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  • इस भव्य पत्थर की पूजा करके घर और दफ्तर में महालक्ष्मी की प्राप्ति होती है और घर वैभव से भर जाता है।
  • शालिग्राम की पूजा के लिए तुलसी का ही प्रयोग करें। ऐसा करने से व्यक्ति को शीघ्र ही भगवान की कृपा का लाभ मिलता है।
  • शालीग्राम और देवी तुलसी का विवाह करने पर सभी प्रकार के शत्रुता, पारिवारिक समस्याएं, पाप, संघर्ष, दुख, रोग आदि नष्ट हो जाते हैं।
  • मां तुलसी और शालिग्राम का विवाह समर्पण भाव से करने से वैसा ही पुण्य प्राप्त होता है जैसा कन्या दान करने से होता है।
  • इनकी पूजा करने से सभी प्रकार की शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं का समाधान होता है।
  • जिस घर में भगवान शालिग्राम की शिला स्थित होती है उसे तीर्थ के समान माना जाता है।
  • पूजा के समय भोग में अर्पित चरणामृत का सेवन करने से भक्त को चारों धामों का पुण्य फल प्राप्त होता है।
  • घर में प्रतिदिन इनकी पूजा करने से वास्तु दोष और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।
  • कुंवारी लड़कियो को इसकी प्रतिदिन पूजा करने से मनपसंद वर मिलता है।

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हमारे ज्योतिष शास्त्र में Shaligram Stone को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। हिंदू धर्म में, इस पवित्र देवता के आकार के पत्थर को भगवान विष्णु के रूप में देखा जाता है, जिसे सालग्राम शिला या शालिग्राम भगवान के नामो से पुकारा जाता है। यह देखने में सुन्दर काले चिकने पत्थर असल में गंडकि नदी के किनारे पाए जाते है जो कई हज़ार साल पुराने भी होते है। माना जाता है की यह स्वयं भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न हुए थे। shaligram को हिन्दू धर्म में इतना पूजनीय माना जाता है की इसकी उपस्थिति के बिना कोई भी मन्दिर संपूर्ण नहीं माना जाता है।

शालिग्राम शिला क्या है? ( What is Shaligram Stone? )

Shaligram Stone जीवाश्म का एक रूप है जिसे नेपाल की गंडकी नदी में खोजा जाता है। Kali Gandaki River Shaligram पत्थरों के बीच में सुदर्शन चक्र की आकृति खुदी हुई होती है, जो इनकी सबसे खास विशेषता है। तैत्रीय उपनिषद के ब्रह्मसूत्र में आदि गुरु शंकराचार्य ने पवित्र शालीग्राम पत्थर का महत्व समझाया है। हमारे 18 पुराणों में से एक स्कंद पुराण में वैशाख महास्कंद का नौवां श्लोक कहता है, “शालिग्राम शिला यस्य गृहे तिष्टि मनदा।”

भगत घी रतवई भगते काली। वही नारद पुराण के प्रथम भाग के पहले श्लोक में कहा गया है कि जिसके घर में Saligram भगवान वास करते हैं, कलियुग उनके घर में कोई भी विपत्ति, कलेश, पीड़ा, गरीबी, भुखमरी, बीमारी कभी भी प्रवेश नहीं कर सकती है, और यह भी कहा जाता है कि जिनके घर में Shaligram ka stone होता हैं, वहां भूत, दैत्य, ग्रह दोष या कोई भी बाधा प्रवेश नहीं कर सकती है। गोमती चक्र, जो लक्ष्मी का एक प्रकार है, उसको शालिग्राम के साथ रखने से घर मे धन और वैभव बना रहता है। आप कभी भी Shaligram Online आसानी से अपने घर बैठे मंगवा सकते है, ध्यान रहे की यह Original Shaligram ही होना चाहिए अथवा आप इसके लाभ से वंचित हो सकते है।

https://youtu.be/dzsqHNGQogA
शालीग्राम पत्थर के लाभ ( Shaligram Stone Benefits in hindi )

1. विष्णु शालिग्राम ( Vishnu Shaligram ), विष्णु भगवान् का विग्रह रूप है जो एक अद्भुत पत्थर है जो अपने आस पास की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर देता है।

2. आप का स्वस्थ्य अच्छा नही रहता है या घर पर कोई बीमार रहता है तो यह Shaligram Stone आपके स्वस्थ्य के स्तर को सुधारने में भी अत्यंत महत्वपुर्ण भुमिका निभाता है।

3. आप कडी मेहनत करते है लेकिन उसके बाद भी आपको सफलता नहीं मिल रही है तो इस अद्भुत Shaligram Shila को अपने घर में जरुर स्थापित करें।

