ऐसा क्या हुआ की स्वयं पंचमुखी हनुमान जी को भक्त चंदरशेखर के प्राणो को बचाने आना पड़ा...

शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग वंदन॥॥
विद्यावान गुणी अति चातुर राम काज करिबे को आतुर॥॥

अथार्त:- शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर में वन्दना होती है। आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम के काज करने के लिए आतुर रहते है। आखिर ऐसा क्या हुआ जब स्वयं पंचमुखी हनुमान जी को आना पड़ा अपने परम भक्त प्रदीप के प्राणो को बचाने

हमें हमारे पाठकों द्वारा सैकड़ों मैसेज आ रहे हैं जिन लोगो ने इसे धारण किया है और धारण करने से उनके जीवन में फिर से खुशिया आने लगी। पहले तो हमने विश्वास नहीं किया और इसे नजर अंदाज करने का फैसला किया, लेकिन इसके परिणाम बेहद आश्चर्यजनक थे और आज आपके लिए लेकर आये है हमारे एक पाठक चंदरशेखर - (तुमाकुरु ,कर्णाटक) की कहानी..

दोस्तों ये कहानी हमें भेजी है कर्णाटक के तुमाकुरु के रहने वाले चंदरशेखर रेड्डी जी ने। दोस्तों चंदरशेखर जी बताते है की किस तरह स्वयं हनुमान जी ने उन्हें दर्शन दे कर उनकी जान बचाई और उनकी सच्ची भक्ति को एक मार्गदर्शन दिया।

चंदरशेखर जी बताते है की वो एक कन्नड़ परिवार से तालुक रखते है। वैसे तो मेरे परिवार के सभी लोग भगवान पर बहुत विश्वास करते है मगर मेरी माँ भगवान शिव की एक अनन्य भक्त है जिस कारण उनका भी भगवान के प्रति बहुत प्रेम है।​

दोस्तों चंदरशेखर जी बताते है सन 2018 की बात है। जब वह एक आईटी कंपनी में जॉब करते थे. और उस समय उन्हें नौकरी करने के लिए बैंगलोर के एक छोटे से गांव में रहना पड़ा था जिसका नाम बेलंदूर है। दोस्तों उस गांव में बहुत सारी छोटी बड़ी आईटी कम्पनीयाँ है और बहुत सारी कंपनियां अभी भी बन ही रही है। सीधे शब्दों में बताए तो वो जगह अभी भी विकसित हो रही है।

दोस्तों बात है 15 सितम्बर 2018 की जब मै अपने गांव से बेंगलोर आ रहा था वैसे तो में काफी बार अपने गांव से बैंगलोर आ चूका हूँ मगर इस बार मुझे आने में थोड़ी रात हो गई थी। दोस्तों उस रात को मै कभी भी नहीं भूल सकता।

उस रात करीबन 12 बजे जब मै बेलंदूर पहुँच चूका था और मै अपने कमरे मे जा रहा था की अचानक से कोई मेरा पीछा करने लगा जब मैंने पीछे मुड़कर देखा तो मेरे पीछे कोई नहीं था मैंने इन सभी बातों को नजरअंदाज किया और आगे चलता रहा। फिर अचानक से किसी ने मुझे मेरे नाम से पुकारा और तेज आवाज में मेरा नाम लेने लगा। इस बार भी मेने पीछे देखा तो कोई नहीं था।

दोस्तों मै थोड़ा डर गया था मगर मै रुका नहीं और चलता रहा। मैंने अपनी जेब से कॉल करने के लिए फ़ोन निकाला तो वो भी स्विच ऑफ हो चूका था ये उस शैतानी शक्ति की वजह से हुआ था। अब तो मेरे पास कोई रास्ता नहीं था और मै डर के मारे वहीँ बैठ गया​।

दोस्तों ये घटना बिलकुल सच है और जब भी मैं उस रात को याद करता हु तो सेहम जाता हु। उस रात बार बार एक अजीब सा इंसान मेरे पास आकर बहुत तेज चिल्लाता है और अदृश्य हो जाता है, वो कई बार मेरे पास आया चिल्लाया लेकिन मुझे छु नहीं सका।

दोस्तों करीबन एक घंटे से ज्यादा हो गया था मगर वो चीज मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाई और वहां से चली गई. मै काफी हैरान था की आखिर ऐसा कैसे हो सकता है। मैंने फिर अपने दोस्त को कॉल करने के लिए जेब से फ़ोन निकला तो इस बार फ़ोन चालू था।

मैंने अपने दोस्त को कॉल करके जब ये बात बताई तो वो भी हैरान हो गया और बोला भाई तुझे किसी और ने नहीं उस पंचमुखी यंत्र ने बचाया है जिसमे स्वयं हनुमान जी का वास है। दोस्तों मेरी आँखों से आँसू आने लगे मेने दिल से अपने दोस्त का धन्यवाद किया।​

दोस्तों मेरे इसी दोस्त ने ही मुझे हनुमान जी के इस पंचमुखी यंत्र को गिफ्ट किया था जिसकी वजह से आज मै एक बड़ी मुश्किल से बच गया। मैं इन सब चीजों में ज्यादा विश्वास नहीं करता था लेकिन उस हादसे के बाद मुझे पता चला की ये कोई मामूली यंत्र नहीं स्वयं हनुमान जी पवित्र यंत्र है।​

मैंने उस यंत्र को पकड़ कर हनुमान जी का धन्यवाद किया और अपने कमरे में चला गया।​

ऐसी है हनुमान जी तथा उनके कवच की महिमा। जो भी भक्त इसे अपने गले में धारण करता है हनुमान जी स्वयं उसकी रक्षा करते है। हनुमान कवच को धारण करने का सबसे उत्तम दिन है मंगलवार। मंगलवार के दिन आपको सुबह जल्दी उठ स्नान इत्यादि करने के बाद हनुमान कवच को हनुमान जी फोटो या प्रतिमा के पास रखना है। थोड़ा सा गंगा जल आप हनुमान कवच में छिड़क ले. अब धुप बत्ती जलाकर हनुमान चालीसा का आपको एक पाठ करना है। अब आपको हनुमान कवच धारण करना है।

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हांक तें कांपै॥॥

भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥॥

Prabhubhakti
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