संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरे हनुमत बलबीरा।

इस चौपाई के अनुसार,हनुमान जी इतने बलवान हैं कि उनके नाम मात्र जपने से हर संकट का अंत हो जाता है और हर पीड़ा समाप्त हो जाती है।

रामायण की कहानियां हनुमान जी की वीरता से भरी हुई हैं। रामायण में एक से बढ़कर एक कारनामे हनुमान जी के हीं नाम हैं।

लेकिन पुरे रामायण काल में केवल हनुमान जी,बाली,सुग्रीव और अंगद हीं एकमात्र शक्तिशाली वानर नहीं थे।

तो आखिर कौन थे वो वानर? जो हनुमान जी से भी बलशाली थे? आज हम आपको बताएंगे।

द्विविद सुग्रीव के मन्त्री और मैन्द के भाई थे। ये बहुत ही बलवान और शक्तिशाली थे, इनमें दस हजार हाथियों का बल था।

मैन्द- द्विविद

दधिमुख वानर (बंदर) सेना का हिस्सा था। उनके नाम का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है,वह मधुवन के रक्षक और संरक्षक थे।

दधिमुख

शतबली,एक कुशल मल्ल योद्धा था और उसके पास सुग्रीव से भी बड़ी विशाल वानरों की सेना थी। शतबली अपने एक लाख वानरों के साथ राम-रावण युद्ध में शामिल हुआ था।

शतबली

हनुमान जी के पिता वानरराज केसरी भी शक्ति में किसी से कम नहीं थे। एक बहुत बड़े वानर साम्राज्य के राजा केसरी,शक्तिशाली और बुद्धिमान होने के साथ-साथ अत्यंत धार्मिक भी थे।

वानरराज केसरी

मतिमान,श्रुतिमान,केतुमान,गतिमान और धृतिमान नामक हनुमान जी के ये पांच छोटे भाई उन्ही के समान वीर थे।

हनुमान जी के छोटे भाइयों