4. आपको लंबे समय से व्यवसाय में ज्यादा फायदा नही हो रहा है तो आप Gandaki River Stone शालिग्राम को अपने घर के साथ साथ अपने ऑफिस में भी स्थापित करें नियम से पूजा करे।

5. आपका पैसा काफी समय से किसी के पास रुका या अटका हुआ है या कोई व्यक्ति आपके पैसे नही दे रहा है तो वह धन आपके पास जल्द वापस आ जायेगा।

शालीग्राम पत्थर की पूजा विधि ( Shaligram Puja Vidhi )

1. Shaligram Stone का पूजा-संस्कार करते समय आपको ऐसी दिशा में बैठना चाहिए जहां आपका चेहरा पूर्व या उत्तर-पूर्व की ओर हो।

2. पूजा करते समय शंख में गंगाजल भरकर उसमें शालिग्राम को स्नान कराएं।

3. Saligrama पर छिड़कने के लिए पानी से भरे स्टील कलश में कुछ दूब घास रखें।

4. अब शालिग्राम को पीपल के पत्ते पर रखें और शालिग्राम की दिशा में कपूर, अगरबत्ती और घी से दीपक जलाएं।

5. शालिग्राम पर चंदन का लेप लगाना याद रखें और उसके सामने तुलसी के कुछ ताजे हरे पत्ते रखें।

6. अपने मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए इस Shaligram Puja Mantra का 9 बार जाप करें: “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे”।

7. फिर शालिग्राम पर दूध, फल या मिठाई का भोग लगाएं। कुछ नकद भेंट करें। इस प्रकार पूजा करने से भगवान हरि आपके कार्यों से प्रसन्न होते हैं और आप पर अपना आशीर्वाद देते हैं।

8. शालीग्राम के लाभ के लिए सिर्फ Original Shaligram Online ही मंगवाए।

Shaligram 2
शालिग्राम का अर्थ क्या है? ( What is the meaning of Shaligram? )

शालिग्राम जिसे आम भाषा में सालग्राम भी कहा जाता है शिला यानी पत्थर से निकला है। यह एक जीवाश्म शिला है जिसका प्रयोग भगवान के आह्वान के लिए किया जाता है। पदमपुराण में शालिग्राम का वर्णन कुछ इस प्रकार मिलता है कि गण्डकी नदी से निकलने वाले पत्थर को ही शालिग्राम कहा जाता है।

शालिग्राम भगवान कौन है? ( Which God is Shaligram? )

शालिग्राम भगवान विष्णु का निराकार रूप माने जाते हैं, वैष्णव पंथ में Shaligram Puja की जाती है। जिस प्रकार भगवान शिव का निराकार रूप शिवलिंग शैव धर्म में पूजा जाता है।

शालिग्राम की उत्पत्ति कैसे हुई? ( What is the story of Shaligram? )

Gandaki River Shaligram की उत्पत्ति के पीछे जो पौराणिक कथा जुड़ी हुई है उसका संबंध वृंदा यानी तुलसी से है। जब भगवान विष्णु ने शंखचूड़ का वध करने के लिए छल से वृंदा के सतीत्व को भंग कर दिया था तब वृंदा द्वारा दिए गए श्राप के कारण भगवान विष्णु एक शिला यानी शालिग्राम में परिवर्तित हो गए थे।

श्राप दिए जाने के बाद भगवान विष्णु ने Vrinda को सांत्वना दी। विष्णु जी ने कहा कि यह उन्हें पति के रूप में पाने के लिए अतीत में की गई तपस्या का ही परिणाम है और इस तरह अब वह फिर से उनकी पत्नी बन जाएंगी। फिर वृंदा ने अपने शरीर को त्याग दिया और एक नया रूप धारण किया। वृंदा का यही रूप तुलसी के नाम से जाना गया।

वृंदा का त्यागा शरीर आज गंडकी नदी में तब्दील हो गया है जबकि श्रापित विष्णु ने गंडकी नदी के तट पर बड़े चट्टानी पर्वत का रूप धारण किया। इसे ही आज Shaligram Bhagwan के नाम से जाना जाता है।

क्या शालिग्राम को घर पर रख सकते हैं? ( Can we keep Shaligram at home? )

Shaligram ji को घर में रखना बहुत शुभ माना जाता है क्योंकि इसमें से निकलने वाली सकारात्मक शक्ति घर और आस-पास के वातावरण को शुद्ध करती है। कहते हैं कि एक घर में दो शालिग्राम नहीं रखने चाहिए क्योंकि इसमें से बहुत अधिक ऊर्जा का संचार होता है। अत्यधिक शालिग्राम केवल बड़े मंदिर के गर्भगृहों में ही रखे जा सकते हैं।

