में श्वेत रंग के वस्त्रों का प्रयोग करें।