शालिग्राम को कहाँ रखना चाहिए? ( Where do you put a Shaligram? )

कई बार हमारे मन में यह सवाल आता है कि Shaligram ko kaha rakhe तो बता दें Shaligram Stone को घर के मंदिर में या किसी पवित्र और शुद्ध स्थान पर रखा जाना चाहिए। शालिग्राम को रखने के लिए कड़े नियमों का पालन करना चाहिए। आइये जानते हैं क्या है शालिग्राम को रखने के नियम :

1. शालिग्राम को रखने के लिए व्यक्ति का मन और तन दोनों से सात्विक रहना अनिवार्य है।
2. शालिग्राम को यात्रा, रोग और रजोदर्शन के समय नहीं पूजा जाना चाहिए।
3. ऐसे नियम हैं कि शालिग्राम को हर रोज़ पंचामृत से स्नान कराना चाहिए।
4. इसपर चन्दन और तुलसी के पत्ते चढ़ाना अनिवार्य है।

शालिग्राम कौन सी नदी में मिलते हैं? ( Which river is famous for Shaligram? )

असली शालिग्राम केवल और केवल गण्डकी नदी से निर्मित होते हैं और इस तरह से यही शालिग्राम का उद्गम स्थल है।

स्त्रियों को शालिग्राम की पूजा क्यों नहीं करनी चाहिए? ( Can female worship Shaligram? )

शालिग्राम को स्त्रियों द्वारा स्पर्श किये जाने पर विद्वानों में मतभेद हैं। कई विद्वान मानते हैं कि स्त्रियों को शालिग्राम का स्पर्श नहीं करना चाहिए क्योंकि कलयुग के इस दौर में मन का पवित्र होना बहुत जरूरी है। परन्तु कई बार स्त्रियों का मन पूजा-पाठ से भटक जाता है। ऐसा कहीं भी वर्णित नहीं कि शालिग्राम को स्त्रियों द्वारा नहीं पूजा जाना चाहिए।

शालिग्राम को घर में रखने से क्या होता है? ( What is the benefit of keeping Shaligram Stone at home? )

जिस घर में भी शालिग्राम रखा जाता है वहां भगवान विष्णु सदैव वास करते हैं, नकारात्मक ऊर्जा कभी वास नहीं करती है या दूसरे शब्दों में कहें तो बुरी शक्तियां उस वातावरण से कोसों दूर रहती है। यह घर के सदस्यों को रोगों, शत्रुओं और समस्त प्रकार की बुराइयों से दूर रखता है।

शालिग्राम गंडकी नदी में ही क्यों पाया जाता है? ( Why Shaligram is found in Gandaki river? )

हमारे हिन्दू धर्म शास्त्रों में यह उल्लेख किया गया है कि जब वृंदा ने भगवान विष्णु को श्राप दिया था तो वे शालिग्राम में तब्दील हो गए थे। इसके बाद वृंदा भी गण्डकी नदी के रूप में बदल गई थी। इस तरह Shaligram Tulsi ( गंडक नदी )के निकट ही पाया जाता है।

शालिग्राम जी कितने प्रकार के होते हैं? ( Types of Shaligram )

शालिग्राम लगभग 33 प्रकार के पाए जाते हैं जिनमें से 24 प्रकार के शालिग्राम विष्णु के 24 अवतारों में से एक हैं। माना जाता है कि ये सभी 24 शालिग्राम वर्ष की 24 एकादशी व्रत से संबंध रखते हैं।

शालिग्राम पत्थर की पहचान क्या है? ( How to Identify real Shaligram? )

शालिग्राम एक ठोस और चिकनी शिला होती है जो कई आकारों में पाई जाती है। यदि शालिग्राम शिला गोल आकार लिए हुए है तो वे गोपाल रूप माना जाता है और यदि शालिग्राम मछली के आकार का है तो उनको भगवान विष्णु का मत्स्य अवतार माना जाता है।

यदि शालिग्राम कछुए जैसे हैं तो उनको भगवान विष्णु का कच्छप यानी कूर्म अवतार का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है। शालिग्राम की पहचान की दूसरी विशेषता यह है कि यह केवल और केवल गंडक नदी के समीप ही पाया जाता है।

शालिग्राम की कीमत क्या है? ( What is Shaligram price? )

Shaligram Stone Price उसके आकार पर निर्भर करती है। हमारे पास जो गण्डकी नदी से निर्मित Original Shaligram उपलब्ध है उसकी कीमत मात्र ₹349 है जबकि तुलसी माला के साथ जो शालिग्राम उपलब्ध है उस शालिग्राम की कीमत मात्र ₹549 है।

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